{"_id":"6740844fc439778fcf033b8c","slug":"415-lakhs-paid-to-punjab-for-shri-nayanadevi-jis-changar-irrigation-scheme-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-126986-2024-11-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: श्री नयनादेवी जी की चंगर सिंचाई योजना का पंजाब को चुकाया साढ़े 41 लाख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: श्री नयनादेवी जी की चंगर सिंचाई योजना का पंजाब को चुकाया साढ़े 41 लाख
Fri, 22 Nov 2024 11:43 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 22 Nov 2024 11:43 PM IST
विज्ञापन
पीएसपीसीएल ने हिमाचल से मांगा था कर्मचारियों के मानदेय का 71.3 लाख
योजना के बंद करने की दी थी चेतावनी, सिंचाई, पेयजल पर था संकट
पंजाब के कर्मचारी करते हैं योजना का रखरखाव, सालाना 25 लाख बनता है वेतन
तरूणेश शर्मा
श्री नयनादेवी जी(बिलासपुर)। श्री नयनादेवी जी की चंगर क्षेत्र उठाऊ सिंचाई एवं पेयजल योजना को सुचारू करने के लिए प्रदेश के जल शक्ति विभाग ने पंजाब के स्टेट पावर काॅरपोरेशन लिमिटेड ( पीएसपीसीएल ) को करीब साढ़े 41 लाख रुपये का भुगतान किया है। योजना को सुचारू करने के लिए पंजाब ने हिमाचल से कर्मचारियों के मानदेय का 71.3 लाख मांगा था। वहीं चेताया था कि अगर यह भुगतान नहीं हुआ तो वो योजना को बंद कर देंगे। इस योजना का रख-रखाव पंजाब के कर्मचारी करते हैं, उनका मानदेय हिमाचल सरकार देती है। मार्च 2024 के बाद इन कर्मचारियों के मानदेय की शेष बची 71.3 लाख रुपये की राशि नहीं मिलने पर पीएसपीसीएल ने जल शक्ति विभाग को पत्र जारी कर योजना को बंद करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद जल शक्ति विभाग ने सितंबर 2023 में 22 लाख रुपये और मार्च 2024 में 25 लाख रुपये का ही भुगतान किया। जबकि 71,36,662 रुपये की बड़ी राशि अभी भी लंबित थी। ऐसे में यदि राशि नहीं दी जाती तो पीएसपीसीएल योजना में लगे कर्मचारियों को वापस ले लेता। योजना का रख-रखाव बंद कर दिया जाता। पंपिंग स्टेशन पर भी ताला लगा दिया जाता। वहीं पीएसपीसीएल ने जल शक्ति विभाग हिमाचल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की भी चेतावनी दी थी। इस सबके बाद अब जल शक्ति विभाग ने पंजाब को लंबित राशि में से करीब साढ़े 41 लाख रुपये का भुगतान कर दिया है, ताकि यह योजना बाधित न हो और लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। बता दें कि पंजाब और हिमाचल में हुए समझौते के अनुसार एसवाईएल कनाल से चंगर उठाऊ योजना के लिए 25 क्यूसेक पानी उठाया जाता है, जिसमें से दो क्यूसेक पानी पेयजल के लिए और 22 क्यूसेक पानी सिंचाई के लिए प्रयोग होता है। योजना बंद होती है तो उपमंडल श्री नयनादेवी जी की दर्जन भर पंचायतों को सिंचाई का पानी नहीं मिलता। साथ ही इस योजना पर निर्भर शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी की पेयजल योजना भी ठप हो जाती। इससे हजारों की आबादी को पीने और सिंचाई के लिए पानी का संकट पैदा हो जाएगा। योजना के रखरखाव के लिए जल शक्ति विभाग हर साल पीएसपीसीएल के कर्मचारियों को 25 लाख रुपये वेतन के रूप में देता है। इस राशि के भुगतान के बाद अब जल शक्ति विभाग पंजाब को 23 लाख 77 हजार 810 रुपये की राशि का भुगतान करेगा।
इनसेट
जमीन के बदले पानी देने का हुआ था समझौता
साल 1984 में पंजाब में एसवाईएल कनाल का कार्य शुरू हुआ था। तब श्री नयनादेवी जी के तत्कालीन विधायक दौलत राम संख्यान ने शर्त रखी कि पंजाब सरकार को इस कनाल के लिए हिमाचल की जमीन चाहिए तो बदले में कनाल से श्री नयनादेवी जी के चंगर क्षेत्र को पानी देना होगा। बाद में कलाल से 25 क्यूसेक पानी देने का पंजाब सरकार के साथ समझौता हुआ। समझौते में यह शर्त भी रखी गई कि नहर से उठाए जाने वाले पानी मात्रा पर नजर रखने के लिए और योजना का रख रखाव के लिए चार कर्मचारी पंजाब सरकार के भी नियुक्त होंगे। कर्मचारियों का मानदेय हिमाचल देगा। जून 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने चंगर क्षेत्र उठाऊ सिंचाई योजना का शिलान्यास किया। तब निर्माण पर 29 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। लेकिन निर्माण पूरा होने तक इसकी लागत 88.9 करोड़ रुपये जा पहुंची। 27 मार्च 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने ही इसका उद्घाटन किया।
कोट
पीएसपीसीएल को उक्त राशि का भुगतान किया गया है। योजना को बंद नहीं होने दिया जाएगा। - सतीश शर्मा, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग, बिलासपुर
विज्ञापन
योजना के बंद करने की दी थी चेतावनी, सिंचाई, पेयजल पर था संकट
पंजाब के कर्मचारी करते हैं योजना का रखरखाव, सालाना 25 लाख बनता है वेतन
तरूणेश शर्मा
श्री नयनादेवी जी(बिलासपुर)। श्री नयनादेवी जी की चंगर क्षेत्र उठाऊ सिंचाई एवं पेयजल योजना को सुचारू करने के लिए प्रदेश के जल शक्ति विभाग ने पंजाब के स्टेट पावर काॅरपोरेशन लिमिटेड ( पीएसपीसीएल ) को करीब साढ़े 41 लाख रुपये का भुगतान किया है। योजना को सुचारू करने के लिए पंजाब ने हिमाचल से कर्मचारियों के मानदेय का 71.3 लाख मांगा था। वहीं चेताया था कि अगर यह भुगतान नहीं हुआ तो वो योजना को बंद कर देंगे। इस योजना का रख-रखाव पंजाब के कर्मचारी करते हैं, उनका मानदेय हिमाचल सरकार देती है। मार्च 2024 के बाद इन कर्मचारियों के मानदेय की शेष बची 71.3 लाख रुपये की राशि नहीं मिलने पर पीएसपीसीएल ने जल शक्ति विभाग को पत्र जारी कर योजना को बंद करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद जल शक्ति विभाग ने सितंबर 2023 में 22 लाख रुपये और मार्च 2024 में 25 लाख रुपये का ही भुगतान किया। जबकि 71,36,662 रुपये की बड़ी राशि अभी भी लंबित थी। ऐसे में यदि राशि नहीं दी जाती तो पीएसपीसीएल योजना में लगे कर्मचारियों को वापस ले लेता। योजना का रख-रखाव बंद कर दिया जाता। पंपिंग स्टेशन पर भी ताला लगा दिया जाता। वहीं पीएसपीसीएल ने जल शक्ति विभाग हिमाचल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की भी चेतावनी दी थी। इस सबके बाद अब जल शक्ति विभाग ने पंजाब को लंबित राशि में से करीब साढ़े 41 लाख रुपये का भुगतान कर दिया है, ताकि यह योजना बाधित न हो और लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। बता दें कि पंजाब और हिमाचल में हुए समझौते के अनुसार एसवाईएल कनाल से चंगर उठाऊ योजना के लिए 25 क्यूसेक पानी उठाया जाता है, जिसमें से दो क्यूसेक पानी पेयजल के लिए और 22 क्यूसेक पानी सिंचाई के लिए प्रयोग होता है। योजना बंद होती है तो उपमंडल श्री नयनादेवी जी की दर्जन भर पंचायतों को सिंचाई का पानी नहीं मिलता। साथ ही इस योजना पर निर्भर शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी की पेयजल योजना भी ठप हो जाती। इससे हजारों की आबादी को पीने और सिंचाई के लिए पानी का संकट पैदा हो जाएगा। योजना के रखरखाव के लिए जल शक्ति विभाग हर साल पीएसपीसीएल के कर्मचारियों को 25 लाख रुपये वेतन के रूप में देता है। इस राशि के भुगतान के बाद अब जल शक्ति विभाग पंजाब को 23 लाख 77 हजार 810 रुपये की राशि का भुगतान करेगा।
इनसेट
जमीन के बदले पानी देने का हुआ था समझौता
साल 1984 में पंजाब में एसवाईएल कनाल का कार्य शुरू हुआ था। तब श्री नयनादेवी जी के तत्कालीन विधायक दौलत राम संख्यान ने शर्त रखी कि पंजाब सरकार को इस कनाल के लिए हिमाचल की जमीन चाहिए तो बदले में कनाल से श्री नयनादेवी जी के चंगर क्षेत्र को पानी देना होगा। बाद में कलाल से 25 क्यूसेक पानी देने का पंजाब सरकार के साथ समझौता हुआ। समझौते में यह शर्त भी रखी गई कि नहर से उठाए जाने वाले पानी मात्रा पर नजर रखने के लिए और योजना का रख रखाव के लिए चार कर्मचारी पंजाब सरकार के भी नियुक्त होंगे। कर्मचारियों का मानदेय हिमाचल देगा। जून 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने चंगर क्षेत्र उठाऊ सिंचाई योजना का शिलान्यास किया। तब निर्माण पर 29 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। लेकिन निर्माण पूरा होने तक इसकी लागत 88.9 करोड़ रुपये जा पहुंची। 27 मार्च 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने ही इसका उद्घाटन किया।
विज्ञापन
कोट
पीएसपीसीएल को उक्त राशि का भुगतान किया गया है। योजना को बंद नहीं होने दिया जाएगा। - सतीश शर्मा, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग, बिलासपुर