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Bilaspur News: बागछाल पुल बना, दूरी घटी लेकिन बस सेवा नहीं बढ़ी
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बागछाल पुल।
ढाई साल बाद भी कोटधार के लोग टैक्सी और निजी वाहनों पर निर्भर
एम्स के लिए एक बस चली, बाकी रूट पर सार्वजनिक परिवहन का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बागछाल पुल का लोकार्पण हुए ढाई साल बीत गए, लेकिन कोटधार क्षेत्र के लोगों को पुल बनने का पूरा लाभ अब तक नहीं मिल पाया है। पुल से एम्स बिलासपुर के लिए एक बस सेवा शुरू हुई है, लेकिन नियमित रूट पर दूसरी बसें नहीं चल रही हैं। ऐसे में जिला मुख्यालय, बाजार, शिक्षण संस्थानों और कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन तक पहुंचने के लिए लोगों को आज भी टैक्सी और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पुल ने दूरी कम कर दी, लेकिन सार्वजनिक परिवहन की कमी से परेशानी बरकरार है। 16 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री ने बागछाल पुल का लोकार्पण किया था। वर्षों के इंतजार के बाद पुल बनने से कोटधार क्षेत्र को जिला मुख्यालय और पंजाब की ओर जाने के लिए छोटा मार्ग मिला। लोगों को उम्मीद थी कि पुल के साथ अलग-अलग रूट पर बस सेवाएं भी शुरू होंगी। इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मरीजों और बुजुर्गों को सुविधा मिलती। हालांकि, ढाई साल बाद भी यह उम्मीद पूरी नहीं हुई है। एम्स के लिए बस शुरू होने से मरीजों और तीमारदारों को राहत मिली है, लेकिन इससे पूरे क्षेत्र की परिवहन जरूरत पूरी नहीं होती। ग्रामीणों के अनुसार जिला मुख्यालय और अन्य जरूरी स्थानों तक जाने के लिए नियमित बस सुविधा नहीं है। मुख्य सड़क और फोरलेन तक पहुंचने के लिए भी टैक्सी करनी पड़ती है। रोजाना टैक्सी का खर्च हर परिवार के लिए संभव नहीं है।
बागछाल पुल बनने से पहले जिला मुख्यालय होकर पंजाब सीमा की ओर जाने में करीब 150 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता था। अब यह दूरी आधे से भी कम रह गई है। इसके बावजूद बिना निजी वाहन वाले लोगों के लिए पुल की सुविधा सीमित रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जरूरत के अनुसार अलग-अलग रूट पर नियमित बसें चलनी चाहिए।
दो दशक के इंतजार के बाद भी कनेक्टिविटी अधूरी
बागछाल पुल की मांग करीब दो दशक पुरानी है। वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसके निर्माण की परिकल्पना की थी। वर्ष 2024 में पुल का लोकार्पण हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से सड़क कनेक्टिविटी बेहतर हुई, लेकिन नियमित सार्वजनिक परिवहन के बिना कनेक्टिविटी पूरी नहीं मानी जा सकती।
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लोग बोले-एक बस से पूरी नहीं होगी जरूरत
पूर्व पंचायत समिति सदस्य बलदेव सिंह ठाकुर, नंबरदार जन कल्याण संघ झंडूता के अध्यक्ष सूबेदार श्याम सिंह परमार, देव राज, धनी राम, राज कुमार, रवि सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पुल बनने से दूरी कम हुई है, लेकिन नियमित बस सेवा नहीं होने से अपेक्षित सुविधा नहीं मिल रही। एम्स के लिए बस शुरू होना राहत की बात है, लेकिन अन्य जरूरी रूट पर भी बसें चलनी चाहिए। उन्होंने सरकार और प्रशासन से नियमित बस सेवा शुरू करने की मांग की।
कोट
बागछाल पुल से परिवहन निगम की एक बस मरोत्तन से एम्स के लिए चलाई गई है। कोटधार क्षेत्र की बस सुविधा से संबंधित समस्या प्रशासन के ध्यान में है। क्षेत्र में और बस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
