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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर में गंभीर मरीजों के इलाज को मिलेगी मजबूती
Thu, 21 May 2026 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 21 May 2026 11:29 PM IST
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स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए आएगी अत्याधुनिक पीआईसीसी लाइन तकनीक
मरीजों को बार-बार सुई चुभाने की जरूरत होगी खत्म, संक्रमण का खतरा भी होगा खत्म
.संस्थान में शुरू होगा विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में आने वाले गंभीर और क्रिटिकल केयर के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। संस्थान में अब मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य स्टाफ की दक्षता को और अधिक विश्वस्तरीय बनाने के लिए अत्याधुनिक पेरिफेराली इंसर्टेड सेंट्रल कैथेटर तकनीक के व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यापक तैयारी की जा रही है। संस्थान के स्किल लैब में एक खास मेडिकल ट्रेनिंग सिमुलेटर शामिल किया जा रहा है, जिससे यहां के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को इस बेहद संवेदनशील प्रक्रिया में पूरी तरह निपुण बनाया जा सके।
अस्पताल के क्रिटिकल केयर वार्डों, आईसीयू और लंबे समय तक उपचाराधीन रहने वाले मरीजों को कई तरह की दवाइयाँ, कीमोथेरेपी या विशेष पोषण देने के लिए बार-बार सुई चुभानी पड़ती है, जिससे उन्हें अत्यधिक दर्द और परेशानी का सामना करना पड़ता है। पीआईसीसी लाइन तकनीक इस समस्या का स्थाई समाधान है। इसमें अल्ट्रासाउंड की मदद से हाथ की एक नस के रास्ते एक बेहद बारीक और सुरक्षित नली (कैथेटर) को दिल के पास की मुख्य नस तक पहुंचा दिया जाता है। इस एक लाइन के डलने के बाद मरीज को बार-बार नस ढूंढने और सुई चुभाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे इलाज पूरी तरह दर्द रहित और सुगम हो जाता है। यह प्रक्रिया अत्यंत सटीक और संवेदनशील होती है, क्योंकि इसमें छोटी सी भी लापरवाही मरीज के लिए जोखिम खड़ा कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि स्वास्थ्य स्टाफ को सीधे मरीजों पर अभ्यास कराने के बजाय, पहले इस अत्याधुनिक ट्रेनिंग पुतले पर शत-प्रतिशत परिपक्व किया जाए। यह सिमुलेटर बिल्कुल असली इंसानी शरीर जैसा अनुभव देता है, जिसमें कृत्रिम नसें और आधुनिक रिस्पॉन्स सिस्टम लगा होता है। इस पर अभ्यास करने से डॉक्टरों और नर्सों का हाथ इतना साफ हो जाएगा कि वास्तविक मरीजों पर लाइन डालते समय जोखिम और संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। नर्सिंग छात्राओं और स्टाफ को गंभीर मरीजों की देखभाल और कैथेटर को संक्रमण मुक्त रखने का उच्च स्तरीय व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा। आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में तैनात डॉक्टरों को आपातकालीन और नाजुक स्थितियों में बिना किसी चूक के इस लाइन को डालने की एडवांस ट्रेनिंग मिलेगी।
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रेडियोलॉजी विभाग : अल्ट्रासाउंड गाइडेंस के जरिए सही नस की सटीक पहचान करने की बारीकियों को इस सिमुलेटर पर सुगमता से सीखा जा सकेगा। एम्स बिलासपुर लगातार स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को सुरक्षित, संक्रमण मुक्त और सुलभ चिकित्सा मुहैया कराने की दिशा में इस व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत को एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। संस्थान का लक्ष्य है कि यहां आने वाले हर मरीज को बिना किसी अतिरिक्त शारीरिक कष्ट के अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज मिल सके।
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मरीजों को बार-बार सुई चुभाने की जरूरत होगी खत्म, संक्रमण का खतरा भी होगा खत्म
.संस्थान में शुरू होगा विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में आने वाले गंभीर और क्रिटिकल केयर के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। संस्थान में अब मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य स्टाफ की दक्षता को और अधिक विश्वस्तरीय बनाने के लिए अत्याधुनिक पेरिफेराली इंसर्टेड सेंट्रल कैथेटर तकनीक के व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यापक तैयारी की जा रही है। संस्थान के स्किल लैब में एक खास मेडिकल ट्रेनिंग सिमुलेटर शामिल किया जा रहा है, जिससे यहां के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को इस बेहद संवेदनशील प्रक्रिया में पूरी तरह निपुण बनाया जा सके।
अस्पताल के क्रिटिकल केयर वार्डों, आईसीयू और लंबे समय तक उपचाराधीन रहने वाले मरीजों को कई तरह की दवाइयाँ, कीमोथेरेपी या विशेष पोषण देने के लिए बार-बार सुई चुभानी पड़ती है, जिससे उन्हें अत्यधिक दर्द और परेशानी का सामना करना पड़ता है। पीआईसीसी लाइन तकनीक इस समस्या का स्थाई समाधान है। इसमें अल्ट्रासाउंड की मदद से हाथ की एक नस के रास्ते एक बेहद बारीक और सुरक्षित नली (कैथेटर) को दिल के पास की मुख्य नस तक पहुंचा दिया जाता है। इस एक लाइन के डलने के बाद मरीज को बार-बार नस ढूंढने और सुई चुभाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे इलाज पूरी तरह दर्द रहित और सुगम हो जाता है। यह प्रक्रिया अत्यंत सटीक और संवेदनशील होती है, क्योंकि इसमें छोटी सी भी लापरवाही मरीज के लिए जोखिम खड़ा कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि स्वास्थ्य स्टाफ को सीधे मरीजों पर अभ्यास कराने के बजाय, पहले इस अत्याधुनिक ट्रेनिंग पुतले पर शत-प्रतिशत परिपक्व किया जाए। यह सिमुलेटर बिल्कुल असली इंसानी शरीर जैसा अनुभव देता है, जिसमें कृत्रिम नसें और आधुनिक रिस्पॉन्स सिस्टम लगा होता है। इस पर अभ्यास करने से डॉक्टरों और नर्सों का हाथ इतना साफ हो जाएगा कि वास्तविक मरीजों पर लाइन डालते समय जोखिम और संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। नर्सिंग छात्राओं और स्टाफ को गंभीर मरीजों की देखभाल और कैथेटर को संक्रमण मुक्त रखने का उच्च स्तरीय व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा। आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में तैनात डॉक्टरों को आपातकालीन और नाजुक स्थितियों में बिना किसी चूक के इस लाइन को डालने की एडवांस ट्रेनिंग मिलेगी।
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रेडियोलॉजी विभाग : अल्ट्रासाउंड गाइडेंस के जरिए सही नस की सटीक पहचान करने की बारीकियों को इस सिमुलेटर पर सुगमता से सीखा जा सकेगा। एम्स बिलासपुर लगातार स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को सुरक्षित, संक्रमण मुक्त और सुलभ चिकित्सा मुहैया कराने की दिशा में इस व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत को एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। संस्थान का लक्ष्य है कि यहां आने वाले हर मरीज को बिना किसी अतिरिक्त शारीरिक कष्ट के अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज मिल सके।