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फोरलेन पर 26 को फैसला सुनाएगा एनजीटी
Updated Tue, 03 Apr 2018 11:10 PM IST
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बिलासपुर। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के मामले में एनजीटी 26 अप्रैल को फैसला सुना सकती है। कोर्ट ने 2 अप्रैल की सुनवाई में साफ कर दिया है कि मामला काफी लंबा चल चुका है जिस कारण अब इस पर निर्णय होना जरूरी है। हालांकि कोर्ट 2 अप्रैल को ही निर्णय देने के लिए तैयार थी। लेकिन कंपनी के अधिवक्ता ने समिति की ओर से दिए गए मक डंपिंग के आरओडब्ल्यू के बाहर डंप की गई मिट्टी के साक्ष्य पर सवाल उठाए और कहा कि वह इस संबंध में जवाब देंगे। इसके बाद कोर्ट ने 26 अप्रैल को मामले की सुनवाई रखी है।
उल्लेखनीय है समिति ने एजीटी में केस दायर किया है कि आरओडब्ल्यू से बाहर भारी मक डंपिंग हुई है। इसमें समिति ने 65 किलोमीटर का आरओडब्ल्यू प्लान कोर्ट में पेश किया। इसके अलावा मत्स्य विभाग ने रिपोर्ट में कहा है कि 70 नाले मिट्टी से भर गए हैं। वहीं 14 किलोमीटर सड़क की अलाइनमेंट को बदला गया है। इसके अलावा मौके पर से मक डंपिंग के फोटो, चैनल नंबर, जीपीएस नंबर सहित कोर्ट मेें साक्ष्य के रूप में जमा करवाए हैं ताकि कंपनी किसी भी प्रकार से साक्ष्यों को झूठा न साबित कर सके। हालांकि समिति की ओर से पेश किए साक्ष्य पर कंपनी के अधिवक्ता ने बड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि समिति ने पहले फोटो कैमरा से लिए। उसके बाद गुगल से रोड अलाइनमेंट और मक डंपिंग को बताया जा रहा है।
समिति के उप प्रधान राकेश कुमार, सदस्य बलदेव, जगत राम और सचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि साक्ष्यों के आधार पर फैसला उन्हें के पक्ष में आएगा। अगर किसी कारण ऐसा नहीं हुआ तो वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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उल्लेखनीय है समिति ने एजीटी में केस दायर किया है कि आरओडब्ल्यू से बाहर भारी मक डंपिंग हुई है। इसमें समिति ने 65 किलोमीटर का आरओडब्ल्यू प्लान कोर्ट में पेश किया। इसके अलावा मत्स्य विभाग ने रिपोर्ट में कहा है कि 70 नाले मिट्टी से भर गए हैं। वहीं 14 किलोमीटर सड़क की अलाइनमेंट को बदला गया है। इसके अलावा मौके पर से मक डंपिंग के फोटो, चैनल नंबर, जीपीएस नंबर सहित कोर्ट मेें साक्ष्य के रूप में जमा करवाए हैं ताकि कंपनी किसी भी प्रकार से साक्ष्यों को झूठा न साबित कर सके। हालांकि समिति की ओर से पेश किए साक्ष्य पर कंपनी के अधिवक्ता ने बड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि समिति ने पहले फोटो कैमरा से लिए। उसके बाद गुगल से रोड अलाइनमेंट और मक डंपिंग को बताया जा रहा है।
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समिति के उप प्रधान राकेश कुमार, सदस्य बलदेव, जगत राम और सचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि साक्ष्यों के आधार पर फैसला उन्हें के पक्ष में आएगा। अगर किसी कारण ऐसा नहीं हुआ तो वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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