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Bilaspur News: छह दशक बाद भी हक के लिए संघर्ष कर रहे भाखड़ा विस्थापित
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विधानसभा में सदर विधायक त्रिलोक जमवाल ने उठाए भाखड़ा और कोलडैम प्रभावित परिवारों के मुद्दे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर विधायक त्रिलोक जमवाल ने विधानसभा में जलविद्युत परियोजनाओं से विस्थापित और प्रभावित परिवारों की समस्याएं उठाईं। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध बनने के छह दशक से अधिक समय बाद भी विस्थापित परिवार पुनर्वास और मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग की।
जमवाल ने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 1971 में री-सेटलमेंट पॉलिसी बनाई गई थी, लेकिन पात्र परिवारों की सूची आज तक पूरी नहीं हो पाई। बिलासपुर शहर भी आज लीज पर है, जिससे लोगों को अपने प्लॉटों का मालिकाना हक नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि पुराने बिलासपुर में कई बीघा जमीन रखने वाले परिवारों को नए शहर में केवल तीन-चार बिस्वे के प्लॉट मिले। समय के साथ परिवारों की संख्या बढ़ने से छोटे प्लॉट में गुजर-बसर मुश्किल हो गया है।
विधायक ने बीबीएमबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गोबिंद सागर के अधिकतम जलस्तर से करीब 30 फीट ऊपर बुर्जियां लगाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इससे प्रभावित हो रही निजी जमीनों पर कार्रवाई रोकने की मांग की।
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उन्होंने कोलडैम परियोजना प्रभावित परिवारों की समस्याएं भी उठाईं। कहा कि जमथल में डीपीएफ भूमि पर बनी एनटीपीसी कॉलोनी के कारण लोगों को पुलिस वेरिफिकेशन, पासपोर्ट और अन्य प्रमाणपत्र बनवाने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने सीएसआर और लाडा राशि स्थानीय विकास और प्रभावित परिवारों के कल्याण पर खर्च करने तथा लंबित पेयजल और सिंचाई योजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर विधायक त्रिलोक जमवाल ने विधानसभा में जलविद्युत परियोजनाओं से विस्थापित और प्रभावित परिवारों की समस्याएं उठाईं। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध बनने के छह दशक से अधिक समय बाद भी विस्थापित परिवार पुनर्वास और मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग की।
जमवाल ने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 1971 में री-सेटलमेंट पॉलिसी बनाई गई थी, लेकिन पात्र परिवारों की सूची आज तक पूरी नहीं हो पाई। बिलासपुर शहर भी आज लीज पर है, जिससे लोगों को अपने प्लॉटों का मालिकाना हक नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि पुराने बिलासपुर में कई बीघा जमीन रखने वाले परिवारों को नए शहर में केवल तीन-चार बिस्वे के प्लॉट मिले। समय के साथ परिवारों की संख्या बढ़ने से छोटे प्लॉट में गुजर-बसर मुश्किल हो गया है।
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विधायक ने बीबीएमबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गोबिंद सागर के अधिकतम जलस्तर से करीब 30 फीट ऊपर बुर्जियां लगाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इससे प्रभावित हो रही निजी जमीनों पर कार्रवाई रोकने की मांग की।
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उन्होंने कोलडैम परियोजना प्रभावित परिवारों की समस्याएं भी उठाईं। कहा कि जमथल में डीपीएफ भूमि पर बनी एनटीपीसी कॉलोनी के कारण लोगों को पुलिस वेरिफिकेशन, पासपोर्ट और अन्य प्रमाणपत्र बनवाने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने सीएसआर और लाडा राशि स्थानीय विकास और प्रभावित परिवारों के कल्याण पर खर्च करने तथा लंबित पेयजल और सिंचाई योजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की।