-विवेक लखनपाल, मंडलीय प्रबंधक
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एम्स के लिए एक बस चली, बाकी रूट पर सार्वजनिक परिवहन का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बागछाल पुल का लोकार्पण हुए ढाई साल बीत गए, लेकिन कोटधार क्षेत्र के लोगों को पुल बनने का पूरा लाभ अब तक नहीं मिल पाया है। पुल से एम्स बिलासपुर के लिए एक बस सेवा शुरू हुई है, लेकिन नियमित रूट पर दूसरी बसें नहीं चल रही हैं। ऐसे में जिला मुख्यालय, बाजार, शिक्षण संस्थानों और कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन तक पहुंचने के लिए लोगों को आज भी टैक्सी और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पुल ने दूरी कम कर दी, लेकिन सार्वजनिक परिवहन की कमी से परेशानी बरकरार है। 16 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री ने बागछाल पुल का लोकार्पण किया था। वर्षों के इंतजार के बाद पुल बनने से कोटधार क्षेत्र को जिला मुख्यालय और पंजाब की ओर जाने के लिए छोटा मार्ग मिला। लोगों को उम्मीद थी कि पुल के साथ अलग-अलग रूट पर बस सेवाएं भी शुरू होंगी। इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मरीजों और बुजुर्गों को सुविधा मिलती। हालांकि, ढाई साल बाद भी यह उम्मीद पूरी नहीं हुई है। एम्स के लिए बस शुरू होने से मरीजों और तीमारदारों को राहत मिली है, लेकिन इससे पूरे क्षेत्र की परिवहन जरूरत पूरी नहीं होती। ग्रामीणों के अनुसार जिला मुख्यालय और अन्य जरूरी स्थानों तक जाने के लिए नियमित बस सुविधा नहीं है। मुख्य सड़क और फोरलेन तक पहुंचने के लिए भी टैक्सी करनी पड़ती है। रोजाना टैक्सी का खर्च हर परिवार के लिए संभव नहीं है।
बागछाल पुल बनने से पहले जिला मुख्यालय होकर पंजाब सीमा की ओर जाने में करीब 150 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता था। अब यह दूरी आधे से भी कम रह गई है। इसके बावजूद बिना निजी वाहन वाले लोगों के लिए पुल की सुविधा सीमित रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जरूरत के अनुसार अलग-अलग रूट पर नियमित बसें चलनी चाहिए।
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दो दशक के इंतजार के बाद भी कनेक्टिविटी अधूरी
बागछाल पुल की मांग करीब दो दशक पुरानी है। वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसके निर्माण की परिकल्पना की थी। वर्ष 2024 में पुल का लोकार्पण हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से सड़क कनेक्टिविटी बेहतर हुई, लेकिन नियमित सार्वजनिक परिवहन के बिना कनेक्टिविटी पूरी नहीं मानी जा सकती।
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लोग बोले-एक बस से पूरी नहीं होगी जरूरत
पूर्व पंचायत समिति सदस्य बलदेव सिंह ठाकुर, नंबरदार जन कल्याण संघ झंडूता के अध्यक्ष सूबेदार श्याम सिंह परमार, देव राज, धनी राम, राज कुमार, रवि सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पुल बनने से दूरी कम हुई है, लेकिन नियमित बस सेवा नहीं होने से अपेक्षित सुविधा नहीं मिल रही। एम्स के लिए बस शुरू होना राहत की बात है, लेकिन अन्य जरूरी रूट पर भी बसें चलनी चाहिए। उन्होंने सरकार और प्रशासन से नियमित बस सेवा शुरू करने की मांग की।
कोट
बागछाल पुल से परिवहन निगम की एक बस मरोत्तन से एम्स के लिए चलाई गई है। कोटधार क्षेत्र की बस सुविधा से संबंधित समस्या प्रशासन के ध्यान में है। क्षेत्र में और बस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
-विवेक लखनपाल, मंडलीय प्रबंधक