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स्वारघाट का ट्रामा सेंटर बना सफेद हाथी
Updated Wed, 22 Aug 2018 11:33 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
स्वारघाट(बिलासपुर)। स्वारघाट ट्रॉमा सेंटर सफेद हाथी बन कर रह गया है। हालांकि यहां भवन बन कर पूरी तरह से तैयार हो चुका है लेकिन डेढ़ साल से यहां कोई डॉक्टर नियुक्त नहीं किए गए हैं। इससे यहां लाखों रुपये के भवन में किसी प्रकार की सुविधा लोगों को नहीं मिल रही है।
उल्लेखनीय है कि डेढ़ साल पहले 24 मार्च 2017 के दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने स्वारघाट में ट्रॉमा सेंटर के आलीशान भवन को जनता को समर्पित किया था लेकिन इस लाखों की धनराशि खर्च करने के बाद तैयार ट्रॉमा सेंटर भवन में स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए आज तक किसी भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई। इस कारण दुर्घटना व आपातकाल के दौरान गंभीर रूप से घायलों को उपचार के लिए अभी तक भी स्वारघाट से पीजीआई चंडीगढ़ व 40 किमी दूर बिलासपुर का रुख करना पड़ रहा है। जबकि उक्त ट्रॉमा सेंटर में ताला लटका हुआ है।
हालांकि स्वारघाट के ट्रॉमा सेंटर को प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य महकमे ने थर्ड ग्रेड का दर्जा दिया हुआ है लेकिन आज दिन तक एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति स्वारघाट के ट्रॉमा सेंटर में नहीं हो पाई है। जबकि ट्रॉमा सेंटर में आपातकाल सेवाओं के लिए करीब आधा दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं होना जरूरी है।
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मनाली चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसलिए दुर्घटना होने के बाद गंभीर रुप से घायल हुए व्यक्ति को तुरंत विशेष चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने के उद्देश्य से स्वारघाट का ट्रॉमा सेंटर खोला गया था लेकिन यह मात्र सफेद हाथी बन कर रख गया है।
स्वारघाट क्षेत्र की जनता ने प्रदेश सरकार के वर्तमान मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य निदेशालय से मांग की है कि ट्रॉमा सेंटर स्वारघट में शीघ्र विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाए ताकि आपातकाल में लोगों को दूरदराज स्वास्थ्य सेवा के लिए नहीं जाना पड़े तथा घरद्वार पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
उधर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर ने बताया कि अभी स्वारघाट के ट्रॉमा सेंटर के लिए सरकार की ओर से डॉक्टरों की नियुक्ति के कोई आदेश नहीं हुए हैं।
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स्वारघाट(बिलासपुर)। स्वारघाट ट्रॉमा सेंटर सफेद हाथी बन कर रह गया है। हालांकि यहां भवन बन कर पूरी तरह से तैयार हो चुका है लेकिन डेढ़ साल से यहां कोई डॉक्टर नियुक्त नहीं किए गए हैं। इससे यहां लाखों रुपये के भवन में किसी प्रकार की सुविधा लोगों को नहीं मिल रही है।
उल्लेखनीय है कि डेढ़ साल पहले 24 मार्च 2017 के दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने स्वारघाट में ट्रॉमा सेंटर के आलीशान भवन को जनता को समर्पित किया था लेकिन इस लाखों की धनराशि खर्च करने के बाद तैयार ट्रॉमा सेंटर भवन में स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए आज तक किसी भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई। इस कारण दुर्घटना व आपातकाल के दौरान गंभीर रूप से घायलों को उपचार के लिए अभी तक भी स्वारघाट से पीजीआई चंडीगढ़ व 40 किमी दूर बिलासपुर का रुख करना पड़ रहा है। जबकि उक्त ट्रॉमा सेंटर में ताला लटका हुआ है।
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हालांकि स्वारघाट के ट्रॉमा सेंटर को प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य महकमे ने थर्ड ग्रेड का दर्जा दिया हुआ है लेकिन आज दिन तक एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति स्वारघाट के ट्रॉमा सेंटर में नहीं हो पाई है। जबकि ट्रॉमा सेंटर में आपातकाल सेवाओं के लिए करीब आधा दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं होना जरूरी है।
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मनाली चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसलिए दुर्घटना होने के बाद गंभीर रुप से घायल हुए व्यक्ति को तुरंत विशेष चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने के उद्देश्य से स्वारघाट का ट्रॉमा सेंटर खोला गया था लेकिन यह मात्र सफेद हाथी बन कर रख गया है।
स्वारघाट क्षेत्र की जनता ने प्रदेश सरकार के वर्तमान मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य निदेशालय से मांग की है कि ट्रॉमा सेंटर स्वारघट में शीघ्र विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाए ताकि आपातकाल में लोगों को दूरदराज स्वास्थ्य सेवा के लिए नहीं जाना पड़े तथा घरद्वार पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
उधर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर ने बताया कि अभी स्वारघाट के ट्रॉमा सेंटर के लिए सरकार की ओर से डॉक्टरों की नियुक्ति के कोई आदेश नहीं हुए हैं।