{"_id":"6abab3371af96b421b0fa521","slug":"51-more-children-to-receive-support-through-mission-vatsalya-bilaspur-news-c-92-1-bls1001-168723-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: मिशन वात्सल्य से 51 और बच्चों को मिलेगा सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: मिशन वात्सल्य से 51 और बच्चों को मिलेगा सहारा
विज्ञापन
मिशन वात्सल्य को लेकर आयोलित बैठक में मौजूद अधिकारी चर्चा करते हुए। स्रोत: डीपीआरओ
प्रायोजन एवं पालन-पोषण देखभाल स्वीकृति समिति की बैठक में मिली मंजूरी
जिले में योजना से लाभान्वित बच्चों की संख्या 160 होगी
हर बच्चे को मिल रही चार हजार रुपये की मासिक सहायता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मिशन वात्सल्य के तहत जरूरतमंद और संरक्षण की आवश्यकता वाले 51 और बच्चों को प्रायोजन योजना का लाभ देने की मंजूरी मिली है। इसके बाद जिले में योजना से लाभान्वित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 160 हो जाएगी। इस संबंध में प्रायोजन एवं पालन-पोषण देखभाल स्वीकृति समिति की बैठक उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रस्तुत मामलों पर चर्चा के बाद 51 बच्चों को योजना के लिए स्वीकृति दी गई।
स्वीकृत बच्चों में सदर विकास खंड के 18, श्री नयना देवी जी के 15, झंडूता के चार और घुमारवीं विकास खंड के 14 बच्चे शामिल हैं। उपायुक्त ने बताया कि जिले में पहले से 109 बच्चे प्रायोजन योजना का लाभ ले रहे हैं। प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
बैठक में बताया गया कि 51 स्वीकृत बच्चों को प्रारंभिक तौर पर मुख्यमंत्री सुख-शिक्षा योजना के तहत लाभ दिया जाएगा। मिशन वात्सल्य के लिए धनराशि प्राप्त होने के बाद इन्हें मिशन वात्सल्य के तहत प्रायोजन योजना का लाभ दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य कठिन और संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को परिवार और सामाजिक परिवेश में सुरक्षित रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और समुचित विकास के अवसर उपलब्ध करवाना है।
विज्ञापन
योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्त माता के बच्चे, विस्तारित परिवार के साथ रह रहे अनाथ बच्चे, गंभीर बीमारी से प्रभावित माता-पिता के बच्चे तथा आर्थिक या शारीरिक कारणों से बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ माता-पिता के बच्चे पात्र हो सकते हैं। बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी, शोषण, दुर्व्यवहार, सड़क पर रहने अथवा अन्य कठिन परिस्थितियों से प्रभावित बच्चों को भी सहायता के लिए चिन्हित किया जा सकता है।
डीसी ने बच्चों के समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के दिए निर्देश
उपायुक्त ने अधिकारियों को योजना का लाभ ले रहे बच्चों की समय-समय पर जांच करने और उनके स्वास्थ्य एवं विकास की निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाने को भी कहा। महिला एवं बाल विकास विभाग को ग्राम सभाओं के माध्यम से मिशन वात्सल्य सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र बच्चों और परिवारों की समय पर पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा सके।
विज्ञापन
जिले में योजना से लाभान्वित बच्चों की संख्या 160 होगी
हर बच्चे को मिल रही चार हजार रुपये की मासिक सहायता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मिशन वात्सल्य के तहत जरूरतमंद और संरक्षण की आवश्यकता वाले 51 और बच्चों को प्रायोजन योजना का लाभ देने की मंजूरी मिली है। इसके बाद जिले में योजना से लाभान्वित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 160 हो जाएगी। इस संबंध में प्रायोजन एवं पालन-पोषण देखभाल स्वीकृति समिति की बैठक उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रस्तुत मामलों पर चर्चा के बाद 51 बच्चों को योजना के लिए स्वीकृति दी गई।
स्वीकृत बच्चों में सदर विकास खंड के 18, श्री नयना देवी जी के 15, झंडूता के चार और घुमारवीं विकास खंड के 14 बच्चे शामिल हैं। उपायुक्त ने बताया कि जिले में पहले से 109 बच्चे प्रायोजन योजना का लाभ ले रहे हैं। प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
विज्ञापन
बैठक में बताया गया कि 51 स्वीकृत बच्चों को प्रारंभिक तौर पर मुख्यमंत्री सुख-शिक्षा योजना के तहत लाभ दिया जाएगा। मिशन वात्सल्य के लिए धनराशि प्राप्त होने के बाद इन्हें मिशन वात्सल्य के तहत प्रायोजन योजना का लाभ दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य कठिन और संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को परिवार और सामाजिक परिवेश में सुरक्षित रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और समुचित विकास के अवसर उपलब्ध करवाना है।
विज्ञापन
योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्त माता के बच्चे, विस्तारित परिवार के साथ रह रहे अनाथ बच्चे, गंभीर बीमारी से प्रभावित माता-पिता के बच्चे तथा आर्थिक या शारीरिक कारणों से बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ माता-पिता के बच्चे पात्र हो सकते हैं। बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी, शोषण, दुर्व्यवहार, सड़क पर रहने अथवा अन्य कठिन परिस्थितियों से प्रभावित बच्चों को भी सहायता के लिए चिन्हित किया जा सकता है।
डीसी ने बच्चों के समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के दिए निर्देश
उपायुक्त ने अधिकारियों को योजना का लाभ ले रहे बच्चों की समय-समय पर जांच करने और उनके स्वास्थ्य एवं विकास की निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाने को भी कहा। महिला एवं बाल विकास विभाग को ग्राम सभाओं के माध्यम से मिशन वात्सल्य सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र बच्चों और परिवारों की समय पर पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा सके।