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Bilaspur News: चिट्टा केस में दो आरोपी बरी, पुलिस गवाहों के बयानों में विरोधाभास
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विशेष अदालत ने कहा- बरामदगी और आरोपियों का कब्जा संदेह से परे साबित नहीं कर सका अभियोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लद्दा हाई स्कूल के पास 5.42 ग्राम चिट्टा बरामदगी के मामले में घुमारवीं की विशेष अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश ने पुलिस गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष कथित बरामदगी और आरोपियों के कब्जे को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
मामला 20 फरवरी 2022 का है। अभियोजन के अनुसार पुलिस टीम लद्दा क्षेत्र में गश्त पर थी। शाम करीब 5:15 बजे हाई स्कूल के पास दो युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों के भागने का प्रयास करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार इसी दौरान एक आरोपी ने जेब से पैकेट निकालकर सड़क किनारे नाली में फेंक दिया। जांच में पैकेट से 5.42 ग्राम पदार्थ बरामद हुआ, जिसे एफएसएल जांच में डायस्टाइल मॉर्फिन (हेरोइन) पाया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वतंत्र गवाह के मौके पर पहुंचने को लेकर पुलिसकर्मियों के बयानों में अंतर पाया। एक गवाह ने बताया कि स्वतंत्र गवाह कुछ दूरी पर पिकअप के पास मिला था, जबकि जांच अधिकारी के अनुसार कांस्टेबल उसे 25-30 मिनट बाद मौके पर लेकर आया था।
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मौके की फोटोग्राफी को लेकर भी पुलिस गवाह के बयान में विरोधाभास सामने आया। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र गवाह का उपलब्ध न होना अकेले अभियोजन के लिए घातक नहीं है, लेकिन इस मामले में पुलिस गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं। इससे कथित बरामदगी की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है।
अदालत ने अभियोजन के मूल तथ्यों को संदेह से परे साबित न होने पर दोनों आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लद्दा हाई स्कूल के पास 5.42 ग्राम चिट्टा बरामदगी के मामले में घुमारवीं की विशेष अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश ने पुलिस गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष कथित बरामदगी और आरोपियों के कब्जे को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
मामला 20 फरवरी 2022 का है। अभियोजन के अनुसार पुलिस टीम लद्दा क्षेत्र में गश्त पर थी। शाम करीब 5:15 बजे हाई स्कूल के पास दो युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों के भागने का प्रयास करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार इसी दौरान एक आरोपी ने जेब से पैकेट निकालकर सड़क किनारे नाली में फेंक दिया। जांच में पैकेट से 5.42 ग्राम पदार्थ बरामद हुआ, जिसे एफएसएल जांच में डायस्टाइल मॉर्फिन (हेरोइन) पाया गया।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वतंत्र गवाह के मौके पर पहुंचने को लेकर पुलिसकर्मियों के बयानों में अंतर पाया। एक गवाह ने बताया कि स्वतंत्र गवाह कुछ दूरी पर पिकअप के पास मिला था, जबकि जांच अधिकारी के अनुसार कांस्टेबल उसे 25-30 मिनट बाद मौके पर लेकर आया था।
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मौके की फोटोग्राफी को लेकर भी पुलिस गवाह के बयान में विरोधाभास सामने आया। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र गवाह का उपलब्ध न होना अकेले अभियोजन के लिए घातक नहीं है, लेकिन इस मामले में पुलिस गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं। इससे कथित बरामदगी की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है।
अदालत ने अभियोजन के मूल तथ्यों को संदेह से परे साबित न होने पर दोनों आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया।