{"_id":"6a2aa5da57e611bcb30b62cf","slug":"compensation-not-received-despite-auction-order-nhai-granted-more-time-by-the-court-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-161500-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: नीलामी आदेश के बाद भी नहीं मिला मुआवजा, एनएचएआई को अदालत से फिर मिली मोहलत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: नीलामी आदेश के बाद भी नहीं मिला मुआवजा, एनएचएआई को अदालत से फिर मिली मोहलत
Thu, 11 Jun 2026 10:39 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 11 Jun 2026 10:39 PM IST
विज्ञापन
अदालत से
-फोरलेन प्रभावितों के करोड़ों रुपये की राशि लंबित, 4 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
-प्राधिकरण ने 33 निष्पादन याचिकाओं में डिमांड ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया का हवाला देकर मांगा समय
-20 मार्च को हुए थे संपत्ति बिक्री के आदेश, 10 जून तक भी अदालत में जमा नहीं हुई मुआवजा राशि
-फोरलेन संघर्ष समिति डैहर गडकरी को भेजेगी ज्ञापन, प्रभावितों ने न्याय में देरी पर जताई नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को मुआवजा भुगतान में हो रही देरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। करोड़ों रुपये के मुआवजे की अदायगी न होने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की संलग्न संपत्तियों की नीलामी तक के आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है। अदालत ने एनएचएआई को मुआवजा राशि जमा करने के लिए दो सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत प्रदान की है।
मामला फोरलेन परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के बढ़े हुए मुआवजे से जुड़ा है। प्रभावित भू-स्वामियों को न्यायालय के आदेशों के बावजूद राशि नहीं मिलने पर उन्होंने निष्पादन याचिकाएं दायर की थीं। इसके बाद अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए एनएचएआई की संलग्न संपत्तियों की बिक्री की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत में श्याम लाल बनाम एनएचएआई, भगत राम एवं अन्य बनाम एनएचएआई मामलों की सुनवाई के दौरान संपत्ति बिक्री संबंधी आदेश पारित किए गए थे।
श्याम लाल मामले में डिक्री होल्डर की ओर से 3 करोड़ 28 लाख 36 हजार 784 रुपये की वसूली के लिए निष्पादन याचिका दायर की गई थी। अदालत ने उक्त राशि को आरक्षित मूल्य मानते हुए संलग्न संपत्ति की बिक्री के आदेश दिए थे। वहीं भगत राम एवं अन्य के मामले में 3 करोड़ 7 लाख 11 हजार 280 रुपये की वसूली के लिए याचिका दायर की गई थी। इस मामले में भी अदालत ने संलग्न संपत्ति को आरक्षित मूल्य पर बेचने तथा बिक्री वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे। दोनों मामलों में अदालत ने नीलामी संबंधी प्रकाशन 22 अप्रैल 2026 तक करवाने, 23 मई 2026 को मौके पर नीलामी की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए थे। साथ ही 10 जून को प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए थे। भगत राम बनाम एनएचएआई मामले की 10 जून को हुई सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से अदालत को बताया गया कि विभाग मुआवजा राशि जमा करने के लिए तैयार है। हालांकि विभिन्न मामलों में भुगतान के लिए डिमांड ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। एनएचएआई के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि करीब 33 निष्पादन याचिकाओं में भुगतान किया जाना है, जिसके कारण डिमांड ड्राफ्ट तैयार करने और राशि जमा करने में समय लग रहा है। इस पर अदालत ने दो सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों का कहना है कि वर्षों पहले उनकी भूमि परियोजना के लिए अधिग्रहित कर ली गई थी, लेकिन वैधानिक मुआवजे के लिए उन्हें आज भी न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि जब आम नागरिक किसी वित्तीय देनदारी का भुगतान नहीं करता तो उसकी संपत्ति कुर्क करने जैसी कार्रवाई होती है, लेकिन सरकारी संस्थाओं के मामलों में भुगतान लगातार टलता जा रहा है। प्रभावितों का कहना है कि यह केवल मुआवजा राशि का मुद्दा नहीं है, बल्कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित नागरिकों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का मामला भी है। उनका मानना है कि न्यायालय के आदेशों का समय पर पालन होना चाहिए ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
विज्ञापन
फोरलेन संघर्ष समिति डैहर के अध्यक्ष विजय शर्मा ने कहा कि प्रभावित परिवारों की ओर से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन भेजा जाएगा। ज्ञापन में लंबित मुआवजा मामलों का शीघ्र समाधान करने और प्रभावितों को उनका वैध भुगतान जल्द उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि फोरलेन परियोजना से प्रभावित अनेक परिवार वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। न्यायालय द्वारा संपत्ति बिक्री तक के आदेश जारी होने के बावजूद भुगतान लंबित रहना गंभीर चिंता का विषय है। अब सभी की निगाहें 4 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि इस बार एनएचएआई अदालत के समक्ष लंबित करोड़ों रुपये की राशि जमा कराएगा और वर्षों से चल रहा मुआवजा विवाद समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा।
