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Bilaspur News: गोबिंद सागर झील में डाला गया 56 लाख मछली का बीज
Fri, 22 Nov 2024 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 22 Nov 2024 11:41 PM IST
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गोबिंद सागर झील में मछली के बीज की प्रक्रिया को पूरा करते कामगार । संवाद
-करीब दो माह तक चली बीज डालने की प्रक्रिया
-झील में इस बार हुआ है 259 मीट्रिक टन उत्पादन
-पिछले साल की तुलना में अधिक हुआ उत्पादन
-झील में डाला गया रोहू, कतला, मृगल, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प का बीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मत्स्य पालन विभाग की ओर से गोबिंद सागर झील में मछलियों का बीज डालने की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो गई। इस बार झील में करीब 56 लाख मछली का बीज विभाग की ओर से डाला गया। वहीं इस बार पिछले साल की तुलना में उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।
बीज डालने की प्रक्रिया के अंतिम दिन कसोल व लुहणू घाट पर बीज डाला गया। सितंबर में यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। झील में डालने के लिए यह बीज कोलकाता से लाया गया। विभाग ने इस वित्त वर्ष में झील के विभिन्न हिस्सों में 50 लाख से अधिक मछली के बीज डालने का लक्ष्य रखा था जो पूरा किया। झील में इस बार रोहू, कतला, मृगल, सिल्वर कार्प और ग्रास कार्प सहित पांच मछली की किस्मों के बीज डाले गए। विभाग की ओर से लुहणू, भाखड़ा बांध, लठियाणी, कसोल और रायपुर मैदान के पास बीज डाले जाएंगे। बता दें कि इस बार बैरकपुर स्थित सिपरी इंस्टीट्यूट के सर्वे के बाद उनके सुझाव को मद्देनजर रखते हुए गोबिंद सागर में 50 प्रतिशत से अधिक बीज सिल्वर कार्प डालने का निर्णय लिया गया था। 2012-13 में झील में सिल्वर कार्प का प्रभाव था, तब इसका उत्पादन उत्पादन 1392 मीट्रिक टन हुआ था। इसके बाद हर वर्ष सिल्वर कार्प के प्रोडक्शन में गिरावट दर्ज हुई। एक समय तो इसका उत्पादन 200 मीट्रिक टन रह गया। जिसके चलते विभाग ने इस पर रिसर्च करवाई। सिपरी इंस्टीट्यूट के सुझावों पर ही झील में बीज डाला जा रहा है ताकि सिल्वर कार्प अपने पहले के उत्पादन के अनुसार ही स्थान प्राप्त हो सके।
बताते चलें की पिछले वर्ष आठ मीट्रिक टन अधिक उत्पादन हुआ है। वहीं इस बार 1,17,621 किलोग्राम की वृद्धि इसमें दर्ज की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 15 नवंबर 2024 तक झील में 259 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है।
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कोट
गोबिंद सागर व कोलबांध जलाशय में हर वर्ष की भांति बीज संग्रहण प्रक्रिया पूरी की गई। मछली बीज संग्रहण के अब सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं जिससे इस वर्ष मछली उत्पादन में वृद्धि हुई है। यह वृद्धि मछुआरों के लिए लाभकारी साबित हो रही है क्योंकि मछली उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ मछुआरों को अधिक आय प्राप्त हो रही है।
पंकज ठाकुर, निदेशक मत्स्य मंडल बिलासपुर
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-झील में इस बार हुआ है 259 मीट्रिक टन उत्पादन
-पिछले साल की तुलना में अधिक हुआ उत्पादन
-झील में डाला गया रोहू, कतला, मृगल, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प का बीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मत्स्य पालन विभाग की ओर से गोबिंद सागर झील में मछलियों का बीज डालने की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो गई। इस बार झील में करीब 56 लाख मछली का बीज विभाग की ओर से डाला गया। वहीं इस बार पिछले साल की तुलना में उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।
बीज डालने की प्रक्रिया के अंतिम दिन कसोल व लुहणू घाट पर बीज डाला गया। सितंबर में यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। झील में डालने के लिए यह बीज कोलकाता से लाया गया। विभाग ने इस वित्त वर्ष में झील के विभिन्न हिस्सों में 50 लाख से अधिक मछली के बीज डालने का लक्ष्य रखा था जो पूरा किया। झील में इस बार रोहू, कतला, मृगल, सिल्वर कार्प और ग्रास कार्प सहित पांच मछली की किस्मों के बीज डाले गए। विभाग की ओर से लुहणू, भाखड़ा बांध, लठियाणी, कसोल और रायपुर मैदान के पास बीज डाले जाएंगे। बता दें कि इस बार बैरकपुर स्थित सिपरी इंस्टीट्यूट के सर्वे के बाद उनके सुझाव को मद्देनजर रखते हुए गोबिंद सागर में 50 प्रतिशत से अधिक बीज सिल्वर कार्प डालने का निर्णय लिया गया था। 2012-13 में झील में सिल्वर कार्प का प्रभाव था, तब इसका उत्पादन उत्पादन 1392 मीट्रिक टन हुआ था। इसके बाद हर वर्ष सिल्वर कार्प के प्रोडक्शन में गिरावट दर्ज हुई। एक समय तो इसका उत्पादन 200 मीट्रिक टन रह गया। जिसके चलते विभाग ने इस पर रिसर्च करवाई। सिपरी इंस्टीट्यूट के सुझावों पर ही झील में बीज डाला जा रहा है ताकि सिल्वर कार्प अपने पहले के उत्पादन के अनुसार ही स्थान प्राप्त हो सके।
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बताते चलें की पिछले वर्ष आठ मीट्रिक टन अधिक उत्पादन हुआ है। वहीं इस बार 1,17,621 किलोग्राम की वृद्धि इसमें दर्ज की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 15 नवंबर 2024 तक झील में 259 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है।
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गोबिंद सागर व कोलबांध जलाशय में हर वर्ष की भांति बीज संग्रहण प्रक्रिया पूरी की गई। मछली बीज संग्रहण के अब सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं जिससे इस वर्ष मछली उत्पादन में वृद्धि हुई है। यह वृद्धि मछुआरों के लिए लाभकारी साबित हो रही है क्योंकि मछली उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ मछुआरों को अधिक आय प्राप्त हो रही है।
पंकज ठाकुर, निदेशक मत्स्य मंडल बिलासपुर

गोबिंद सागर झील में मछली के बीज की प्रक्रिया को पूरा करते कामगार । संवाद