{"_id":"6a7ef167e01053e9bb01235c","slug":"awareness-complain-in-bls-bilaspur-news-c-92-1-bls1001-165561-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: शोभायात्रा निकालकर दिया संस्कृत प्रचार-प्रसार का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: शोभायात्रा निकालकर दिया संस्कृत प्रचार-प्रसार का संदेश
विज्ञापन
श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय पंजगाईं में दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय पंजगाईं में दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का समापन शोभायात्रा के साथ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी श्री राममोहन दास महाराज के सहयोग और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चिंत राम शर्मा की अध्यक्षता में हुआ। विद्यार्थियों ने शोभायात्रा निकालकर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया। प्राचार्य डॉ. चिंत राम शर्मा ने कहा कि संस्कृत भारतीय भाषाओं की जननी है और इसे संजोकर रखना सभी सनातनियों का परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा मानव जीवन से लेकर मृत्यु पर्यंत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक व्यवहारों में प्रयोग होती है। ऐसे में संस्कृत भाषा का संरक्षण और संवर्धन समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए सरकार की ओर से अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ती है और उन्हें भाषा का व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त होता है। उन्होंने शिविर की विस्तारिका सरोज शर्मा का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर संचालिका सरोज शर्मा, आचार्य प्रवीण, आचार्य प्रेम लाल, गंगा देवी, मंजना कुमारी, मेहंदी मौजूद रहे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय पंजगाईं में दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का समापन शोभायात्रा के साथ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी श्री राममोहन दास महाराज के सहयोग और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चिंत राम शर्मा की अध्यक्षता में हुआ। विद्यार्थियों ने शोभायात्रा निकालकर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया। प्राचार्य डॉ. चिंत राम शर्मा ने कहा कि संस्कृत भारतीय भाषाओं की जननी है और इसे संजोकर रखना सभी सनातनियों का परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा मानव जीवन से लेकर मृत्यु पर्यंत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक व्यवहारों में प्रयोग होती है। ऐसे में संस्कृत भाषा का संरक्षण और संवर्धन समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए सरकार की ओर से अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ती है और उन्हें भाषा का व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त होता है। उन्होंने शिविर की विस्तारिका सरोज शर्मा का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर संचालिका सरोज शर्मा, आचार्य प्रवीण, आचार्य प्रेम लाल, गंगा देवी, मंजना कुमारी, मेहंदी मौजूद रहे।
विज्ञापन