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Bilaspur News: फोरलेन अधिग्रहण में एक और खामी, धराड़सानी में 2 कर्म कम चौड़ाई की हुई पुष्टि
Fri, 12 Sep 2025 11:22 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 12 Sep 2025 11:22 PM IST
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एक्सक्लूसिव
झंडूता तहसील की मौके की विस्तृत रिपोर्ट में कई खसरा नंबरों पर अधिग्रहण की स्थिति संदिग्ध
कई खसरा नंबरों पर अधिग्रहण का रकबा रिकॉर्ड से नहीं कर रहा है मेल
एनएचएआई ने फोरलेन तो निकाला, लेकिन जमीन अभी भी कई जगह किसानों के नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में एक और बड़ी खामी सामने आई है। झंडूता तहसील से जारी राजस्व विभाग की विस्तृत मौके की रिपोर्ट के अनुसार कई खसरा नंबरों पर अधिग्रहण का रकबा रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन-जिन खसरा नंबरों का मुआयना किया गया, इसमें कई जगह वास्तविक अधिग्रहण की चौड़ाई कम या ज्यादा पाई गई। विभाग ने मौके पर निशानदेही कर नक्शा तैयार किया और जांच रिपोर्ट में संलग्न किया है। मौजा कलर/181 में कुल 2 बीघा 13 बिस्वा जमीन में से इंतकाल नंबर 478 के अनुसार 2 बीघा 15 बिस्वा भूमि फोरलेन के लिए अधिग्रहित बताई गई, जबकि 1 बीघा 6 बिस्वा शेष पाई गई। शेष भूमि का खसरा नंबर 302/28/2013 पर दर्ज है। यह भूमि इसे नौतोड़ मिली थी, जिस कारण इसकी पुष्टि निशानदेही के बाद ही होगी। मौजा छत/161 खसरा नंबर 136/194/23 (0-5 बीघा) अभी भी किसान के नाम पर है, जो फोरलेन अधिग्रहण में शामिल नहीं है। वहीं खसरा नंबर 251/225/23 और 252/222/23 इंतकाल नंबर 395 से अधिग्रहित किए गए हैं। मौजा छत/101 में 4.3 बीघा भूमि में से 0.12 बीघा खसरा नंबर 377/197/4/1 फोरलेन के लिए ली गई। शेष 4.1 बीघा भूमि मालिकों के नाम दर्ज है। मौके पर राइट ऑफ वे के सफेद चिन्ह अधिग्रहित भूमि से लगभग 65 फुट दूर मिले, जिससे वास्तविक चौड़ाई पर सवाल खड़े हुए हैं। मौजा धराड़सानी/159 खसरा नंबर 502/201/2 के अंतिम कोण 19, 10, 8, बरुए नंबर 368/2, 368/3, 367/1 पर फोरलेन सड़क की चौड़ाई 30 कर्म पाई गई। राजस्व रिकॉर्ड और मौके की माप के आधार पर खसरा नंबर 562/201/2 में लगभग 2 कर्म कम अधिग्रहण की पुष्टि की गई है। इस गांव में जमीन मालिकों के नाम ही रही और फोरलेन बना लिया गया। यह जांच फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा की ओर से दी गई शिकायत के बाद की गई है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की राज्य सरकार को जो रिपोर्ट गई है वो भी गलत गई है।
सहायक आयुक्त-कम-तहसीलदार झंडूता कुनिका एकर्स ने रिपोर्ट में बताया कि सभी स्थानों पर नक्शे के साथ रकबे को लाइन ए-बी द्वारा चिन्हित किया गया है। अंतिम अधिग्रहण की सटीक पुष्टि केवल निशानदेही की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की जा सकेगी। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही प्रभावित किसानों और स्थानीय निवासियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और उन्हें वास्तविक रकबे के अनुसार मुआवजा नहीं मिला। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सभी प्रभावित खसरा नंबरों का दोबारा मुआयना कर सही माप सुनिश्चित किया जाए। अधिग्रहण की चौड़ाई और रकबा स्पष्ट कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
