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चंडीगढ़ के निजी अस्पताल में जुड़वां नवजात बच्चों की मौत
Updated Sun, 09 Dec 2018 11:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद बिलासपुर के एक दंपति को अपने दोनों जुड़वां नवजात बच्चों से हाथ धोना पड़ा। एक नवजात की जन्म के 25, जबकि दूसरे की 48 दिनों के बाद अस्पताल में ही मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन की मांग के अनुसार लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सामने आए इस नतीजे से दुखी दंपति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। रविवार को पीड़ित परिवार के साथ कई अन्य लोगों ने विजयपुर स्थित नड्डा निवास में केंद्रीय मंत्री की धर्मपत्नी डॉ. मल्लिका नड्डा से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
बिलासपुर के रौड़ा सेक्टर निवासी गौरव दबड़ा के अनुसार उन्होंने अपनी पत्नी पायल दबड़ा को प्रसव के लिए गत 17 अक्तूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर.44सी के निजी अस्पताल चैतन्य में एड्मिट करवाया था। हालांकि पायल को उस समय प्रसव पीड़ा नहीं थी लेकिन डॉक्टरों ने उसी दिन प्रसव करवा दिया। उनकी पत्नी ने 2 जुड़वां बच्चों लड़के को जन्म दिया। हालांकि अस्पताल प्रशासन कुछ दिनों तक सब ठीक बताता रहा लेकिन 25 दिनों के बाद एक बच्चे की मौत हो गई।
हैरानी इस बात की है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें समय रहते। इसकी सूचना देने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि दूसरा बच्चा वहीं एड्मिट था लेकिन दम तोड़ चुके बच्चे का शव लेने के लिए उन पर पहले पैसे जमा कराने का दबाव डाला गया। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से 48 दिनों के बाद दूसरे बच्चे ने भी दम तोड़ दिया।
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अस्पताल प्रशासन ने लाखों रुपये वसूल लिए लेकिन इस केस का रिकॉर्ड देने से टालमटोल की गई। इस पर उन्होंने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत पुलिस डीडीआर नंबर.075/5/12-18 दी।
गौरव दबड़ा ने कहा कि अपने दोनों नवजात बच्चों को गंवा देने से वह और उनकी पत्नी गहरे सदमे में हैं। दुख इस बात का है कि यह सब उक्त नामी अस्पताल की लापरवाही के कारण हुआ। मानवीय आधार पर पीड़ित परिवार से संवेदना जताने के बजाए अस्पताल प्रशासन ने पैसों के लिए क्रूरता की सभी हदें पार कर दीं। उक्त अस्पताल पर इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप पहले भी लग चुके हैं। मीडिया द्वारा ऐसे कई मामले उजागर किए जा चुके हैं। वह तो अपने नवजात बच्चों को गंवा चुके हैं लेकिन भविष्य में किसी अन्य के साथ इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। लिहाजा इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
डॉ. मल्लिका नड्डा ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के साथ ही उन्हें आश्वस्त किया कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को सजा भुगतनी पड़ेगी।
बिलासपुर। चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद बिलासपुर के एक दंपति को अपने दोनों जुड़वां नवजात बच्चों से हाथ धोना पड़ा। एक नवजात की जन्म के 25, जबकि दूसरे की 48 दिनों के बाद अस्पताल में ही मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन की मांग के अनुसार लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सामने आए इस नतीजे से दुखी दंपति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। रविवार को पीड़ित परिवार के साथ कई अन्य लोगों ने विजयपुर स्थित नड्डा निवास में केंद्रीय मंत्री की धर्मपत्नी डॉ. मल्लिका नड्डा से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
बिलासपुर के रौड़ा सेक्टर निवासी गौरव दबड़ा के अनुसार उन्होंने अपनी पत्नी पायल दबड़ा को प्रसव के लिए गत 17 अक्तूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर.44सी के निजी अस्पताल चैतन्य में एड्मिट करवाया था। हालांकि पायल को उस समय प्रसव पीड़ा नहीं थी लेकिन डॉक्टरों ने उसी दिन प्रसव करवा दिया। उनकी पत्नी ने 2 जुड़वां बच्चों लड़के को जन्म दिया। हालांकि अस्पताल प्रशासन कुछ दिनों तक सब ठीक बताता रहा लेकिन 25 दिनों के बाद एक बच्चे की मौत हो गई।
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हैरानी इस बात की है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें समय रहते। इसकी सूचना देने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि दूसरा बच्चा वहीं एड्मिट था लेकिन दम तोड़ चुके बच्चे का शव लेने के लिए उन पर पहले पैसे जमा कराने का दबाव डाला गया। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से 48 दिनों के बाद दूसरे बच्चे ने भी दम तोड़ दिया।
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अस्पताल प्रशासन ने लाखों रुपये वसूल लिए लेकिन इस केस का रिकॉर्ड देने से टालमटोल की गई। इस पर उन्होंने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत पुलिस डीडीआर नंबर.075/5/12-18 दी।
गौरव दबड़ा ने कहा कि अपने दोनों नवजात बच्चों को गंवा देने से वह और उनकी पत्नी गहरे सदमे में हैं। दुख इस बात का है कि यह सब उक्त नामी अस्पताल की लापरवाही के कारण हुआ। मानवीय आधार पर पीड़ित परिवार से संवेदना जताने के बजाए अस्पताल प्रशासन ने पैसों के लिए क्रूरता की सभी हदें पार कर दीं। उक्त अस्पताल पर इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप पहले भी लग चुके हैं। मीडिया द्वारा ऐसे कई मामले उजागर किए जा चुके हैं। वह तो अपने नवजात बच्चों को गंवा चुके हैं लेकिन भविष्य में किसी अन्य के साथ इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। लिहाजा इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
डॉ. मल्लिका नड्डा ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के साथ ही उन्हें आश्वस्त किया कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को सजा भुगतनी पड़ेगी।