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Bilaspur News: फाउंडेशन लर्निंग स्टडी परीक्षा में 161 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

Sat, 25 Apr 2026 11:53 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 25 Apr 2026 11:53 PM IST
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161 students took part in the Foundation Learning Study Examination.
बिलासपुर में आयोजित फाउंडेशन लर्निंग स्टडी परीक्षा देता बच्ची व मौजदू अध्यापिका। स्रोत: डाइट जु
डिजिटल टैबलेट आधारित परीक्षा से परखी गई सीखने की क्षमता
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प्रारंभिक कक्षाओं के लर्निंग आउटकम का किया जाएगा आकलन
परीक्षा के परिणामों के बाद शिक्षा सुधार की दिशा तय करना है लक्ष्य

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में बच्चों की बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने की क्षमता का आकलन करने के उद्देश्य से फाउंडेशन लर्निंग स्टडी 2026 परीक्षा का आयोजन 24 और 25 अप्रैल को सफलतापूर्वक किया गया। परख-एनसीईआरटी एवं एससीईआरटी सोलन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अध्ययन में जिले के 18 सरकारी एवं निजी स्कूलों को शामिल किया गया।
इस परीक्षा में कुल 161 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रत्येक चयनित स्कूल से चौथी कक्षा के 12-12 विद्यार्थियों को सैंपल के रूप में शामिल किया जाना था, लेकिन कुछ स्कूलों में अपेक्षित उपस्थिति न होने के कारण अंतिम संख्या 161 रही। एफएलएस 2026 के लिए जिले के 18 स्कूलों का चयन रैंडम आधार पर किया गया, जिसमें 10 सरकारी और 8 निजी विद्यालय शामिल हैं। चयनित स्कूलों में राजकीय प्राथमिक पाठशाला कंदरौर, जीपीएस पनोह, जीपीएस बरोटा, जीपीएस सलासी, जीपीएस धनेतर, जीपीएस भराड़ी, जीपीएस भब्बा, जीपीएस डियारा, जीपीएस छत सहित अन्य विद्यालय शामिल रहे। वहीं निजी विद्यालयों में डीएवी स्कूल श्री नयना देवी जी, ब्राइट फ्यूचर स्कूल कंदरौर, ओम पब्लिक स्कूल ठाच और स्टेपिंग स्टोन्स इंटरनेशनल स्कूल बिलासपुर प्रमुख रहे।
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यह परीक्षा पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने टैबलेट के माध्यम से 45 मिनट की परीक्षा दी। परीक्षा में बच्चों की साक्षरता (लिटरेसी) और संख्यात्मक (न्यूमेरेसी) क्षमताओं का आकलन किया गया। आधुनिक तकनीक आधारित इस मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता को सटीक रूप से मापना है। एफएलएस परीक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप 2026-27 तक सार्वभौमिक प्रवीणता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अध्ययन के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि प्रारंभिक शिक्षा स्तर पर निर्धारित लर्निंग आउटकम्स कितने प्रभावी रूप से पूरे हो रहे हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
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लर्निंग गैप की पहचान और सुधार की योजना शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य केवल मूल्यांकन नहीं, बल्कि शिक्षा में मौजूद कमियों की पहचान करना भी है। इसके आधार पर भविष्य में रिमेडियल (सुधारात्मक) योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत किया जा सके।डाइट अधिकारी चंद्रकांत ने बताया कि अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि कौन-कौन से लर्निंग आउटकम्स बच्चों में पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं, ताकि राज्य और जिला स्तर पर विशेष ध्यान देकर सुधार किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए डीएलएड प्रशिक्षुओं को फील्ड निरीक्षक के रूप में तैनात किया गया था।

इन्हें डाइट जुखाला में दो दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने स्कूलों में परीक्षा प्रक्रिया का संचालन किया और डेटा संग्रह में सहयोग दिया। परीक्षा के बाद एकत्र किए गए सभी आंकड़ों का विश्लेषण एनसीईआरटी स्तर पर किया जाएगा। यह विश्लेषण पूरे देश के राज्यों के डेटा के साथ मिलाकर किया जाएगा, जिसमें लगभग दो से तीन महीने का समय लगने की संभावना है। इसके बाद संबंधित राज्यों और जिलों को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी। एफएलएस 2026 को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
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