{"_id":"699309c138622499d60ec732","slug":"a-delegation-of-ashas-met-nadda-and-submitted-a-memorandum-of-demands-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-154122-2026-02-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: नड्डा से मिला आशाओं का प्रतिनिधिमंडल, मांग पत्र सौंपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: नड्डा से मिला आशाओं का प्रतिनिधिमंडल, मांग पत्र सौंपा
Mon, 16 Feb 2026 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 16 Feb 2026 11:41 PM IST
विज्ञापन
बरठीं से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलने पहुंची आशा वर्कर। स्रोत: आशा वर्कर संगठन
कहा-आठ अनिवार्य कार्यों के बदले मिल रहा मात्र दो हजार मानदेय
आशाओं की मांगों पर किया जाएगा आवश्यक गौर : नड्डा
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं/बरठीं। आशा कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विजयपुर स्थित उनके आवास पर मिला। आशाओं की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्य सह सचिव एवं जिला कार्यकारी अध्यक्ष निशा शर्मा ने किया।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को लिखित मांग पत्र सौंपते हुए बताया कि केंद्र सरकार की ओर से आशाओं के लिए निर्धारित आठ अनिवार्य कार्यों के बदले उन्हें वर्तमान में मात्र 2000 रुपये मानदेय मिलता है, जो बेहद कम है। उन्होंने इन आठ गतिविधियों का मानदेय बढ़ाकर 8000 रुपये मासिक करने की मांग उठाई। इसके साथ ही आशाओं के लिए स्थायी नीति बनाए जाने की भी मांग की गई, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और आर्थिक स्थिरता मिल सके। कहा कि जब तक सरकार स्थायी नीति लागू नहीं करती, तब तक उन्हें न्यूनतम 21,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए, उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि जिन आशाओं ने एएनएम प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उन्हें तुरंत प्रभाव से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रिक्त पदों पर नियुक्त करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिए जाएं। साथ ही पात्र आशाओं को जीएनएम प्रशिक्षण के लिए भी प्रायोजित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने अपने मांग पत्र में उल्लेख किया कि आशा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू कर स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार किया है। उनके प्रयासों से शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में कमी आई है तथा महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की स्थिति में भी सुधार हुआ है। कोविड-19 महामारी के दौरान आशाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी सराहना स्वयं केंद्रीय मंत्री भी कर चुके हैं। वर्तमान में तपेदिक उन्मूलन अभियान में भी आशाएं दिन-रात कार्य कर रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी हैं और वे सराहनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर आवश्यक रूप से गौर किया जाएगा और हर संभव सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष निशा शर्मा, महासचिव रेखा ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रीता धीमान, कोषाध्यक्ष प्रोमिला, सीमा शर्मा, आशा कुमारी, किरण, लीला, पवना, सोनिका, चंपा, अनीता, मीना, वंदना, श्याम, सावित्री, सरोज, रामकली सहित लगभग 60 आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
विज्ञापन
आशाओं की मांगों पर किया जाएगा आवश्यक गौर : नड्डा
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं/बरठीं। आशा कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विजयपुर स्थित उनके आवास पर मिला। आशाओं की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्य सह सचिव एवं जिला कार्यकारी अध्यक्ष निशा शर्मा ने किया।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को लिखित मांग पत्र सौंपते हुए बताया कि केंद्र सरकार की ओर से आशाओं के लिए निर्धारित आठ अनिवार्य कार्यों के बदले उन्हें वर्तमान में मात्र 2000 रुपये मानदेय मिलता है, जो बेहद कम है। उन्होंने इन आठ गतिविधियों का मानदेय बढ़ाकर 8000 रुपये मासिक करने की मांग उठाई। इसके साथ ही आशाओं के लिए स्थायी नीति बनाए जाने की भी मांग की गई, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और आर्थिक स्थिरता मिल सके। कहा कि जब तक सरकार स्थायी नीति लागू नहीं करती, तब तक उन्हें न्यूनतम 21,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए, उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि जिन आशाओं ने एएनएम प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उन्हें तुरंत प्रभाव से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रिक्त पदों पर नियुक्त करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिए जाएं। साथ ही पात्र आशाओं को जीएनएम प्रशिक्षण के लिए भी प्रायोजित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने अपने मांग पत्र में उल्लेख किया कि आशा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू कर स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार किया है। उनके प्रयासों से शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में कमी आई है तथा महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की स्थिति में भी सुधार हुआ है। कोविड-19 महामारी के दौरान आशाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी सराहना स्वयं केंद्रीय मंत्री भी कर चुके हैं। वर्तमान में तपेदिक उन्मूलन अभियान में भी आशाएं दिन-रात कार्य कर रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी हैं और वे सराहनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर आवश्यक रूप से गौर किया जाएगा और हर संभव सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष निशा शर्मा, महासचिव रेखा ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रीता धीमान, कोषाध्यक्ष प्रोमिला, सीमा शर्मा, आशा कुमारी, किरण, लीला, पवना, सोनिका, चंपा, अनीता, मीना, वंदना, श्याम, सावित्री, सरोज, रामकली सहित लगभग 60 आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
विज्ञापन