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Bilaspur News: चेक बाउंस केस में अपील खारिज, छह माह की सजा, 90 हजार मुआवजा बरकरार

Sat, 08 Nov 2025 11:15 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 08 Nov 2025 11:15 PM IST
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Appeal dismissed in cheque bounce case, six months' sentence, 90,000 compensation upheld
अदालत से ---
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सेशन कोर्ट घुमारवीं का फैसला की अदालत ने दिए आरोपी को आत्मसमर्पण के आदेश
कहा- बिना पर्याप्त धनराशि के चेक जारी कर आरोपी ने किया अपराध
निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए जारी किए आदेश

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने चेक बाउंस केस मामले में आरोपी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई छह माह की सजा और 90 हजार रुपये मुआवजे का आदेश बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने बिना पर्याप्त धनराशि के चेक जारी कर अपराध किया है, जिससे कानून का उल्लंघन हुआ है।
मामला वर्ष 2021 का है। जंडूता उपमंडल के गांव समोह निवासी की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार, 26 अक्तूबर 2021 को अभिषेक कुमार की गाड़ी ने संजीव सिंह की गाड़ी को टक्कर मारकर नुकसान पहुंचाया था। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों में समझौता हुआ और आरोपी ने वाहन की मरम्मत का खर्च चुकाने का वादा किया। मरम्मत के बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी से 70 हजार रुपये की मांग की, जिसके एवज में आरोपी ने 31 अक्तूबर 2021 को एक चेक जारी किया। मगर जब यह चेक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया घुमारवीं शाखा में जमा करवाया गया तो बैंक ने इसे फंड्स इनसफिशिएंट (धनराशि अपर्याप्त) बताते हुए लौटा दिया। इसके बाद संजीव सिंह ने 11 नवंबर 2021 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इस पर उन्होंने झंडूता की अदालत में धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम के तहत मामला दायर किया। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह की साधारण कैद और 90 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश सुनाया था। आरोपी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए घुमारवीं सेशन कोर्ट में अपील दायर की, परंतु अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिना पर्याप्त धनराशि के चेक जारी कर पाया कि आरोपी यह साबित करने में विफल रहा कि चेक किसी दबाव में लिया गया था।
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अदालत ने कहा कि आरोपी ने चेक जारी करने के बाद धनराशि की व्यवस्था नहीं की, जिससे स्पष्ट होता है कि उसने वैध देयता का भुगतान करने में चूक की। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 138 का उद्देश्य वित्तीय लेन-देन में विश्वास और अनुशासन बनाए रखना है। सेशन कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय पूरी तरह न्यायसंगत और कानूनन सही है। अदालत ने अपील खारिज करते हुए आरोपी को निर्देश दिया है कि वह न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, झंडूता की अदालत में आत्मसमर्पण करे। ऐसा न करने पर उसके विरुद्ध सजा को लागू करने की कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने फैसला 6 नवंबर को सुनाया है।
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