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झंडूता तहसील की मौके की विस्तृत रिपोर्ट में कई खसरा नंबरों पर अधिग्रहण की स्थिति संदिग्ध
कई खसरा नंबरों पर अधिग्रहण का रकबा रिकॉर्ड से नहीं कर रहा है मेल
एनएचएआई ने फोरलेन तो निकाला, लेकिन जमीन अभी भी कई जगह किसानों के नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में एक और बड़ी खामी सामने आई है। झंडूता तहसील से जारी राजस्व विभाग की विस्तृत मौके की रिपोर्ट के अनुसार कई खसरा नंबरों पर अधिग्रहण का रकबा रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन-जिन खसरा नंबरों का मुआयना किया गया, इसमें कई जगह वास्तविक अधिग्रहण की चौड़ाई कम या ज्यादा पाई गई। विभाग ने मौके पर निशानदेही कर नक्शा तैयार किया और जांच रिपोर्ट में संलग्न किया है। मौजा कलर/181 में कुल 2 बीघा 13 बिस्वा जमीन में से इंतकाल नंबर 478 के अनुसार 2 बीघा 15 बिस्वा भूमि फोरलेन के लिए अधिग्रहित बताई गई, जबकि 1 बीघा 6 बिस्वा शेष पाई गई। शेष भूमि का खसरा नंबर 302/28/2013 पर दर्ज है। यह भूमि इसे नौतोड़ मिली थी, जिस कारण इसकी पुष्टि निशानदेही के बाद ही होगी। मौजा छत/161 खसरा नंबर 136/194/23 (0-5 बीघा) अभी भी किसान के नाम पर है, जो फोरलेन अधिग्रहण में शामिल नहीं है। वहीं खसरा नंबर 251/225/23 और 252/222/23 इंतकाल नंबर 395 से अधिग्रहित किए गए हैं। मौजा छत/101 में 4.3 बीघा भूमि में से 0.12 बीघा खसरा नंबर 377/197/4/1 फोरलेन के लिए ली गई। शेष 4.1 बीघा भूमि मालिकों के नाम दर्ज है। मौके पर राइट ऑफ वे के सफेद चिन्ह अधिग्रहित भूमि से लगभग 65 फुट दूर मिले, जिससे वास्तविक चौड़ाई पर सवाल खड़े हुए हैं। मौजा धराड़सानी/159 खसरा नंबर 502/201/2 के अंतिम कोण 19, 10, 8, बरुए नंबर 368/2, 368/3, 367/1 पर फोरलेन सड़क की चौड़ाई 30 कर्म पाई गई। राजस्व रिकॉर्ड और मौके की माप के आधार पर खसरा नंबर 562/201/2 में लगभग 2 कर्म कम अधिग्रहण की पुष्टि की गई है। इस गांव में जमीन मालिकों के नाम ही रही और फोरलेन बना लिया गया। यह जांच फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा की ओर से दी गई शिकायत के बाद की गई है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की राज्य सरकार को जो रिपोर्ट गई है वो भी गलत गई है।
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सहायक आयुक्त-कम-तहसीलदार झंडूता कुनिका एकर्स ने रिपोर्ट में बताया कि सभी स्थानों पर नक्शे के साथ रकबे को लाइन ए-बी द्वारा चिन्हित किया गया है। अंतिम अधिग्रहण की सटीक पुष्टि केवल निशानदेही की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की जा सकेगी। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही प्रभावित किसानों और स्थानीय निवासियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और उन्हें वास्तविक रकबे के अनुसार मुआवजा नहीं मिला। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सभी प्रभावित खसरा नंबरों का दोबारा मुआयना कर सही माप सुनिश्चित किया जाए। अधिग्रहण की चौड़ाई और रकबा स्पष्ट कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
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