{"_id":"69edfecd0e63b32937030588","slug":"aiims-bilaspur-case-blurred-vision-was-caused-by-medication-investigation-complete-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-158724-2026-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"एम्स बिलासपुर मामला : दवाई के असर से हुआ था धुंधलापन, जांच पूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एम्स बिलासपुर मामला : दवाई के असर से हुआ था धुंधलापन, जांच पूरी
Sun, 26 Apr 2026 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फॉलोअप
मरीज की दृष्टि सामान्य ,नहीं हुआ है आंखों को किसी तरह का नुकसान
निहाल सेक्टर की महिला ने एम्स विशेषज्ञों पर लगाए थे लापरवाही के आरोप
लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित है महिला, डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या थी उसे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आंखों के इलाज के बाद दृष्टि प्रभावित होने के आरोपों से जुड़े मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर की जांच पूरी हो गई है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि मरीज को हुआ धुंधलापन दवाई के असर के कारण था। ताजा जांच में मरीज की दोनों आंखों की रोशनी सामान्य पाई गई है और किसी प्रकार का स्थायी नुकसान सामने नहीं आया है।
शहर के निहाल सेक्टर की एक महिला ने आरोप लगाया था कि एम्स बिलासपुर में आंखों के इलाज के बाद उसकी दाईं आंख की रोशनी प्रभावित हो गई। महिला का कहना था कि उपचार के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे उसे देखने में दिक्कत आने लगी। महिला के अनुसार, वह 23 अप्रैल इलाज के लिए अस्पताल पहुंची थी। उसने दावा किया कि पहले उसे कुछ हद तक दिखाई देता था, लेकिन उपचार के बाद दाईं आंख से नीचे की ओर स्पष्ट दिखाई देना बंद हो गया। महिला ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए न्याय की मांग की थी और मामले की शिकायत संस्थान के निदेशक के अलावा केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भी भेजी थी। मामला सामने आने के बाद जब एम्स प्रबंधन ने जांच की तो संस्थान की जांच में सामने आया कि मरीज लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित है और जांच के दौरान उसे डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या थी। इसके साथ ही बाईं आंख में सूजन (एडिमा) भी दर्ज की गई थी। तय चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत 23 अप्रैल को मरीज की बाईं आंख में एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन लगाया गया, जो पूरी तरह सफल रहा और इसमें कोई जटिलता नहीं आई। एम्स के कुलपति डॉक्टर राकेश कुमार सिंह ने बताया कि इलाज के बाद मरीज ने दाहिनी आंख में परेशानी की शिकायत की। जांच में पाया गया कि आंख को रगड़ने के कारण कॉर्निया पर हल्की खरोंच (कॉर्नियल एब्रेशन) आ गई थी। यह सामान्य स्थिति होती है, जो उचित उपचार से ठीक हो जाती है। डॉक्टरों ने इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के साथ एट्रोपिन आई ड्रॉप्स दीं और आंख पर पट्टी लगाई। विशेषज्ञों के अनुसार, एट्रोपिन ड्रॉप्स डालने से आंख की पुतली फैल जाती है। इसके कारण कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देना, रोशनी से संवेदनशीलता बढ़ना और स्पष्टता में कमी आना सामान्य होता है। मरीज को जो धुंधलापन महसूस हुआ, वह इसी दवाई का असर था, जिसे लापरवाही समझ लिया गया। जांच पूरी होने के बाद मरीज को दोबारा जांच के लिए बुलाया गया। ताजा रिपोर्ट में उसकी दोनों आंखों की दृष्टि सामान्य पाई गई है और इलाज के बाद किसी प्रकार का स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। संस्थान प्रबंधन के अनुसार, पूरे मामले में उपचार निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं पाई गई। संस्थान ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण उपचार उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विज्ञापन
मरीज की दृष्टि सामान्य ,नहीं हुआ है आंखों को किसी तरह का नुकसान
निहाल सेक्टर की महिला ने एम्स विशेषज्ञों पर लगाए थे लापरवाही के आरोप
लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित है महिला, डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या थी उसे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आंखों के इलाज के बाद दृष्टि प्रभावित होने के आरोपों से जुड़े मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर की जांच पूरी हो गई है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि मरीज को हुआ धुंधलापन दवाई के असर के कारण था। ताजा जांच में मरीज की दोनों आंखों की रोशनी सामान्य पाई गई है और किसी प्रकार का स्थायी नुकसान सामने नहीं आया है।
शहर के निहाल सेक्टर की एक महिला ने आरोप लगाया था कि एम्स बिलासपुर में आंखों के इलाज के बाद उसकी दाईं आंख की रोशनी प्रभावित हो गई। महिला का कहना था कि उपचार के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे उसे देखने में दिक्कत आने लगी। महिला के अनुसार, वह 23 अप्रैल इलाज के लिए अस्पताल पहुंची थी। उसने दावा किया कि पहले उसे कुछ हद तक दिखाई देता था, लेकिन उपचार के बाद दाईं आंख से नीचे की ओर स्पष्ट दिखाई देना बंद हो गया। महिला ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए न्याय की मांग की थी और मामले की शिकायत संस्थान के निदेशक के अलावा केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भी भेजी थी। मामला सामने आने के बाद जब एम्स प्रबंधन ने जांच की तो संस्थान की जांच में सामने आया कि मरीज लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित है और जांच के दौरान उसे डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या थी। इसके साथ ही बाईं आंख में सूजन (एडिमा) भी दर्ज की गई थी। तय चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत 23 अप्रैल को मरीज की बाईं आंख में एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन लगाया गया, जो पूरी तरह सफल रहा और इसमें कोई जटिलता नहीं आई। एम्स के कुलपति डॉक्टर राकेश कुमार सिंह ने बताया कि इलाज के बाद मरीज ने दाहिनी आंख में परेशानी की शिकायत की। जांच में पाया गया कि आंख को रगड़ने के कारण कॉर्निया पर हल्की खरोंच (कॉर्नियल एब्रेशन) आ गई थी। यह सामान्य स्थिति होती है, जो उचित उपचार से ठीक हो जाती है। डॉक्टरों ने इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के साथ एट्रोपिन आई ड्रॉप्स दीं और आंख पर पट्टी लगाई। विशेषज्ञों के अनुसार, एट्रोपिन ड्रॉप्स डालने से आंख की पुतली फैल जाती है। इसके कारण कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देना, रोशनी से संवेदनशीलता बढ़ना और स्पष्टता में कमी आना सामान्य होता है। मरीज को जो धुंधलापन महसूस हुआ, वह इसी दवाई का असर था, जिसे लापरवाही समझ लिया गया। जांच पूरी होने के बाद मरीज को दोबारा जांच के लिए बुलाया गया। ताजा रिपोर्ट में उसकी दोनों आंखों की दृष्टि सामान्य पाई गई है और इलाज के बाद किसी प्रकार का स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। संस्थान प्रबंधन के अनुसार, पूरे मामले में उपचार निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं पाई गई। संस्थान ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण उपचार उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विज्ञापन