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Bilaspur News: कृष्ण की लीलाएं सुन लोग हुए गदगद
Sun, 14 Jul 2024 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 14 Jul 2024 11:57 PM IST
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श्री नयना देवी जी मंदिर में दर्शन करने कतारों में खड़े श्रद्धालु। संवाद
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-श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्री राम कथा के तीसरे दिन उमड़े भक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा वाचक भास्करानंद शर्मा ने कहा कि संस्कारों की तरह मिट्टी से प्रेम होना चाहिए। शिशु जब खेलता है तो वह भी मिट्टी में इतना घुल मिल जाता है कि वह उसे खाना शुरू कर देता है। मिट्टी में अनेकों प्रकार के खनिज लवण पदार्थ पाए जाते हैं जो जीव के असंख्य रोगों का नाश करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पुराण और रामायण में इस मिट्टी से प्रभु की लीलाओं का उल्लेख आता है। जब भगवान श्रीकृष्ण मिट्टी से खेल रहे होते हैं तो माता यशोदा उन्हें गुस्से में मिट्टी को मुख से बाहर निकालने के लिए डांटती है। जब श्रीकृष्ण मुख खोलते हैं तो सारी पृथ्वी को उनके मुख में देखकर सभी ब्रजवासी नतमस्तक हो जाते हैं। ठीक इसी प्रकार अयोध्या नरेश राजा दशरथ के चारों पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को खेलने के लिए मिट्टी में छोड़ दिया जाता था। शर्त रहती थी कि जो ज्यादा से ज्यादा मिट्टी अपने ऊपर उढेलेगा वहीं विजयी घोषित होगा। इस कला को देख महाराज दशरथ अति प्रसन्न होते थे। पंडित ने कहा कि जब परम पिता परमात्मा भी मिट्टी से अछूते नहीं रहे तो शिशुओं को भला मिट्टी से कैसे दूर रखा जा सकता है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वह बच्चों को इतने भी नाजुक न बनाएं कि धूल, हवा से ही वे बीमार पड़ जाएं। कथा समापन पर प्रसाद वितरण भी किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा वाचक भास्करानंद शर्मा ने कहा कि संस्कारों की तरह मिट्टी से प्रेम होना चाहिए। शिशु जब खेलता है तो वह भी मिट्टी में इतना घुल मिल जाता है कि वह उसे खाना शुरू कर देता है। मिट्टी में अनेकों प्रकार के खनिज लवण पदार्थ पाए जाते हैं जो जीव के असंख्य रोगों का नाश करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पुराण और रामायण में इस मिट्टी से प्रभु की लीलाओं का उल्लेख आता है। जब भगवान श्रीकृष्ण मिट्टी से खेल रहे होते हैं तो माता यशोदा उन्हें गुस्से में मिट्टी को मुख से बाहर निकालने के लिए डांटती है। जब श्रीकृष्ण मुख खोलते हैं तो सारी पृथ्वी को उनके मुख में देखकर सभी ब्रजवासी नतमस्तक हो जाते हैं। ठीक इसी प्रकार अयोध्या नरेश राजा दशरथ के चारों पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को खेलने के लिए मिट्टी में छोड़ दिया जाता था। शर्त रहती थी कि जो ज्यादा से ज्यादा मिट्टी अपने ऊपर उढेलेगा वहीं विजयी घोषित होगा। इस कला को देख महाराज दशरथ अति प्रसन्न होते थे। पंडित ने कहा कि जब परम पिता परमात्मा भी मिट्टी से अछूते नहीं रहे तो शिशुओं को भला मिट्टी से कैसे दूर रखा जा सकता है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वह बच्चों को इतने भी नाजुक न बनाएं कि धूल, हवा से ही वे बीमार पड़ जाएं। कथा समापन पर प्रसाद वितरण भी किया गया।
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