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संवेदनशीलता की मिसाल : एम्स बिलासपुर में शुरू हुई रोगी सहभागी पहल

Sat, 06 Jun 2026 11:28 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:28 PM IST
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An example of sensitivity: Patient participation initiative launched at AIIMS Bilaspur
एम्स बिलासपुर रोगी सहभागी पहल के तहत एम्स में मरीजों तीमारदारों को जानकारी देते नर्सिंग अधिकारी
अकेले और असहाय मरीजों को जांच व सैंपलिंग के लिए अब नहीं होना पड़ेगा परेशान
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तीमारदार स्वेच्छा से बन सकेंगे मददगार, एम्स के कार्यकारी निदेशक के हैं दिशा निर्देश
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से एक अनूठी मुहिम की शुरुआत की गई है। संस्थान प्रशासन ने अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले असहाय, वृद्ध और अकेले मरीजों की मदद के लिए रोगी सहभागी नामक विशेष पहल का शुभारंभ किया है।
इसका संचालन एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) दलजीत सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश कुमार वर्मा और नर्सिंग अधीक्षक किरण मिश्रा के दिशा-निर्देशन में किया जा रहा है। संस्थान प्रबंधन के अनुसार, इस पहल को सुचारू रूप से लागू करने के लिए एम्स के विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों और तीमारदारों के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। नर्सिंग अधिकारियों की देखरेख में आयोजित इन सत्रों में उपस्थित लोगों को इस मुहिम के उद्देश्य, आवश्यकता और इसके सामाजिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। जागरूकता सत्र के दौरान नर्सिंग अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में अक्सर ऐसे कई मरीज उपचाराधीन रहते हैं, जो अत्यधिक वृद्धावस्था, पारिवारिक या सामाजिक कारणों से बिल्कुल अकेले होते हैं। तीमारदार न होने की स्थिति में ऐसे मरीजों को अपने खून व अन्य जांच के नमूने संबंधित विभागों तक पहुंचाने, व्हीलचेयर या स्ट्रेचर के माध्यम से टेस्ट काउंटरों तक जाने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए रोगी सहभागी पहल शुरू की गई है, ताकि समाज के संवेदनशील नागरिक और अन्य मरीजों के परिजन आगे आकर इनकी सहायता कर सकें।
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एम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से सेवा और मानवता की भावना पर आधारित है। इसमें किसी भी तरह का आर्थिक लेन-देन या पारिश्रमिक शामिल नहीं होगा। कोई भी तीमारदार या आम नागरिक अपनी सुविधा और उपलब्ध समय के अनुसार स्वेच्छा से इस मुहिम से जुड़ सकता है। सहभागी बनने वाले लोग अकेले मरीजों को जांच के लिए संबंधित विभागों तक ले जाने, सैंपल्स पहुंचाने और अन्य गैर-चिकित्सकीय देखभाल में हाथ बंटा सकेंगे। नर्सिंग अधीक्षक किरण मिश्रा ने कहा कि रोगी सहभागी केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ करने का एक साझा प्रयास है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एम्स में आने वाला कोई भी मरीज खुद को असहाय महसूस न करे। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि अस्पताल केवल उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि सहानुभूति और सामाजिक सहभागिता का भी प्रतीक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने समय का कुछ हिस्सा किसी जरूरतमंद के लिए समर्पित करे, तो अकेले मरीजों को बड़ा मानसिक और आत्मीय संबल मिलेगा।
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