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Bilaspur News: जाम से जूझता था बरमाणा, अब पसरा है सन्नाटा

Tue, 20 Dec 2022 11:42 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2022 11:42 PM IST
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bilaspur news himachal news Barmana used to struggle with jam, now silence has spread
बिलासपुर के बरमाणा बाजार में दिखते इक्के दुक्के लोग। - फोटो : BILASPUR
बिलासपुर। भीड़भाड़ और ट्रैफिक जाम से हर दिन जूझने वाले बरमाणा कस्बे में इन दिनों सन्नाटा पसरा रहता है। कस्बे में दुकानें तो खुली रहती हैं, लेकिन लोग नजर नहीं आ रहे हैं। बिना कर्फ्यू के ही शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हैं।
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बरमाणा में एसीसी सीमेंट प्लांट के बंद होने के बाद से ऐसे हालात हैं। किराना, ढाबे और मेकेनिकों का काम धंधा मंदा है। अधिकतर ढाबे और मेकेनिक की दुकानें बंद हो चुकी हैं। जो खुली रहती हैं उनमें नाममात्र का काम रह गया है।
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मंगलवार दोपहर बाद बरमाणा बाजार में सामान खरीदते हुए बेहद कम संख्या में लोग दिखे। बाजार में दुकानें खुली होने के बावजूद इक्के दुक्के लोग बाजार में घूमते दिखे। कस्बे में वाहनों की आवाजाही भी कम ही दिखी। चंडीगढ़-मनाली हाईवे में वाहनों की आवाजाही तो रही, लेकिन बरमाणा में रुकने वाले वाहनों की संख्या बेहद कम रही।
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एसीसी चौक में भी यही हाल रहा। एसीसी चौक पर आम दिनों में जाम की समस्या बनी रहती है। इसका कारण प्लांट से निकलने वाले ट्रक होते थे लेकिन प्लांट बंद होने के बाद ट्रक खड़े हो गए हैं। कामगारों के जाने के बाद और चालकों के घरों में रहने से किराना और ढाबा संचालकों का काम भी मंदा हो गया है। कामगारों और ट्रक चालकों पर आश्रित अधिकतर ढाबे तो बंद हो चुके हैं।
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200 तक लग जाती थी प्लेट : रतन
बरमाणा में ढाबा संचालक रतन ने बताया कि काम ठप हो गया है। जब प्लांट चल रहा था तो रोजाना तीन तरह की सब्जियां और दाल बनाई जाती थी। साथ में चावल और चपाती बनाई जाती थी। अब एक दाल बनाते हैं। चपाती भी तभी बनाते हैं जब कोई ग्राहक आ जाए। इन दिनों पूरे दिन में 10 से 15 प्लेट खाने की लगती हैं। आम दिनों में 200 तक प्लेट लग जाती थीं।

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3,000 की हो जाती थी आमदनी
ट्रकों के खड़े रहने से मेकेनिक का काम भी ठप पड़ा है। बरमाणा में मेकेनिक का काम करने वाले पवन ने बताया कि सारा दिन धूप सेंकने में निकल रहा है। काम ठप है। पहले रोजाना औसतन 3,000 रुपये की आमदनी हो जाती थी, अब शून्य हो चुकी है।
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