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1972 के पेंशन नियमों में बदलाव मंजूर नहीं : संघ
Wed, 23 Apr 2025 11:42 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:42 PM IST
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-सेवानिवृत्ति पर कम्यूटेशन और वित्तीय लाभों में न हो कटौती
-ड्रेस कोड के नाम पर अध्यापकों पर न थोपी जाए वर्दी
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने राज्य सरकार को कड़े शब्दों में चेताया है कि पेंशन नियमों में किसी भी प्रकार का बदलाव और सेवानिवृत्ति लाभों में कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संघ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आग्रह किया है कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर शिक्षकों को राहत प्रदान करें।
संघ की जिला इकाई की बैठक में जिला प्रधान राकेश कुमार संधू, राज्य वरिष्ठ प्रधान नरवीर सिंह चंदेल, प्रदेश संयुक्त सचिव सेना पाल, जिला वरिष्ठ उपप्रधान वेद प्रकाश शर्मा, महासचिव सुभाष चंद चौधरी समेत सभी पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा कि 1972 के पेंशन नियमों में किसी भी तरह का संशोधन अस्वीकार्य है। साथ ही, सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले पेंशन कम्यूटेशन लाभों को समाप्त करना शिक्षकों के साथ अन्याय होगा। कहा कि सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले ये लाभ किसी भी कर्मचारी के लिए सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने का एकमात्र साधन होते हैं। यदि इनमें कटौती की गई तो कर्मचारी वर्ग में आक्रोश की लहर दौड़ जाएगी। संघ ने प्रदेश के सैकड़ों स्कूलों में रिक्त चल रहे प्रधानाचार्य के पदों को तुरंत पदोन्नति के माध्यम से भरने की मांग की। प्रवक्ता और मुख्याध्यापकों को समय रहते प्रधानाचार्य बनाया जाना आवश्यक बताया गया। साथ ही पिछले तीन-चार वर्षों से लंबित टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नति सूची को शीघ्र जारी करने की मांग की गई। कहा कि अध्यापकों के लिए ड्रेस कोड की बात स्वीकार की गई है, लेकिन वर्दी थोपना स्वीकार्य नहीं है। कुछ स्कूलों में एक रंग की वर्दी लागू करने की प्रवृत्ति को निंदनीय बताया गया और आग्रह किया गया कि सभी शिक्षक सादे वस्त्रों में ही विद्यालय आएं। इससे अध्यापक वर्ग की गरिमा और परंपरा बनी रहेगी। यदि सरकार सेवानिवृत्ति की आयु 59 या 60 वर्ष करने का विचार करती है तो संघ इसका स्वागत करेगा, लेकिन पेंशन लाभों में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं होगी।
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-ड्रेस कोड के नाम पर अध्यापकों पर न थोपी जाए वर्दी
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने राज्य सरकार को कड़े शब्दों में चेताया है कि पेंशन नियमों में किसी भी प्रकार का बदलाव और सेवानिवृत्ति लाभों में कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संघ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आग्रह किया है कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर शिक्षकों को राहत प्रदान करें।
संघ की जिला इकाई की बैठक में जिला प्रधान राकेश कुमार संधू, राज्य वरिष्ठ प्रधान नरवीर सिंह चंदेल, प्रदेश संयुक्त सचिव सेना पाल, जिला वरिष्ठ उपप्रधान वेद प्रकाश शर्मा, महासचिव सुभाष चंद चौधरी समेत सभी पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा कि 1972 के पेंशन नियमों में किसी भी तरह का संशोधन अस्वीकार्य है। साथ ही, सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले पेंशन कम्यूटेशन लाभों को समाप्त करना शिक्षकों के साथ अन्याय होगा। कहा कि सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले ये लाभ किसी भी कर्मचारी के लिए सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने का एकमात्र साधन होते हैं। यदि इनमें कटौती की गई तो कर्मचारी वर्ग में आक्रोश की लहर दौड़ जाएगी। संघ ने प्रदेश के सैकड़ों स्कूलों में रिक्त चल रहे प्रधानाचार्य के पदों को तुरंत पदोन्नति के माध्यम से भरने की मांग की। प्रवक्ता और मुख्याध्यापकों को समय रहते प्रधानाचार्य बनाया जाना आवश्यक बताया गया। साथ ही पिछले तीन-चार वर्षों से लंबित टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नति सूची को शीघ्र जारी करने की मांग की गई। कहा कि अध्यापकों के लिए ड्रेस कोड की बात स्वीकार की गई है, लेकिन वर्दी थोपना स्वीकार्य नहीं है। कुछ स्कूलों में एक रंग की वर्दी लागू करने की प्रवृत्ति को निंदनीय बताया गया और आग्रह किया गया कि सभी शिक्षक सादे वस्त्रों में ही विद्यालय आएं। इससे अध्यापक वर्ग की गरिमा और परंपरा बनी रहेगी। यदि सरकार सेवानिवृत्ति की आयु 59 या 60 वर्ष करने का विचार करती है तो संघ इसका स्वागत करेगा, लेकिन पेंशन लाभों में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं होगी।
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