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मलबे को सतलुज नदी में फेंकने से मछुआरों को रोजी रोटी के पड़े लाले
Updated Wed, 26 Sep 2018 09:32 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से निकल रहे मलबे को सतलुज नदी में फेंकने को लेकर मछुआरों ने ऊना जिला के दोबड़ समिति कार्यालय के प्रांगण में बैठक की जिसकी अध्यक्षता समिति के प्रधान संजीव कुमार ने की।
प्रधान संजीव कुमार ने कहा कि फोरलेन सड़क निर्माण कर रही कंपनी केएनसीएल द्वारा गोबिंद सागर झील में अवैध रूप से डंपिंग की जा रही है जिसका सभी मछुआरों ने कड़ा ऐतराज जताया है। प्रधान ने इस डंपिंग को लेकर सभी मछुआरों को एकजुट होने का आह्वान किया है ताकि इस संकट से निपटा जा सके।
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बैठक में उपस्थित मछुआरों ने प्रधान के इस निर्णय का समर्थन किया। इस दौरान मछुआरों ने प्रशासन सरकार व कंपनी के विरुद्ध जमकर नारेबाजी कर अपनी भड़ास भी निकाली। मछुआरों का कहना है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। परिवारों का पालन पोषण करना मुश्किल हो गया है। मछली न मिलने से पैसा कमाने में परेशानियां खड़ी हो गई हैं। नदी में मलबा फेंकने से मछलियों के प्रजनन करने के इलाकेे तबाह हो चुके हैं। इसके अलावा मछलियों के खाने के साधन भी अवैध डंपिंग से बर्बाद हो चुके हैं। जो जाले मछलियों को पकड़ने के लिए लगाए जा रहे हैं, वह मिट्टी में फंस कर बर्बाद हो रहे हैं जिससे मछुआरों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
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प्रधान ने कहा कि मछुआरों के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी तरह सहन नहीं किया जाएगा। मछुआरों ने डीजीएफ एंड एसएस पर्यावरण भवन सीजीओ कांपलेक्स दिल्ली के चेयरमैन, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ऊना, एसडीएम ऊना, वन मंडलाधिकारी बिलासपुर, पर्यावरण अभियंता बिलासपुर व निदेशक मत्स्य विभाग बिलासपुर को लिखित रूप में अपनी शिकायतें भेजी हैं।
गौरतलब है कि उक्त सड़क निर्माण में लगी यह कंपनी झील में मलबा की अवैध डंपिंग कर रही है जिससे मछलियों के न मिलने से रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। अब मछुआरों को अपनी आजीविका कमाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके पर संजीव कुमार, विनोद कुमार, उज्जवल परमार, गुलजारी लाल, जोगिंद्र, जसवंत सिंह, मेहर सिंह, चेतराम, जगतार सिंह, अश्वनी कुमार, दलवीर सिंह, हरीदास, राकेश कुमार, अंकुश, कविराज, संजीव कुमार, मंजीत कुमार, तरपाल सिंह, सरबजीत सिंह, चंदन सिंह, राजेंद्र सिंह, ज्ञान चंद, टिंकू सहित कई लोग उपस्थित थे।