हिमाचल: भाखड़ा बांध से नाथपा झाकड़ी तक 370 से ज्यादा संवेदनशील प्रतिष्ठानों की होगी एंटी ड्रोन से सुरक्षा
देश के 370 से अधिक संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में एंटी ड्रोन तकनीक को मजबूत किया जाएगा। सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच समझौते के तहत राजस्थान के बहरोड़ में ड्रोन एवं एंटी ड्रोन उत्कृष्टता केंद्र विकसित होगा। हिमाचल के भाखड़ा बांध, कोल डैम और नाथपा झाकड़ी जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी सीआईएसएफ की सुरक्षा में हैं। तीन हजार से अधिक कर्मियों को ड्रोन सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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भाखड़ा बांध, नाथपा, कोल डैम के अलावा देश के महत्वपूर्ण अन्य संवेदनशील बाधों, हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों, अंतरिक्ष केंद्र, तेल रिफाइनरी समेत 370 से अधिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा अब एंटी ड्रोन सिस्टम से होगी। ड्रोन के संभावित हमलों से इन प्रतिष्ठानों को सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच समझौता ज्ञापन हुआ है। सीआईएसएफ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में समझौते को अंतिम रूप दिया गया। यह जानकारी एनटीपीसी कोल डैम की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट विनोद कुमार ने साझा की।
समझौते पर सीआईएसएफ की ओर से उप महानिरीक्षक एवं प्रधान एमपीआरटीसी बहरोड़ डॉ. सीडी नायक और डीएफआई अध्यक्ष स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन समेत वरिष्ठ अधिकारी सुधीर कुमार, अपर महानिदेशक उत्तर और विजय प्रकाश, अपर महानिदेशक मुख्यालय मौजूद रहे। डीएफआई की ओर से निदेशक शिरीन जोशी, एसोसिएट निदेशक शिवांगी प्रकाश और चीफ ऑफ स्टाफ समा सहगल ने भाग लिया।
हिमाचल में एशिया के सबसे बड़े भूमिगत जल विद्युत प्रोजेक्ट नाथपा झाकड़ी, कोल डैम, भाखड़ा बांध समेत कई अन्य प्रोजेक्टों की सुरक्षा का जिम्मा सीआईएसएफ के पास है। इनकी सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी बनाया गया है। ड्रोन तकनीक के विस्तार और इसके संभावित दुरुपयोग को देखते हुए संदिग्ध ड्रोन की समय रहते पहचान और प्रभावी कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। सीआईएसएफ ने अपनी कार्यप्रणाली में ड्रोन तकनीक को भी शामिल किया है।
अब तक तीन हजार से अधिक कर्मियों को ड्रोन संचालन और ड्रोन रोधी सुरक्षा प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 80 इकाइयां निगरानी, संभावित खतरों की पहचान और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी गठित की गई है।
समझौते के तहत सीआईएसएफ के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर बहरोड़, राजस्थान को ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह कार्य गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगा। डीएफआई भारतीय ड्रोन कंपनियों और तकनीकी उद्यमों के साथ मिलकर सीआईएसएफ की तकनीकी क्षमता, व्यावहारिक अनुसंधान और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में सहयोग करेगा।
आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करना महत्वपूर्ण पहल है। डीएफआई के साथ सहयोग से वास्तविक परिस्थितियों में सामने आने वाले ड्रोन खतरों के खिलाफ बल की तैयारियों का परीक्षण किया जा सकेगा। इससे सुरक्षा प्रणालियों और जवाबी कार्रवाई में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी। - प्रवीर रंजन, महानिदेशक, सीआईएसएफ