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बिलासपुर क्षेत्र में दर्जनों प्रवासी एक ही टेंट में रहने को मजबूर
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बिलासपुर में टेंट में रहने को मजबूर प्रवासी मजबूर।
- फोटो : BILASPUR
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जामली (बिलासपुर)। कोरोना वायरस के चलते प्रदेश में बने कर्फ्यू के हालातों ने प्रवासी मजदूरों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। जहां एक ओर बद्दी, नालागढ़ में चंबा और किन्नौर जैसे दूरदराज के इलाकों से आए मजदूर व फैक्टरी वर्कर अपने घरों को पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का पैदल ही सफर तय करने को मजबूर हैं तो दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर से आए दर्जनों की संख्या में प्रवासी मजदूर एक टेंट के नीचे गुजर बसर करने को लाचार हैं।
कोरोना वायरस संक्रमण से लॉकडाउन करने की घोषणा करते हुए लोगों से अपने घरों में रहने की अपील भी की गई है, वहीं लॉकडाउन के चलते जहां रेस्टोरेंट, होटल, फैक्टरियों सहित कई संस्थान बंद कर दिए गए हैं तो वहीं इसका सीधा असर प्रवासी मजदूरों पर पड़ रहा है।
गौरतलब है कि बद्दी, नालागढ़ स्थित फैक्टरियों में काम करने वाले चंबा व किन्नौर के मजदूरों को जहां कई मीलों का सफर पैदल ही तय करना पड़ रहा है तो वहीं जम्मू-कश्मीर से आये मजदूर भी कर्फ्यू के चलते एक ही टेंट के नीचे गुजर बसर करने को मजबूर हैं। बिलासपुर के श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जामली, छड़ोल, कल्लर सहित कई ऐसे इलाके हैं जहां काफी संख्या में प्रवासी मजदूर जम्मू-कश्मीर से आए हैं और कर्फ्यू के चलते कुछ दिनों से एक ही टेंट के नीचे रहने को मजबूर हैं। मजदूरों की कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जहां पीएम मोदी सोशल डिस्टेंसिंग की बात कह रहे हैं, मगर बीते कुछ दिनों से सभी मजदूर एक ही टेंट के नीचे रहने को मजबूर हैं। साथ ही प्रवासी मजदूरों का कहना है कि अभी उन्हें मजदूरी भी नहीं मिली है और खाने-पीने के लिए उन्हें खुद ही सामान खरीदना पड़ता है जो कि अब 10 से 20 रुपये महंगा हो गया है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार सहित हिमाचल व जम्मू-कश्मीर की सरकार से जल्द ही उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की अपील की है।
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बिलासपुर उपायुक्त राजेश्वर गोयल का कहना है कि बिलासपुर जिले में 10,800 प्रवासी मजदूर रह रहे हैं जिनके लिए विभिन्न एनजीओ के माध्यम से निशुल्क भोजन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उन्होंने सड़क मार्ग से जाने वाले दूरदराज के मजदूरों को होटल व ढाबा बंद होने की स्थिति में नजदीकी पैट्रोल पंप में भी निशुल्क खाना उपलब्ध होने की बात कही है। वहीं उपायुक्त बिलासपुर ने सभी प्रवासी मजदूरों से फिलहाल जहां है वहीं रहने की अपील की है।
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कोरोना वायरस संक्रमण से लॉकडाउन करने की घोषणा करते हुए लोगों से अपने घरों में रहने की अपील भी की गई है, वहीं लॉकडाउन के चलते जहां रेस्टोरेंट, होटल, फैक्टरियों सहित कई संस्थान बंद कर दिए गए हैं तो वहीं इसका सीधा असर प्रवासी मजदूरों पर पड़ रहा है।
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गौरतलब है कि बद्दी, नालागढ़ स्थित फैक्टरियों में काम करने वाले चंबा व किन्नौर के मजदूरों को जहां कई मीलों का सफर पैदल ही तय करना पड़ रहा है तो वहीं जम्मू-कश्मीर से आये मजदूर भी कर्फ्यू के चलते एक ही टेंट के नीचे गुजर बसर करने को मजबूर हैं। बिलासपुर के श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जामली, छड़ोल, कल्लर सहित कई ऐसे इलाके हैं जहां काफी संख्या में प्रवासी मजदूर जम्मू-कश्मीर से आए हैं और कर्फ्यू के चलते कुछ दिनों से एक ही टेंट के नीचे रहने को मजबूर हैं। मजदूरों की कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जहां पीएम मोदी सोशल डिस्टेंसिंग की बात कह रहे हैं, मगर बीते कुछ दिनों से सभी मजदूर एक ही टेंट के नीचे रहने को मजबूर हैं। साथ ही प्रवासी मजदूरों का कहना है कि अभी उन्हें मजदूरी भी नहीं मिली है और खाने-पीने के लिए उन्हें खुद ही सामान खरीदना पड़ता है जो कि अब 10 से 20 रुपये महंगा हो गया है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार सहित हिमाचल व जम्मू-कश्मीर की सरकार से जल्द ही उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की अपील की है।
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बिलासपुर उपायुक्त राजेश्वर गोयल का कहना है कि बिलासपुर जिले में 10,800 प्रवासी मजदूर रह रहे हैं जिनके लिए विभिन्न एनजीओ के माध्यम से निशुल्क भोजन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उन्होंने सड़क मार्ग से जाने वाले दूरदराज के मजदूरों को होटल व ढाबा बंद होने की स्थिति में नजदीकी पैट्रोल पंप में भी निशुल्क खाना उपलब्ध होने की बात कही है। वहीं उपायुक्त बिलासपुर ने सभी प्रवासी मजदूरों से फिलहाल जहां है वहीं रहने की अपील की है।