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अमर उजाला अभियान स्वास्थ्य : वैक्सीनेशन ने कोरोना को किया बेअसर, 50 फीसदी गिरी मास्क की मांग
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राजकीय उच्च पाठशाला स्याहोला में बच्चे को कोरोना वेक्सीन लगातीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता। संवाद
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। कोरोना काल की पहली और दूसरी लहर के दौरान पीपीई किट, सर्जिकल ग्लव्स और मास्क की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, लेकिन अब वैक्सीनेशन ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसके कारण कोरोना का असर बेअसर हो गया है। मास्क की मांग में 50 फीसदी और पीपीई किट, सर्जिकल ग्लव्स की मांग में 80 फीसदी गिरावट आई है। कोरोना काल में पीपीई किट के दामों में उछाल आया था, लेकिन अब मांग कम होने से दामों में भारी गिरावट आई है।
बता दें कि कोरोना की पहली लहर और दूसरी लहर में कोरोना ने बहुत कहर भरपाया था। उस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने टेस्टिंग को भी बढ़ाया था। टेस्टिंग के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट, सर्जिकल ग्लव्स और मास्क की आवश्यकता होती थी। अगर परिवार के सदस्यों में कोई कोरोना संक्रमित आ जाता तो उसके नजदीक जाने के लिए पीपीई किट, सर्जिकल ग्लव्स व मास्क पहनना अनिवार्य था। इसके कारण इनकी मांग में बहुत ज्यादा उछाल आया था। बढ़ती मांग के कारण इनके दामों में भी भारी उछाल आया। उस दौरान पीपीई किट एक हजार रुपये में बिक रही थी, लेकिन जोरों से चले वैक्सीनेशन अभियान ने अपना असर दिखाना अब शुरू कर दिया है। इसके कारण अब मांग व दामों में 80 फीसदी की गिरावट आई है। एक हजार में बिकने वाली पीपीई किट 200 रुपये में बिक रही है। वहीं मास्क व सर्र्जिकल ग्लव्स की मांग भी बहुत कम हो गई है।
कोट्स
विनयेंद्र डोगरा ने बताया कि उनकी हौजरी में पीपीई किट तैयार की जाती है। कोरोना काल की पहली व दूसरी लहर में मांग बहुत ज्यादा थी लेकिन अब मांग न के बराबर रह गई है। वैक्सीनेशन अभियान के कारण अब लोगों को कोरोना से राहत मिली है।
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कोट्स
दवाई विक्रेता प्रभेश गर्ग ने बताया कि मास्क और सर्जिकल ग्लव्स की मांग में बहुत ज्यादा कमी आई है। कोरोना की पहली व दूसरी लहर में स्टॉक खत्म हो जाता था लेकिन अब इक्का-दुक्का लोग मास्क व ग्लव्स खरीद रहे हैं।
कोट्स
सीएमओ प्रवीण चौधरी ने बताया कि कोरोना को लेकर सभी लोग जागरूक हो गए हैं। वहीं विभाग ने वैक्सीनेशन अभियान भी जोरों से चलाया है। इसका असर देखने को मिल रहा है।
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बता दें कि कोरोना की पहली लहर और दूसरी लहर में कोरोना ने बहुत कहर भरपाया था। उस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने टेस्टिंग को भी बढ़ाया था। टेस्टिंग के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट, सर्जिकल ग्लव्स और मास्क की आवश्यकता होती थी। अगर परिवार के सदस्यों में कोई कोरोना संक्रमित आ जाता तो उसके नजदीक जाने के लिए पीपीई किट, सर्जिकल ग्लव्स व मास्क पहनना अनिवार्य था। इसके कारण इनकी मांग में बहुत ज्यादा उछाल आया था। बढ़ती मांग के कारण इनके दामों में भी भारी उछाल आया। उस दौरान पीपीई किट एक हजार रुपये में बिक रही थी, लेकिन जोरों से चले वैक्सीनेशन अभियान ने अपना असर दिखाना अब शुरू कर दिया है। इसके कारण अब मांग व दामों में 80 फीसदी की गिरावट आई है। एक हजार में बिकने वाली पीपीई किट 200 रुपये में बिक रही है। वहीं मास्क व सर्र्जिकल ग्लव्स की मांग भी बहुत कम हो गई है।
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विनयेंद्र डोगरा ने बताया कि उनकी हौजरी में पीपीई किट तैयार की जाती है। कोरोना काल की पहली व दूसरी लहर में मांग बहुत ज्यादा थी लेकिन अब मांग न के बराबर रह गई है। वैक्सीनेशन अभियान के कारण अब लोगों को कोरोना से राहत मिली है।
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दवाई विक्रेता प्रभेश गर्ग ने बताया कि मास्क और सर्जिकल ग्लव्स की मांग में बहुत ज्यादा कमी आई है। कोरोना की पहली व दूसरी लहर में स्टॉक खत्म हो जाता था लेकिन अब इक्का-दुक्का लोग मास्क व ग्लव्स खरीद रहे हैं।
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सीएमओ प्रवीण चौधरी ने बताया कि कोरोना को लेकर सभी लोग जागरूक हो गए हैं। वहीं विभाग ने वैक्सीनेशन अभियान भी जोरों से चलाया है। इसका असर देखने को मिल रहा है।