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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्ती: चीफ सेक्रेटरी को मॉनिटरिंग के निर्देश, मुक्तिधाम मामले में जनवरी में अगली सुनवाई
Mon, 08 Dec 2025 10:54 PM IST
राहुल तिवारी
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: राहुल तिवारी
Updated Mon, 08 Dec 2025 10:54 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के बदहाल मुक्तिधामों पर कलेक्टरों से मिली रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए चीफ सेक्रेटरी को अनुपालन की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार नागरिक अधिकार है। इसलिए हर मुक्तिधाम में साफ सफाई और बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएं।
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बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के बदहाल मुक्तिधामों पर सभी जिलों के कलेक्टर से फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट मांगी थी, जो अब कोर्ट में पेश कर दी गई है। कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को आदेशों के अनुपालन की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिलासपुर निगम कमिश्नर को शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अगली सुनवाई जनवरी में होगी। इधर शासन ने बताया है कि मुक्तिधामों के रखरखाव के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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इन दिशा निर्देशों में साफ सफाई, ग्रीन फेंसिंग या कंटीले तार से बाउंड्री, शेड की मरम्मत, बिजली पानी और महिला पुरुष के लिए अलग शौचालय जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार, संविधान के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है, इसलिए हर मुक्तिधाम में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
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दरअसल, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा 29 सितंबर को बिल्हा के मुक्तिधाम पहुंचे थे, जहां उन्होंने अव्यवस्था और गंदगी देखी। वे एक न्यायिक अधिकारी के पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने इस स्थिति पर स्वतः संज्ञान लिया। पिछली सुनवाई में मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और बिलासपुर कलेक्टर ने अपने शपथपत्र प्रस्तुत किए थे। साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और शहरी प्रशासन विभाग ने छह और आठ अक्टूबर 2025 को राज्यव्यापी दिशा निर्देश जारी किए थे। इस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल दिशा निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा।
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