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स्वच्छता सर्वेक्षण में पहले से 41वें स्थान पर लुढ़का नयनादेवी
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बिलासपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की शनिवार को जारी रैंकिंग ने बिलासपुर जिले की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पिछले साल 25 हजार से कम की आबादी वालों की जोनल रैंकिंग में 397 स्थान पाकर प्रदेश में अव्वल रहने वाला नयनादेवी शहर इस बार 41वें स्थान पर पहुंच गया है। रैंकिंग भी लुढ़ककर 661 पहुंच गई है। तलाई शहर भी 500वें से 590वें रैंक पर आ गया है।
जिले में जिला प्रशासन, नगर परिषद और नगर पंचायतें सफाई व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे करते रहे, लेकिन धरातल पर बिलासपुर, घुमारवीं, श्री नयना देवी और तलाई में झूठे दावों की पूरी तरह से पोल खुल गई है। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर लाखों रुपये का खर्चा तो होता रहा लेकिन अब स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्तर क्षेत्र के 25 हजार से कम वाली आबादी के शहरों में बिलासपुर को बुरी तरह से शिकस्त मिली है। इन शहरों में सफाई व्यवस्था किस तरह से बदहाल है इसको यह सर्वेक्षण रिपोर्ट ब्यान कर रही है। अगर बात साल 2020 के स्वच्छता सर्वेक्षण की बात करें तो उसे रिपोर्ट में बिलासपुर की सबसे छोटी नगर परिषद श्री नयनादेवी 397वें पायदान पर थी। लेकिन 2021 की रिपोर्ट में यह सीधे 264 रैंक पिछड़कर 661वें पायदान पर आ पहुंची है। वहीं नगर पंचायत तलाई भी 500 पायदान से 90 रेंक पिछड़कर सीधे 590वें पायदान पर पहुंची है।
इनसेट
25 हजार आबादी से कम वाले शहरों में बिलासपुर को यह मिला रैंक
हिमाचल के उत्तर क्षेत्र के 25 हजार से कम आबादी वाले 48 शहरों में बिलासपुर जिले के बिलासपुर शहर को 1210.07 अंक के साथ 593, श्री नयनादेवी जी को 930.9 अंकों के साथ 661, घुमारवीं को 1120.39 अंकों के साथ 621 और तलाई को 1220.54 अंकों के साथ 590 रैंक मिला है। जोकि अपने आप में ही सफाई व्यवस्था की बदहाली को बयान कर रहे हैं।
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इनसेट
सफाई व्यवस्था की खामियों पर होगा मंथन, 2022 के लिए सुधारेंगे रैंकिंग : उपायुक्त
2021 में सफाई व्यवस्था में पिछड़ने के क्या कारण रहे और किन कारणों से जिले के दो शहरों की रैंकिंग में गिरावट आई है, उन पर विचार-विमर्श किया जाएगा। 2022 के सर्वेक्षण में उत्तर क्षेत्र की नगर परिषद और नगर पंचायतों से बेहतर कार्य कर रैंकिंग को सुधारा जाएगा। अभी बिलासपुर में मेरा कार्यकाल मात्र चार माह का हुआ है, सफाई व्यवस्था को सुधारने पर जोर दिया है।
पंकज राय, उपायुक्त बिलासपुर
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जिले में जिला प्रशासन, नगर परिषद और नगर पंचायतें सफाई व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे करते रहे, लेकिन धरातल पर बिलासपुर, घुमारवीं, श्री नयना देवी और तलाई में झूठे दावों की पूरी तरह से पोल खुल गई है। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर लाखों रुपये का खर्चा तो होता रहा लेकिन अब स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्तर क्षेत्र के 25 हजार से कम वाली आबादी के शहरों में बिलासपुर को बुरी तरह से शिकस्त मिली है। इन शहरों में सफाई व्यवस्था किस तरह से बदहाल है इसको यह सर्वेक्षण रिपोर्ट ब्यान कर रही है। अगर बात साल 2020 के स्वच्छता सर्वेक्षण की बात करें तो उसे रिपोर्ट में बिलासपुर की सबसे छोटी नगर परिषद श्री नयनादेवी 397वें पायदान पर थी। लेकिन 2021 की रिपोर्ट में यह सीधे 264 रैंक पिछड़कर 661वें पायदान पर आ पहुंची है। वहीं नगर पंचायत तलाई भी 500 पायदान से 90 रेंक पिछड़कर सीधे 590वें पायदान पर पहुंची है।
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25 हजार आबादी से कम वाले शहरों में बिलासपुर को यह मिला रैंक
हिमाचल के उत्तर क्षेत्र के 25 हजार से कम आबादी वाले 48 शहरों में बिलासपुर जिले के बिलासपुर शहर को 1210.07 अंक के साथ 593, श्री नयनादेवी जी को 930.9 अंकों के साथ 661, घुमारवीं को 1120.39 अंकों के साथ 621 और तलाई को 1220.54 अंकों के साथ 590 रैंक मिला है। जोकि अपने आप में ही सफाई व्यवस्था की बदहाली को बयान कर रहे हैं।
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सफाई व्यवस्था की खामियों पर होगा मंथन, 2022 के लिए सुधारेंगे रैंकिंग : उपायुक्त
2021 में सफाई व्यवस्था में पिछड़ने के क्या कारण रहे और किन कारणों से जिले के दो शहरों की रैंकिंग में गिरावट आई है, उन पर विचार-विमर्श किया जाएगा। 2022 के सर्वेक्षण में उत्तर क्षेत्र की नगर परिषद और नगर पंचायतों से बेहतर कार्य कर रैंकिंग को सुधारा जाएगा। अभी बिलासपुर में मेरा कार्यकाल मात्र चार माह का हुआ है, सफाई व्यवस्था को सुधारने पर जोर दिया है।
पंकज राय, उपायुक्त बिलासपुर