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कारचोब कारीगर इकराम की मौत की विवेचना अब बरेली पुलिस करेगी
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बिलासपुर (रामपुर)। कारचोब कारीगर इकराम की मौत के मामले की जांच अब बरेली जिले की थाना मीरगंज पुलिस करेगी। एडीजी के आदेश पर विवेचना पर कोतवाली पुलिस से बरेली स्थानांतरित हो गई है। यह विवेचना अब थाना मीरगंज, बरेली के प्रभारी निरीक्षक को सौंपी गई है।
नगर के मोहल्ला शीरीमियां निवासी कारचोब कारीगर इकराम हसन 28 मई की रात को नगर में माठखेड़ा रोड स्थित बाईपास के पास गंभीर हालत में मिले थे। बाद में कुछ लोगों ने उन्हें गंभीर हालत में नगर के सीएचसी में भर्ती कराया था। किसी तरह पुलिस को इकराम का नाम व पता मिला। पुलिस की सूचना पर परिजन भी अस्पताल पहुंचे।
चिकित्सकों ने इकराम को गंभीर हालत में जिला अस्पताल भेज दिया था। मगर बाद में इकराम को मुरादाबाद में भर्ती कराया जा गया, जहां दो दिन बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मृतक के पिता इरशाद हसन की तरफ से एक युवक को नामजद करते हुए दो लोगों के खिलाफ धारा तीन सौ आठ के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने नामजद को कई दिन हिरासत में लेकर पूछताछ भी की, मगर सच सामने न आने पर पुलिस ने उसे उसके परिजनों को सौंप दिया था। परिजन पालिकाध्यक्ष मोहम्मद हसन खां को लेकर कोतवाली के चक्कर काटते रहे, मगर उन्हें न्याय नहीं मिला। वादी इरशाद हसन के अनुसार, कोतवाली पुलिस ने उन्हें गुमराह किया और आरोपियों को बचाने की शिकायत उन्होंने एडीजी बरेली के समक्ष पेश होकर की। इस पर एडीजी ने तत्कालीन विवेचक केपी सिंह को तलब कर मामले की जानकारी ली।
आरोप है कि विवेचक एडीजी के समक्ष कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके। परिजनों की मांग पर एडीजी ने विवेचना बरेली जिले के थाना मीरगंज के प्रभारी निरीक्षक को सौंपी है। थाना प्रभारी इंद्रेश सिंह ने बताया कि 19 जुलाई को विवेचना बरेली के लिए स्थानांतरित हो गई है।
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नगर के मोहल्ला शीरीमियां निवासी कारचोब कारीगर इकराम हसन 28 मई की रात को नगर में माठखेड़ा रोड स्थित बाईपास के पास गंभीर हालत में मिले थे। बाद में कुछ लोगों ने उन्हें गंभीर हालत में नगर के सीएचसी में भर्ती कराया था। किसी तरह पुलिस को इकराम का नाम व पता मिला। पुलिस की सूचना पर परिजन भी अस्पताल पहुंचे।
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चिकित्सकों ने इकराम को गंभीर हालत में जिला अस्पताल भेज दिया था। मगर बाद में इकराम को मुरादाबाद में भर्ती कराया जा गया, जहां दो दिन बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मृतक के पिता इरशाद हसन की तरफ से एक युवक को नामजद करते हुए दो लोगों के खिलाफ धारा तीन सौ आठ के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने नामजद को कई दिन हिरासत में लेकर पूछताछ भी की, मगर सच सामने न आने पर पुलिस ने उसे उसके परिजनों को सौंप दिया था। परिजन पालिकाध्यक्ष मोहम्मद हसन खां को लेकर कोतवाली के चक्कर काटते रहे, मगर उन्हें न्याय नहीं मिला। वादी इरशाद हसन के अनुसार, कोतवाली पुलिस ने उन्हें गुमराह किया और आरोपियों को बचाने की शिकायत उन्होंने एडीजी बरेली के समक्ष पेश होकर की। इस पर एडीजी ने तत्कालीन विवेचक केपी सिंह को तलब कर मामले की जानकारी ली।
आरोप है कि विवेचक एडीजी के समक्ष कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके। परिजनों की मांग पर एडीजी ने विवेचना बरेली जिले के थाना मीरगंज के प्रभारी निरीक्षक को सौंपी है। थाना प्रभारी इंद्रेश सिंह ने बताया कि 19 जुलाई को विवेचना बरेली के लिए स्थानांतरित हो गई है।