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छात्रों से काम लेने के कई मामले आए, बस नोटिस देकर निपटाए
Updated Sat, 25 Nov 2017 10:45 PM IST
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बिलासपुर। बिलासपुर में स्कूलों बच्चों से लेबर की तरह कार्य करवाना कोई नई बात नहीं है। पहले भी यहां पर इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। जिस पर विभाग ने महज कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद कुछ नहीं किया है। ऐसे संवेदनशील मामलों पर विभाग का लापरवाही रवैया भी कई सवालों को खड़ा करता है।
गौरतलब है कि कुछ माह पहले बरमाणा के तहत आने वाले बाहोट कसोल स्कूल में भी बच्चों से शौचालय साफ करवाने का मामला सामने आया था। यहां पर बच्चे मुंह में हाथ रखकर व कपड़े से नाक ढककर शौचालय साफ कर रहे थे। इसके बाद अमर उजाला में खबर छपने के बाद केवल विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा दूसरा मामला शहर के चिलिंग प्लांट स्थित खैरियां प्राइमरी स्कूल में सामने आया था, जहां पर दोपहर के समय बच्चों से लेबर का कार्य करवाया जा रहा था। यहां पर जब अमर उजाला की टीम ने निरीक्षण किया था तो उस समय बच्चे स्कूल के साथ लगते नाले से सिर पर पत्थर उठाकर ला रहे थे। जबकि स्कूल मैदान के कार्य में लगे मजदूर आराम फरमा रहे थे। इस मामले को लेकर भी अध्यापकों से कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन उसके बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। महज चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। ऐसे अन्य कई मामले हैं, जहां पर बच्चों से स्कूल के समय कार्य करवाया जाता है। लेकिन विभाग केवल कारण बताओ नोटिस जारी कर मामलों को पूरी तरीके से दबा देता है। जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल पैदा होते हैं।
शिक्षा-उनिदेशक प्रारंभिक देवेंद्र पाल का कहना है कि विभाग ऐसे संवेदनशील मामलों पर सख्ती से कार्रवाई करता है। अगर ऐसा होता है तो इसकी शिकायत विभाग के पास कर सकते हैं। विभागीय नियमों के अनुसार लापरवाह अध्यापकों पर कार्रवाई की जाती है।
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गौरतलब है कि कुछ माह पहले बरमाणा के तहत आने वाले बाहोट कसोल स्कूल में भी बच्चों से शौचालय साफ करवाने का मामला सामने आया था। यहां पर बच्चे मुंह में हाथ रखकर व कपड़े से नाक ढककर शौचालय साफ कर रहे थे। इसके बाद अमर उजाला में खबर छपने के बाद केवल विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा दूसरा मामला शहर के चिलिंग प्लांट स्थित खैरियां प्राइमरी स्कूल में सामने आया था, जहां पर दोपहर के समय बच्चों से लेबर का कार्य करवाया जा रहा था। यहां पर जब अमर उजाला की टीम ने निरीक्षण किया था तो उस समय बच्चे स्कूल के साथ लगते नाले से सिर पर पत्थर उठाकर ला रहे थे। जबकि स्कूल मैदान के कार्य में लगे मजदूर आराम फरमा रहे थे। इस मामले को लेकर भी अध्यापकों से कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन उसके बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। महज चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। ऐसे अन्य कई मामले हैं, जहां पर बच्चों से स्कूल के समय कार्य करवाया जाता है। लेकिन विभाग केवल कारण बताओ नोटिस जारी कर मामलों को पूरी तरीके से दबा देता है। जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल पैदा होते हैं।
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शिक्षा-उनिदेशक प्रारंभिक देवेंद्र पाल का कहना है कि विभाग ऐसे संवेदनशील मामलों पर सख्ती से कार्रवाई करता है। अगर ऐसा होता है तो इसकी शिकायत विभाग के पास कर सकते हैं। विभागीय नियमों के अनुसार लापरवाह अध्यापकों पर कार्रवाई की जाती है।
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