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रोड़ अलाइनमेंट बदलने का मामला पहुंचा शिमला
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- फोटो : pexels.com
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रितेश गुलेरिया
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मामले में बदले गए रोड अलाइनमेंट प्लान का मामला अब शिमला पहुंच गया है। वन विभाग ने इस मामले की पूरी रिपोर्ट तैयार कर अतिरिक्त मुख्य अरण्यपाल एवं नोडल ऑफिसर शिमला को भेज दी है।
वन विभाग ने जांच में पाया था कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मामले में नौ गांव में नौ किमी में से करीब चार किमी की रोड अलाइनमेंट को बिना केंद्र सरकार की मंजूरी के बदल डाला गया है। हालांकि जांच के दौरान वन विभाग ने एनएचएआई को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया था लेकिन बार-बार पक्ष रखने का मौका देने के बाद भी एनएचएआई ने इस मामले में वन विभाग को कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद वन विभाग ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट बना कर आगामी कार्रवाई के लिए शिमला भेज दी है।
वहीं इसके अलावा वन अरण्यपाल बिलासपुर आरएस पटियाल ने डीएफओ बिलासपुर को आदेश दिए हैं कि वन विभाग की जमीन पर की गई अवैध डंपिंग के मलबे को भी कंपनी को तत्काल उठाने के आदेश दिए हैं। वहीं जिला वन अधिकारी को 24-12-2018 को एक बार फिर से अंतिम मौका देते हुए कहा कि वन एनएचएआई के परियोजना निदेशक से यह भी पूछे कि कोई रोड अलाइनमेंट प्लान बदलने के लिए अगर कोई मंजूरी आप के पास है तो अभी अपना पक्ष वन विभाग के समक्ष रख सकते हैं लेकिन परियोजना निदेशक ऐसे नहीं कर पाए।
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उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान जहां नौ गांव में रोड अलाइनमेंट प्लान बदला गया। वहीं वन विभाग की जमीन पर जगह-जगह अवैध रूप से मलबा भी डाला गया है। जिस पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने वन विभाग से इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान राकेश कुमार, चिंता देवी, श्रवण कुमार कोषाध्यक्ष, मुख्य सलाहकार लेखराम, जगतराम, बलदेव शर्मा, सुभाष, सीता राम, जगदीश राम और महासचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि कंपनी लोगों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है लेकिन इसके बाद भी सरकार और विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मामले में बदले गए रोड अलाइनमेंट प्लान का मामला अब शिमला पहुंच गया है। वन विभाग ने इस मामले की पूरी रिपोर्ट तैयार कर अतिरिक्त मुख्य अरण्यपाल एवं नोडल ऑफिसर शिमला को भेज दी है।
वन विभाग ने जांच में पाया था कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मामले में नौ गांव में नौ किमी में से करीब चार किमी की रोड अलाइनमेंट को बिना केंद्र सरकार की मंजूरी के बदल डाला गया है। हालांकि जांच के दौरान वन विभाग ने एनएचएआई को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया था लेकिन बार-बार पक्ष रखने का मौका देने के बाद भी एनएचएआई ने इस मामले में वन विभाग को कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद वन विभाग ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट बना कर आगामी कार्रवाई के लिए शिमला भेज दी है।
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वहीं इसके अलावा वन अरण्यपाल बिलासपुर आरएस पटियाल ने डीएफओ बिलासपुर को आदेश दिए हैं कि वन विभाग की जमीन पर की गई अवैध डंपिंग के मलबे को भी कंपनी को तत्काल उठाने के आदेश दिए हैं। वहीं जिला वन अधिकारी को 24-12-2018 को एक बार फिर से अंतिम मौका देते हुए कहा कि वन एनएचएआई के परियोजना निदेशक से यह भी पूछे कि कोई रोड अलाइनमेंट प्लान बदलने के लिए अगर कोई मंजूरी आप के पास है तो अभी अपना पक्ष वन विभाग के समक्ष रख सकते हैं लेकिन परियोजना निदेशक ऐसे नहीं कर पाए।
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उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान जहां नौ गांव में रोड अलाइनमेंट प्लान बदला गया। वहीं वन विभाग की जमीन पर जगह-जगह अवैध रूप से मलबा भी डाला गया है। जिस पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने वन विभाग से इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान राकेश कुमार, चिंता देवी, श्रवण कुमार कोषाध्यक्ष, मुख्य सलाहकार लेखराम, जगतराम, बलदेव शर्मा, सुभाष, सीता राम, जगदीश राम और महासचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि कंपनी लोगों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है लेकिन इसके बाद भी सरकार और विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।