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Bilaspur News: धूल फांक रहा घुमारवीं कॉलेज में लगाया गया लाखों रुपये का सोलर प्लांट

Fri, 19 Sep 2025 11:18 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 19 Sep 2025 11:18 PM IST
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A solar plant worth lakhs of rupees installed at Ghumarwin College is gathering dust.
साल 2016 में हुआ था शुरू, अब देख-ख के अभाव में है बंद
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कॉलेज में प्रति वर्ष लाखों रुपये के बिजली की होनी थी बचत
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। लाखों रुपये की लागत से राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं में स्थापित किया गया सोलर पावर प्लांट आज देखरेख के अभाव में धूल फांक रहा है। इस प्लांट का 31 अगस्त 2016 को तत्कालीन संसदीय सचिव एवं वर्तमान तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने उद्घाटन किया था। इसे लगाने का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालय में होने वाले भारी-भरकम बिजली खर्च को कम करना था।
जानकारी के अनुसार महाविद्यालय में बिजली का मासिक बिल हजारों रुपये तक आता है। इस बिल को कम करने के लिए 15 किलोवाट क्षमता वाला यह सोलर पावर प्लांट लगाया गया। इसकी उत्पादन क्षमता के अनुसार औसतन प्रतिदिन 60 से 70 यूनिट बिजली तैयार हो सकती थी। यदि इसकी समय-समय पर देखरेख होती रहती तो सालाना 18 से 19 हजार यूनिट तक बिजली उत्पन्न की जा सकती थी। इसका सीधा लाभ यह होता कि महाविद्यालय को प्रतिवर्ष करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक की बचत होती। लेकिन अफसोस की बात यह है कि एक बार स्थापना के बाद इस पावर प्लांट की सुध किसी ने नहीं ली। न तो समय-समय पर इसका रखरखाव हुआ और न ही सफाई पर ध्यान दिया गया। नतीजा यह निकला कि आज यह महत्वाकांक्षी योजना उपेक्षा की भेंट चढ़ चुकी है। पावर प्लांट के चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं और अंदर भारी गंदगी जमा हो चुकी है, जो इसकी दुर्दशा बयां करने के लिए काफी है। यदि इस पावर प्लांट का सही तरीके से संचालन किया जाता तो महाविद्यालय को आर्थिक राहत मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान हो सकता था। छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि महाविद्यालय प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए सामान का रख रखाव जरूरी किया जाए ताकि सरकारी पैसे का दुरुपयोग न हो। साथ ही तत्काल प्रभाव से इस सोलर पावर प्लांट की मरम्मत और सफाई करवाएं ताकि जिस उद्देश्य से इसे स्थापित किया गया था वह पूरा हो सके। साथ ही, यह मामला भविष्य के लिए सबक भी है कि सरकारी धन से बनी योजनाओं की जिम्मेदारी और देखरेख सुनिश्चित की जाए।
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कोट
कॉलेज ज्वाइन करने के बाद मेरे ध्यान में यह मामला आया था, जिसके बाद इस प्लांट को ठीक करवाने के लिए करीब पांच लाख रुपये का बजट बनाया गया है। जल्द ही इस सोलर प्लांट को ठीक कराकर चालू करवा दिया जाएगा।
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डॉ राकेश राणा, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं
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