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पेंशनरों के अधिकारों पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं : चेत राम

Mon, 09 Mar 2026 11:27 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2026 11:27 PM IST
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Any attack on the rights of pensioners will not be tolerated: Chet Ram
पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन की डियारा में हुई बैठक, मांगों पर चर्चा
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डीए फ्रीज करने, बकाया भुगतान रोकने के संकेतों पर जताया कड़ा विरोध
एक सप्ताह में बातचीत नहीं हुई तो शिमला में करेंगे धरना-प्रदर्शन
सरकार से फिजूलखर्ची रोककर बकाया चुकाने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश की बैठक बिलासपुर के डियारा स्थित विश्वकर्मा मंदिर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला बिलासपुर के प्रधान एवं प्रदेश के वरिष्ठ उपप्रधान चेत राम वर्मा ने की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान का हवाला देकर पेंशनरों और कर्मचारियों के 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते को फ्रीज करने, 146 माह के बकाया एरियर, संशोधित पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और चिकित्सा बिलों के भुगतान को रोकने या टालने के संकेत दिए जा रहे हैं। यह पेंशनरों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
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वर्मा ने कहा कि पेंशन कोई सरकारी अनुदान या कृपा नहीं, बल्कि जीवन भर की सेवा के बाद अर्जित अधिकार है। इसे न तो फ्रीज किया जा सकता है और न ही छीना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी नौबत आती है तो सरकार को पहले राजनीतिक नियुक्तियों पर हो रहे फिजूल खर्च को रोकना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विधायकों, मंत्रियों, बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, निदेशक, सलाहकार, ओएसडी तथा उच्च न्यायालय में अतिरिक्त महाधिवक्ताओं की नियुक्तियों पर भारी खर्च किया जा रहा है। इनके वेतन-भत्तों में लगातार वृद्धि से सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है और प्रदेश आर्थिक संकट की स्थिति में पहुंच गया है।
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वर्मा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं, कुप्रबंधन और प्रशासनिक फिजूलखर्ची का बोझ वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों और कर्मचारियों पर डालने का प्रयास कर रही है। मंत्रियों, विधायकों और सलाहकारों पर होने वाले खर्च में कटौती को लेकर सरकार मौन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर 1 जनवरी 2016 से पेंशनरों और कर्मचारियों के हजारों करोड़ रुपये के वैधानिक बकाया लंबित है।
उन्होंने बताया कि 500 से अधिक पेंशनर अपने वैध भुगतान की प्रतीक्षा करते-करते इस दुनिया से विदा हो चुके हैं, जो शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। बैठक में निर्णय लिया कि यदि एक सप्ताह के भीतर पेंशनरों की मांगों पर प्रतिनिधिमंडल को नहीं बुलाया, तो वे 17 और 18 फरवरी को शिमला में विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। बजट सत्र के दौरान राज्य स्तरीय निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
संगठन ने सरकार से मांग की कि आरडीजी को ढाल बनाकर पेंशनरों के अधिकारों पर कुठाराघात करने के बजाय गैर-जरूरी सरकारी खर्चों में कटौती की जाए, वित्तीय अनुशासन स्थापित किया जाए और पेंशनरों तथा कर्मचारियों के सभी लंबित वैधानिक बकायों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

वर्मा ने स्पष्ट कहा कि पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन डीए फ्रीज, एरियर रोकने या पेंशन में किसी भी प्रकार की कटौती को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक और तेज किया जाएगा।
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