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टैंक बनाए, पाइप लाइन बिछाई लेकिन नहीं हुई सिंचाई
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बरठीं (बिलासपुर)। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण सवा सौ करोड़ रुपये की लागत वाली उठाऊ सिंचाई योजना सुन्हाणी का लगभग चार वर्ष पूर्व उद्घाटन होने के बाद भी किसानों की जमीन में पानी नहीं पहुंचाया गया है। इस कारण योजना अपने हाल पर आंसू बहा रही है। विभाग की लापरवाही के कारण इस योजना का लाभ पंचायत सुन्हाणी के गांव लेहड़, बेला, धरोटी व सुन्हाणी की लगभग 72.77 हेक्टेयर भूमि को नहीं हो रहा है जिस कारण ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
सुन्हाणी गांव के किसान सुरेंद्र कौशल ने बताया कि इस योजना के न चलने के कारण उनकी उपजाऊ भूमि बरसात के पानी पर ही टिकी हुई है यदि बरसात न हो या ज्यादा हो तो उनकी फसलें तबाह हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना 112.48 लाख रुपये से बन कर तैयार हुई है, इस योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।
किसान दिनेश कुमार कौशल ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए उनको सिंचाई का पानी चाहिए था, ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी उन्हें योजना का कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों ने बताया कि योजना का आनन-फानन में बिना मशीनरी लगे उद्घाटन भी कर दिया गया था। उद्घाटन के तीन वर्ष बाद विभाग ने मशीनें तो लगा दी हैं लेकिन खेतों तक अभी पानी नहीं पहुंच पाया है जिससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है।
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गांव लेहड़ के सुरेश कुमार ने बताया कि योजना का लाभ लेने वाले किसान खेतों में सिंचाई न होने की समस्या झेलने को मजबूर हैं। लाखों रुपये लगाकर सूखे की मार से निपटने के लिए सिंचाई योजना बनाई गई थी, लेकिन विभाग योजना को चालू न करके उनके साथ अन्याय कर रहा है। विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्दी ही योजना को शुरू नहीं किया गया तो मजबूरन लोगों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
किसान शकुंतला कौशल ने बताया कि राजनैतिक पार्टियां भी चुनावी मौसम में बड़े-बड़े लोक लुभावन वायदे करती हैं लेकिन धरातल पर उसके विपरीत होता है। नेताओं को चाहिए कि जब वह किसी योजना को चालू करने के लिए धन का प्रावधान करते हैं तो उस योजना को चालू करने तक उसकी पूरी चिंता भी करे ताकि किसानों को सरकार द्वारा दी गई सुविधा का पूरा लाभ मिल सके।
उधर स्थानीय विधायक जीत राम कटवाल ने दावा किया है कि आने वाले समय में उनके हल्के की सिंचाई समस्या का समाधान पूरी तरह से किया जाएगा। इसके लिए खड्डों का तटीकरण कर व छोटे-छोटे बांध बनाकर जल संग्रहण किया जाएगा जिसकी डीपीआर तैयार की जा चुकी है। इस योजना के तहत पाइप लाइन डालने के लिए कार्य किया जा चुका है लेकिन गांव में टैंक बनाने के लिए जमीनी विवाद के चलते यह कार्य लटका हुआ है। जमीनी विवाद के सुलझते ही ग्रामीणों को सिंचाई योजना का लाभ दिया जाएगा।
सुन्हाणी गांव के किसान सुरेंद्र कौशल ने बताया कि इस योजना के न चलने के कारण उनकी उपजाऊ भूमि बरसात के पानी पर ही टिकी हुई है यदि बरसात न हो या ज्यादा हो तो उनकी फसलें तबाह हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना 112.48 लाख रुपये से बन कर तैयार हुई है, इस योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।
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किसान दिनेश कुमार कौशल ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए उनको सिंचाई का पानी चाहिए था, ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी उन्हें योजना का कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों ने बताया कि योजना का आनन-फानन में बिना मशीनरी लगे उद्घाटन भी कर दिया गया था। उद्घाटन के तीन वर्ष बाद विभाग ने मशीनें तो लगा दी हैं लेकिन खेतों तक अभी पानी नहीं पहुंच पाया है जिससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है।
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गांव लेहड़ के सुरेश कुमार ने बताया कि योजना का लाभ लेने वाले किसान खेतों में सिंचाई न होने की समस्या झेलने को मजबूर हैं। लाखों रुपये लगाकर सूखे की मार से निपटने के लिए सिंचाई योजना बनाई गई थी, लेकिन विभाग योजना को चालू न करके उनके साथ अन्याय कर रहा है। विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्दी ही योजना को शुरू नहीं किया गया तो मजबूरन लोगों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
किसान शकुंतला कौशल ने बताया कि राजनैतिक पार्टियां भी चुनावी मौसम में बड़े-बड़े लोक लुभावन वायदे करती हैं लेकिन धरातल पर उसके विपरीत होता है। नेताओं को चाहिए कि जब वह किसी योजना को चालू करने के लिए धन का प्रावधान करते हैं तो उस योजना को चालू करने तक उसकी पूरी चिंता भी करे ताकि किसानों को सरकार द्वारा दी गई सुविधा का पूरा लाभ मिल सके।
उधर स्थानीय विधायक जीत राम कटवाल ने दावा किया है कि आने वाले समय में उनके हल्के की सिंचाई समस्या का समाधान पूरी तरह से किया जाएगा। इसके लिए खड्डों का तटीकरण कर व छोटे-छोटे बांध बनाकर जल संग्रहण किया जाएगा जिसकी डीपीआर तैयार की जा चुकी है। इस योजना के तहत पाइप लाइन डालने के लिए कार्य किया जा चुका है लेकिन गांव में टैंक बनाने के लिए जमीनी विवाद के चलते यह कार्य लटका हुआ है। जमीनी विवाद के सुलझते ही ग्रामीणों को सिंचाई योजना का लाभ दिया जाएगा।