विज्ञापन
-फोरलेन प्रभावितों के करोड़ों रुपये की राशि लंबित, 4 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
-प्राधिकरण ने 33 निष्पादन याचिकाओं में डिमांड ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया का हवाला देकर मांगा समय
-20 मार्च को हुए थे संपत्ति बिक्री के आदेश, 10 जून तक भी अदालत में जमा नहीं हुई मुआवजा राशि
-फोरलेन संघर्ष समिति डैहर गडकरी को भेजेगी ज्ञापन, प्रभावितों ने न्याय में देरी पर जताई नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को मुआवजा भुगतान में हो रही देरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। करोड़ों रुपये के मुआवजे की अदायगी न होने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की संलग्न संपत्तियों की नीलामी तक के आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है। अदालत ने एनएचएआई को मुआवजा राशि जमा करने के लिए दो सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत प्रदान की है।
मामला फोरलेन परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के बढ़े हुए मुआवजे से जुड़ा है। प्रभावित भू-स्वामियों को न्यायालय के आदेशों के बावजूद राशि नहीं मिलने पर उन्होंने निष्पादन याचिकाएं दायर की थीं। इसके बाद अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए एनएचएआई की संलग्न संपत्तियों की बिक्री की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत में श्याम लाल बनाम एनएचएआई, भगत राम एवं अन्य बनाम एनएचएआई मामलों की सुनवाई के दौरान संपत्ति बिक्री संबंधी आदेश पारित किए गए थे।
विज्ञापन
श्याम लाल मामले में डिक्री होल्डर की ओर से 3 करोड़ 28 लाख 36 हजार 784 रुपये की वसूली के लिए निष्पादन याचिका दायर की गई थी। अदालत ने उक्त राशि को आरक्षित मूल्य मानते हुए संलग्न संपत्ति की बिक्री के आदेश दिए थे। वहीं भगत राम एवं अन्य के मामले में 3 करोड़ 7 लाख 11 हजार 280 रुपये की वसूली के लिए याचिका दायर की गई थी। इस मामले में भी अदालत ने संलग्न संपत्ति को आरक्षित मूल्य पर बेचने तथा बिक्री वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे। दोनों मामलों में अदालत ने नीलामी संबंधी प्रकाशन 22 अप्रैल 2026 तक करवाने, 23 मई 2026 को मौके पर नीलामी की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए थे। साथ ही 10 जून को प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए थे। भगत राम बनाम एनएचएआई मामले की 10 जून को हुई सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से अदालत को बताया गया कि विभाग मुआवजा राशि जमा करने के लिए तैयार है। हालांकि विभिन्न मामलों में भुगतान के लिए डिमांड ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। एनएचएआई के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि करीब 33 निष्पादन याचिकाओं में भुगतान किया जाना है, जिसके कारण डिमांड ड्राफ्ट तैयार करने और राशि जमा करने में समय लग रहा है। इस पर अदालत ने दो सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों का कहना है कि वर्षों पहले उनकी भूमि परियोजना के लिए अधिग्रहित कर ली गई थी, लेकिन वैधानिक मुआवजे के लिए उन्हें आज भी न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि जब आम नागरिक किसी वित्तीय देनदारी का भुगतान नहीं करता तो उसकी संपत्ति कुर्क करने जैसी कार्रवाई होती है, लेकिन सरकारी संस्थाओं के मामलों में भुगतान लगातार टलता जा रहा है। प्रभावितों का कहना है कि यह केवल मुआवजा राशि का मुद्दा नहीं है, बल्कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित नागरिकों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का मामला भी है। उनका मानना है कि न्यायालय के आदेशों का समय पर पालन होना चाहिए ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
विज्ञापन
फोरलेन संघर्ष समिति डैहर के अध्यक्ष विजय शर्मा ने कहा कि प्रभावित परिवारों की ओर से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन भेजा जाएगा। ज्ञापन में लंबित मुआवजा मामलों का शीघ्र समाधान करने और प्रभावितों को उनका वैध भुगतान जल्द उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि फोरलेन परियोजना से प्रभावित अनेक परिवार वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। न्यायालय द्वारा संपत्ति बिक्री तक के आदेश जारी होने के बावजूद भुगतान लंबित रहना गंभीर चिंता का विषय है। अब सभी की निगाहें 4 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि इस बार एनएचएआई अदालत के समक्ष लंबित करोड़ों रुपये की राशि जमा कराएगा और वर्षों से चल रहा मुआवजा विवाद समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा।