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फॉल आर्मी वर्म से जिले में 122 हैक्टर पर मक्की की फसल हुई प्रभावित
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जुखाला में मक्की की फसल को नस्ट करने वाला फॉल आर्मी कीट।
- फोटो : BILASPUR
जुखाला(बिलासपुर)। जिले में मक्की की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का कहर जारी है। इससे मक्की की फसल खराब हो रही है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में 122 हेक्टेयर भूमि पर बीजी गई मक्की की फसल इससे प्रभावित हुई है।
जिले में 57,422 किसान परिवार 27,000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई करते हैं। साल 2018 से फॉल आर्मी वर्म की वजह से किसानों की मक्की की फसल खराब हो रही है। कृषि विभाग ने ब्लॉक स्तर पर कृषि विशेषज्ञों की टीमें बनाई हैं, जो कि प्रभावित क्षेत्रों का दौर कर रही हैं। किसानों को इस कीड़े से मक्की की फसल को बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ इसके बचाव के लिए दवाई के छिड़काव की सलाह दे रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है की फॉल आर्मी वर्म की चार अवस्थाएं हैं। यह कीड़ा मक्की के पौधे पर अंडे देता है। इसके बाद अंतिम अवस्था में ये कीड़े उड़कर खेत में जगह-जगह अंडे देते हैं। इसके बचाव के लिए किसानों को खेत में पेरोमोंन ट्रेप लगाने चाहिए, जिससे ये कीड़े ट्रेप में आकर मर जाते हैं। इसके अलावा क्लोरोफारिफॉस दवाई 4 एमएल प्रति लीटर के हिसाब से खेत में छिड़काव करें। दवाई उपदान पर कृषि विक्रय केंद्रों पर उपलब्ध है। किसान खेत में टी टाइप का पक्षियों को बैठने के लिए लकड़ी का ढांचा बना सकते हैं। इन पर पक्षी बैठकर फॉल आर्मी वर्म के अंडों को खा सकते हैं।
जिला कृषि उपनिदेशक प्राची गोयल ने कहा कि फॉल आर्मी वर्म के प्रति विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में जा रही हैं। किसानों को इस कीड़े के बचाव के लिए दवाई कृषि विक्रय केंद्रों पर उपदान पर उपलब्ध है।
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जिले में 57,422 किसान परिवार 27,000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई करते हैं। साल 2018 से फॉल आर्मी वर्म की वजह से किसानों की मक्की की फसल खराब हो रही है। कृषि विभाग ने ब्लॉक स्तर पर कृषि विशेषज्ञों की टीमें बनाई हैं, जो कि प्रभावित क्षेत्रों का दौर कर रही हैं। किसानों को इस कीड़े से मक्की की फसल को बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ इसके बचाव के लिए दवाई के छिड़काव की सलाह दे रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है की फॉल आर्मी वर्म की चार अवस्थाएं हैं। यह कीड़ा मक्की के पौधे पर अंडे देता है। इसके बाद अंतिम अवस्था में ये कीड़े उड़कर खेत में जगह-जगह अंडे देते हैं। इसके बचाव के लिए किसानों को खेत में पेरोमोंन ट्रेप लगाने चाहिए, जिससे ये कीड़े ट्रेप में आकर मर जाते हैं। इसके अलावा क्लोरोफारिफॉस दवाई 4 एमएल प्रति लीटर के हिसाब से खेत में छिड़काव करें। दवाई उपदान पर कृषि विक्रय केंद्रों पर उपलब्ध है। किसान खेत में टी टाइप का पक्षियों को बैठने के लिए लकड़ी का ढांचा बना सकते हैं। इन पर पक्षी बैठकर फॉल आर्मी वर्म के अंडों को खा सकते हैं।
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जिला कृषि उपनिदेशक प्राची गोयल ने कहा कि फॉल आर्मी वर्म के प्रति विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में जा रही हैं। किसानों को इस कीड़े के बचाव के लिए दवाई कृषि विक्रय केंद्रों पर उपदान पर उपलब्ध है।
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