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युवाओं में पहचानें जाएंगे टीबी रोग के लक्षण
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शुभम राही
बिलासपुर। सूबे में पहली दफा अब स्पोर्ट्स हॉस्टल, जवाहर नवोदय स्कूल और कॉलेज हॉस्टल में रहने वाले युवाओं में टीबी के लक्षणों की जांच की जाएगी। युवाओं में टीबी और एड्स की बीमारी अधिक होने के चलते स्वास्थ्य विभाग ने यह फैसला लिया है। नए साल से शुरू किए गए टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत इस कड़ी को भी जोड़ा गया है ताकि लोगों के साथ अब युवाओं के भीतर उत्पन्न होने वाली इस बीमारी की भी जांच की जा सके।
वहीं, प्रदेश सरकार ने अब टीबी की पहचान के लिए सूबे के अस्पतालों में सीबी नेट मशीन भी लगाई है ताकि अगर एक प्रतिशत भी किसी युवा में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो विभाग को इसके बारे में पता लग जाए।
बता दें कि इससे पहले सरकार के पास जो टीबी जांच मशीनें थीं उसमें 50 प्रतिशत से अधिक टीबी के लक्षण पाए जाने पर ही रोगी की पहचान होती थी लेकिन इस आधुनिक मशीन से एक प्रतिशत की मात्रा को भी देखा जा सकता है। इस खबर की पुष्टि जिला क्षय रोग अधिकारी ऋषि टंडन ने की।
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उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त हिमाचल अभियान में हमेशा दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ा जाता था ताकि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले रोगियों की पहचान हो सके लेकिन शहरों में टीबी के आंकड़ों की संख्या में थोड़ी सी बढ़ोतरी से स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है ताकि अब लोगों के साथ युवाओं में भी टीबी लक्षणों की पहचान की जा सके।
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बिलासपुर जिला में है कुल 396 टीबी से ग्रसित
बिलासपुर जिला में अभी तक कुल 396 टीबी रोगियों की पहचान की गई है जिनमें से झंडूता ब्लॉक में 81, मार्कंडेय ब्लॉक में 241 और घुमारवीं में 74 रोगी टीबी बीमारी से ग्रस्त हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन रोगियों की दवा शुरू हो गई है और सभी रोगी सामान्य स्थिति में है।
टीबी मुक्त अभियान के तहत स्पोर्ट्स हॉस्टल, जवाहर नवोदय स्कूल और कॉलेज होस्टलों में रहने वाले युवाओं की स्क्रीनिंग की जाएगी। विभागीय टीम इन स्थानों का निरीक्षण करेगी।
डॉ. ऋषि टंडन, क्षय रोग अधिकारी बिलासपुर
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बिलासपुर। सूबे में पहली दफा अब स्पोर्ट्स हॉस्टल, जवाहर नवोदय स्कूल और कॉलेज हॉस्टल में रहने वाले युवाओं में टीबी के लक्षणों की जांच की जाएगी। युवाओं में टीबी और एड्स की बीमारी अधिक होने के चलते स्वास्थ्य विभाग ने यह फैसला लिया है। नए साल से शुरू किए गए टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत इस कड़ी को भी जोड़ा गया है ताकि लोगों के साथ अब युवाओं के भीतर उत्पन्न होने वाली इस बीमारी की भी जांच की जा सके।
वहीं, प्रदेश सरकार ने अब टीबी की पहचान के लिए सूबे के अस्पतालों में सीबी नेट मशीन भी लगाई है ताकि अगर एक प्रतिशत भी किसी युवा में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो विभाग को इसके बारे में पता लग जाए।
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बता दें कि इससे पहले सरकार के पास जो टीबी जांच मशीनें थीं उसमें 50 प्रतिशत से अधिक टीबी के लक्षण पाए जाने पर ही रोगी की पहचान होती थी लेकिन इस आधुनिक मशीन से एक प्रतिशत की मात्रा को भी देखा जा सकता है। इस खबर की पुष्टि जिला क्षय रोग अधिकारी ऋषि टंडन ने की।
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उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त हिमाचल अभियान में हमेशा दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ा जाता था ताकि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले रोगियों की पहचान हो सके लेकिन शहरों में टीबी के आंकड़ों की संख्या में थोड़ी सी बढ़ोतरी से स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है ताकि अब लोगों के साथ युवाओं में भी टीबी लक्षणों की पहचान की जा सके।
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बिलासपुर जिला में है कुल 396 टीबी से ग्रसित
बिलासपुर जिला में अभी तक कुल 396 टीबी रोगियों की पहचान की गई है जिनमें से झंडूता ब्लॉक में 81, मार्कंडेय ब्लॉक में 241 और घुमारवीं में 74 रोगी टीबी बीमारी से ग्रस्त हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन रोगियों की दवा शुरू हो गई है और सभी रोगी सामान्य स्थिति में है।
टीबी मुक्त अभियान के तहत स्पोर्ट्स हॉस्टल, जवाहर नवोदय स्कूल और कॉलेज होस्टलों में रहने वाले युवाओं की स्क्रीनिंग की जाएगी। विभागीय टीम इन स्थानों का निरीक्षण करेगी।
डॉ. ऋषि टंडन, क्षय रोग अधिकारी बिलासपुर
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