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Bilaspur News: रिश्वत मांग मामले में आरोपी व शिकायतकर्ता के वॉयस सैंपल लेने की मंजूरी

Wed, 20 May 2026 11:15 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 20 May 2026 11:15 PM IST
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Approval for taking voice samples of the accused and the complainant in the bribery case
अदालत से
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अदालत ने जांच एजेंसी की अर्जी स्वीकार की, आरएफएसएल मंडी में होगी जांच
मोबाइल फोन से बरामद ऑडियो रिकॉर्डिंग का कराया जाएगा मिलान
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज है मामला

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो बिलासपुर द्वारा दर्ज रिश्वत मांग मामले में अदालत ने आरोपी और शिकायतकर्ता के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति प्रदान कर दी है। विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने मंगलवार को यह आदेश पारित करते हुए जांच एजेंसी की ओर से दायर आवेदन को मंजूर कर लिया।

मामला पुलिस थाना एसवी एंड एसीबी बिलासपुर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी ने अदालत में दायर आवेदन में कहा कि मामले के आरोपी समीर मोहम्मद को 29 दिसंबर 2025 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में आरोपी जमानत पर चल रहा है। अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान एजेंसी को आरोपी समीर मोहम्मद और शिकायतकर्ता के बीच कथित लेन-देन तथा अवैध रिश्वत मांग से संबंधित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं। जांच टीम ने शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया था, जिसमें से कई रिकॉर्डिंग बरामद की गई हैं। इन रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्ट भी तैयार कर ली गई है। जांच एजेंसी ने अदालत से कहा कि बरामद ऑडियो रिकॉर्डिंग की वैज्ञानिक जांच और आवाज की पुष्टि के लिए आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों के वॉयस सैंपल आवश्यक हैं, ताकि रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाजों का मिलान फॉरेंसिक तरीके से कराया जा सके। एजेंसी ने अदालत से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 349 के तहत अनुमति देने का आग्रह किया था। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक सीएस भाटिया ने राज्य की ओर से पक्ष रखा। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माना कि जांच के दौरान प्राप्त संदिग्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ तुलना करने के लिए वॉयस सैंपल आवश्यक हैं और निष्पक्ष व प्रभावी जांच के हित में यह प्रक्रिया जरूरी है। अदालत ने अपने आदेश में जांच एजेंसी को निर्देश दिए कि आरोपी समीर मोहम्मद और शिकायतकर्ता के वॉयस सैंपल कानून के अनुरूप आरएफएसएल मंडी में लिए जाएं, ताकि वैज्ञानिक परीक्षण और तुलना की प्रक्रिया पूरी की जा सके। अदालत ने आवेदन का निस्तारण करते हुए इसे संबंधित एफआईआर के साथ टैग करने के आदेश भी जारी किए।
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