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12 सालों से शटर लगे कमरों में पढ़ रहे है छात्र

Sat, 20 Apr 2019 11:27 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Apr 2019 11:27 PM IST
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12 सालों से शटर लगे कमरों में पढ़ रहे है छात्र

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स्वारघाट(बिलासपुर)। युवाओं को बेहतर तकनीकी शिक्षा मुहैया करवाने के दावे स्वारघाट में हवा होते नजर आ रहे है। यहां 12 सालों से आईटीआई के लिए भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। परिणाम यह है कि आईटीआई की कक्षाएं शटर लगे कमरों में किराये के भवन में चल रही है। हालांकि ऐसा नहीं है कि पैसे या जमीन की कमी है। भवन निर्माण के लिए जमीन और पैसा दोनों है लेकिन सरकारी अमले की लापरवाही के कारण भवन निर्माण नहीं हो पा रहा है। हालत ऐसी है कि आईटीआई के भवन में कमरों के अभाव के चलते युवाओं के लिए केवल मात्र दो ही ट्रेड चलाए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 24 मार्च 2017 को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने स्वारघाट के समीप टिंबर डिपो के पास बनने वाली आईटीआई स्वारघाट के भवन का शिलान्यास भी किया था लेकिन बावजूद इसके डेढ़ साल का अरसा बीत जाने के बाद भी आईटीआई स्वारघाट के भवन के नाम पर आज तक एक भी ईंट नहीं लग सकी है।
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बताया जा रहा है कि स्वारघाट के समीप टिंबर डिपो के पास बनने वाली आईटीआई के नाम 8 बीघा और 10 बिस्वा जमीन नाम हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी यहां निर्माण के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगाई जा सकी।
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हालांकि आईटीआई स्वारघाट के भवन निर्माण के लिए पूर्व वीरभद्र सरकार ने बाकायदा से 6 करोड़ 50 लाख और 46 हजार रुपये के बजट का प्रावधान भी किया था लेकिन हैरानी कि बात है कि आधारशिला रखने के दो साल का अरसा बीत जाने के बाद भी आईटीआई स्वारघाट के भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
12 साल पहले खोली गई स्वारघाट की आईटीआई का अपना भवन नहीं होने के कारण अभी तक इसे किराये के भवन में ही चलाया जा रहा है, जिस कारण आईटीआई के बच्चों को बुनियादी तकनीकी सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही है। किराये के भवन में कमरों की कमी के चलते नए ट्रेड खोलने में भी तकनीकी शिक्षा विभाग को अड़चने आड़े आ रही है। वहीं किराये के रूप में तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा मकान मालिक को लाखों रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
युवाओं का कहना है कि जब आईटीआई स्वारघाट का अपना भवन तैयार हो जाएगा तो उसके बाद इसमें करीब 7 ट्रेड एक साथ चलाने की क्षमता रहेगी। इसके साथ ही आईटीआई के प्रशिक्षुओं को भी अपनी पसंद के ट्रेड का चयन करने की सुविधा मिल सकेगी।
-इस बारे में वीरेंद्र ठाकुर का कहना है कि यह बड़े दुख की बात है कि पिछले 12 सालों से सरकारी आईटीआई दुकानों में सड़क किनारे चलाई जा रही है। युवाओं का भविष्य अंधकार की ओर अग्रसर है।
-विनोद वर्मा का कहना है कि अपना भवन न होने के चलते सिर्फ दो ही ट्रेड ही चल सके हैं।
बच्चों को प्रशिक्षण के लिए बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है।
-महेंद्र शर्मा का कहना है कि अगर सरकार जल्द आईटीआई के भवन का निर्माण कर देती तो श्री नयनादेवी विधानसभा के इलाके के हजारों लड़कों व लड़कियों को दूरदराज आईटीआई प्रशिक्षण के लिए जाने से निजात मिल जाएगी। सरकार व नेताओं ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है।
-जयपाल ठाकुर का कहना है कि अगर सरकार व नेता शिक्षण संस्थानों के आधारभूत ढांचे को लेकर ही गंभीर नहीं होंगे तो वह कैसे विकास कर पाएंगे। नेताओं के विकास कार्य करवाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
-रमेश ठाकुर का कहना है कि हैरान करने वाली बात है कि 12 सालों से प्रदेश की सरकारें यहां पर कोई आईटीआई भवन का निर्माण ही नहीं करवा पाई है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है।
-श्री नयनादेवी विधानसभा के विधायक रामलाल ठाकुर का कहना है कि कांग्रेस की वीरभद्र सरकार के समय के दौरान उन्होंने स्वारघाट आईटीआई के निर्माण के लिए शिलान्यास करके बजट मंजूर किया गया था, लेकिन जानबूझकर भाजपा नेताओं ने काम लटका रखा है।
-हमीरपुर से भाजपा के सांसद अनुराग ठाकुर का कहना है कि बजट मंजूर है। लोकसभा चुनाव के बाद जल्द आईटीआई का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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इनसेट-
चुनाव के बाद भवन निर्माण कार्य होगा शुरू : कालिया
लोक निर्माण विभाग मंडल नंबर दो बिलासपुर के अधिशाषी अभियंता आत्मा राम कालिया से उक्त मामले पर बताया की तकनीकी निदेशालय सुंदरनगर की तरफ से बजट की पहली किस्त लोनिवि महकमे को मिल चुकी है। चुनाव के बाद आईटीआई के भवन का निर्माण कार्य के टेंडर लगाकर कार्य शुरू हो जाएगा।

इनसेट...
पूर्व सरकार ने पैसा और जमीन दे रखी है : रामलाल ठाकुर
श्रीनयना देवी के विधायक और कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर का कहना है कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने जमीन पर पैसा दोनों आईटीआई भवन निर्माण के लिए मुहैया करवाए हैं लेकिन उसके बाद भाजपा के सत्ता में आते ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। भाजपा निर्माण कार्य क्यों शुरू नहीं करवा रही है यह समझ रहे परे है। जबकि पैसा और जमीन पूर्व सरकार ने दे रखी है।
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