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Bilaspur News: सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों को ड्रेस भत्ता कम, स्टेशन तय न होने से बढ़ी परेशानी
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स्कूल प्रवक्ता संघ ने कहा- मौजूदा राशि में ड्रेस और जूते खरीदना मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सरकारी सीबीएसई स्कूलों में कार्यरत और नवनियुक्त शिक्षकों के सामने ड्रेस और कार्यस्थल को लेकर असमंजस बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला बिलासपुर ने शिक्षा विभाग और सरकार से इस मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की है। संघ का कहना है कि मौजूदा ड्रेस भत्ता बाजार में कपड़े, सिलाई और जूतों की कीमतों के मुकाबले कम है। वहीं, नवनियुक्त शिक्षकों के कार्यस्थल को लेकर स्थिति साफ नहीं होने से ड्रेस खरीदने में भी परेशानी हो रही है। संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र ठाकुर की अगुवाई में पदाधिकारियों ने कहा कि महंगाई के मौजूदा दौर में निर्धारित राशि में पूरी ड्रेस तैयार करना मुश्किल है। कपड़ा, सिलाई और जूतों समेत जरूरी सामान खरीदने पर खर्च तय राशि से अधिक हो रहा है। ऐसे में शिक्षकों को अपनी जेब से अतिरिक्त पैसा लगाना पड़ रहा है। संघ ने बाजार की मौजूदा कीमतों को देखते हुए ड्रेस भत्ते में बढ़ोतरी की मांग की है।
संघ प्रतिनिधियों ने कहा कि कार्यरत शिक्षकों के साथ परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयनित नवनियुक्त शिक्षकों को लेकर अभी कई बातें साफ नहीं हैं। आने वाले दिनों में तबादले या कार्यस्थल में बदलाव का निर्णय होता है तो पहले खरीदी गई ड्रेस का उपयोग प्रभावित हो सकता है। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। संघ के अनुसार ड्रेस व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और उनकी तैनाती से जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। समय रहते निर्णय होने से शिक्षकों को अतिरिक्त खर्च और मानसिक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
पहले स्थान तय करने की मांग
शिक्षक संघ ने कहा कि ड्रेस व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों की तैनाती और तबादला नीति को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए। स्थान बदलने की स्थिति में शिक्षकों को दोबारा ड्रेस तैयार करवानी पड़ सकती है। संघ ने मांग की है कि जब तक कार्यरत और मेरिट से चयनित शिक्षकों के स्थान को लेकर फैसला नहीं होता, तब तक ड्रेस खरीदने की अनिवार्यता से राहत दी जाए। शिक्षा विभाग से इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सरकारी सीबीएसई स्कूलों में कार्यरत और नवनियुक्त शिक्षकों के सामने ड्रेस और कार्यस्थल को लेकर असमंजस बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला बिलासपुर ने शिक्षा विभाग और सरकार से इस मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की है। संघ का कहना है कि मौजूदा ड्रेस भत्ता बाजार में कपड़े, सिलाई और जूतों की कीमतों के मुकाबले कम है। वहीं, नवनियुक्त शिक्षकों के कार्यस्थल को लेकर स्थिति साफ नहीं होने से ड्रेस खरीदने में भी परेशानी हो रही है। संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र ठाकुर की अगुवाई में पदाधिकारियों ने कहा कि महंगाई के मौजूदा दौर में निर्धारित राशि में पूरी ड्रेस तैयार करना मुश्किल है। कपड़ा, सिलाई और जूतों समेत जरूरी सामान खरीदने पर खर्च तय राशि से अधिक हो रहा है। ऐसे में शिक्षकों को अपनी जेब से अतिरिक्त पैसा लगाना पड़ रहा है। संघ ने बाजार की मौजूदा कीमतों को देखते हुए ड्रेस भत्ते में बढ़ोतरी की मांग की है।
संघ प्रतिनिधियों ने कहा कि कार्यरत शिक्षकों के साथ परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयनित नवनियुक्त शिक्षकों को लेकर अभी कई बातें साफ नहीं हैं। आने वाले दिनों में तबादले या कार्यस्थल में बदलाव का निर्णय होता है तो पहले खरीदी गई ड्रेस का उपयोग प्रभावित हो सकता है। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। संघ के अनुसार ड्रेस व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और उनकी तैनाती से जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। समय रहते निर्णय होने से शिक्षकों को अतिरिक्त खर्च और मानसिक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
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पहले स्थान तय करने की मांग
शिक्षक संघ ने कहा कि ड्रेस व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों की तैनाती और तबादला नीति को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए। स्थान बदलने की स्थिति में शिक्षकों को दोबारा ड्रेस तैयार करवानी पड़ सकती है। संघ ने मांग की है कि जब तक कार्यरत और मेरिट से चयनित शिक्षकों के स्थान को लेकर फैसला नहीं होता, तब तक ड्रेस खरीदने की अनिवार्यता से राहत दी जाए। शिक्षा विभाग से इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की गई है।
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