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चार विभाग के अधिकारी एसडीएम कोर्ट में हुए पेश
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uttarkashi ghansali kedarnath road
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। अवैध डंपिंग और ब्लास्टिंग के अलावा फोरलेन निर्माण के दौरान लोगों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक अच्छी खबर आई है। एसडीएम सदर प्रियंका वर्मा ने शनिवार को सुनवाई के दौरान आदेश दिए कि लोगों को अवैध डंपिंग, ब्लास्टिंग और अन्य कारणों से जो भी नुकसान फोरलेन निर्माण के दौरान हुआ है उसकी पूरी सूची तैयार कर दें जिसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी जाएगी।
शनिवार को एसडीएम कोर्ट एनएचएआई, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, मत्स्य विभाग के 14 कमेटियों के प्रधान, मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक और फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति के सदस्य कोर्ट में मौजूद रहे।
कोर्ट में सभी पक्षों की सुनवाई करीब एक घंटा तक चली। इसके बाद एसडीएम ने उक्त आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि नेरचौक-कीरतपुर फोरलेन निर्माण के दौरान करीब 71 नदी नालों जिसमें गोबिंद सागर भी शामिल है में अवैध रूप से मलबा डाला गया है। वहीं ब्लास्टिंग से भी लोगों के घरों को भारी नुकसान पहुंचा था। जबकि गोबिंद सागर में मलबा डालने के कारण मछलियों के उत्पादन में भी कमी आंकी गई थी जिसकी शिकायत समिति ने प्रशासन को की थी। शिकायत के बाद बनी कमेटी जिसकी अध्यक्ष स्वयं एसडीएम प्रियंका वर्मा रही है ने जांच में पाया था कि 71 नदी नालों में अवैध रूप से डंपिंग हुई है। वहीं गोबिंद सागर में भी मलबा डाला गया था। इसी मामले की सुनवाई के लिए आज चार विभागों अधिकारियों सहित प्रभावितों को बुलाया गया था।
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मछुआरा सैल के अध्यक्ष कुंजु राम ने समितियों का पक्ष रखते हुए बताया कि चार सालों से हमारी किसी भी समस्या का सुनवाई नहीं हुई। कंपनी ने हमारी रोजी रोटी को खत्म कर दिया है। परिवार के लिए दो वक्त की रोटी तक नहीं है।
फोरलेन प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने पक्ष रखते हुए कहा कि जहां अवैध डंपिंग से पर्यावरण को नुकसान हुआ है। मछुआरों पर आर्थिक संकट खड़ा हुआ है। जबकि निजी व वन भूमि को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं ब्लास्टिंग से भी लोगों के घरों को दरारें आ चुकी हैं। मदन शर्मा ने बताया कि एसडीएम ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुना और पूरे नुकसान की रिपोर्ट तैयार मांगी जिसके बाद कमेटी उसका निरीक्षण कर आगामी कार्रवाई करेगी।
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बिलासपुर। अवैध डंपिंग और ब्लास्टिंग के अलावा फोरलेन निर्माण के दौरान लोगों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक अच्छी खबर आई है। एसडीएम सदर प्रियंका वर्मा ने शनिवार को सुनवाई के दौरान आदेश दिए कि लोगों को अवैध डंपिंग, ब्लास्टिंग और अन्य कारणों से जो भी नुकसान फोरलेन निर्माण के दौरान हुआ है उसकी पूरी सूची तैयार कर दें जिसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी जाएगी।
शनिवार को एसडीएम कोर्ट एनएचएआई, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, मत्स्य विभाग के 14 कमेटियों के प्रधान, मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक और फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति के सदस्य कोर्ट में मौजूद रहे।
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कोर्ट में सभी पक्षों की सुनवाई करीब एक घंटा तक चली। इसके बाद एसडीएम ने उक्त आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि नेरचौक-कीरतपुर फोरलेन निर्माण के दौरान करीब 71 नदी नालों जिसमें गोबिंद सागर भी शामिल है में अवैध रूप से मलबा डाला गया है। वहीं ब्लास्टिंग से भी लोगों के घरों को भारी नुकसान पहुंचा था। जबकि गोबिंद सागर में मलबा डालने के कारण मछलियों के उत्पादन में भी कमी आंकी गई थी जिसकी शिकायत समिति ने प्रशासन को की थी। शिकायत के बाद बनी कमेटी जिसकी अध्यक्ष स्वयं एसडीएम प्रियंका वर्मा रही है ने जांच में पाया था कि 71 नदी नालों में अवैध रूप से डंपिंग हुई है। वहीं गोबिंद सागर में भी मलबा डाला गया था। इसी मामले की सुनवाई के लिए आज चार विभागों अधिकारियों सहित प्रभावितों को बुलाया गया था।
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मछुआरा सैल के अध्यक्ष कुंजु राम ने समितियों का पक्ष रखते हुए बताया कि चार सालों से हमारी किसी भी समस्या का सुनवाई नहीं हुई। कंपनी ने हमारी रोजी रोटी को खत्म कर दिया है। परिवार के लिए दो वक्त की रोटी तक नहीं है।
फोरलेन प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने पक्ष रखते हुए कहा कि जहां अवैध डंपिंग से पर्यावरण को नुकसान हुआ है। मछुआरों पर आर्थिक संकट खड़ा हुआ है। जबकि निजी व वन भूमि को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं ब्लास्टिंग से भी लोगों के घरों को दरारें आ चुकी हैं। मदन शर्मा ने बताया कि एसडीएम ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुना और पूरे नुकसान की रिपोर्ट तैयार मांगी जिसके बाद कमेटी उसका निरीक्षण कर आगामी कार्रवाई करेगी।