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टैक्स देने के बावजूद सुविधाओं से महरूम है लोग 15-18-53
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:14 AM IST
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rupees
अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवी (बिलासपुर)।नगर परिषद घुमारवीं को नगर परिषद का दर्जा मिलने के बाद भी हालत दयनीय ही है। लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में फैले घुमारवीं नगर परिषद में सात वार्ड हैं। सातों वार्डों के लोग घुमारवीं नगर परिषद को हाउस टैक्स देने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। घुमारवीं को नगर परिषद का दर्जा नवंबर 2009 में प्राप्त हुआ है लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी नगर परिषद में कई छोटी सड़कें कच्ची व रास्ते भी कच्चे हैं। लोग इस बारे में कई बार चुनिंदा प्रतिनिधियों के पास गुहार लगा चुके हैं लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है।
घुमारवीं नगर परिषद को सबसे पहले 1970 में नोटिफाई एरिया कमेटी का दर्जा मिलने के बाद 1995 में नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ है। नगर परिषद का दर्जा बढ़ने के बावजूद अब भी लोग कई सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। चुनिंदा प्रतिनिधियों से कार्य की गुहार लगा रहे हैं, पर जिसकी चलती हैं उसके ही कार्य किए जा रहे हैं। नगर के सात वार्डों में अभी भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं जिनमें पानी, सीवरेज, बिजली, सड़क व रास्ते शामिल हैं। नगर परिषद में अब भी कच्ची सड़कें, रास्ते व सिंगल फेस लाइट ही लोगों को मुहैया हो रही हैं। जिन लोगों की ऊंची पहुंच है उन्हें सब सुविधाएं प्राप्त करवाई जा रही हैं।
नगर परिषद के प्रतिनिधियों की ओर से अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए पहले से पक्के रास्तों में जो कंकरीट से बनाए गए हैं उनमें टाइलें लगाई जा रही हैं, कुछ लोग अब भी पक्के रास्ते व सड़कों के लिए तरस रहे हैं। नगर परिषद में हर साल लगभग 40 लाख रुपये के करीब लोगों से टैक्स के रूप में वसूला जाता है पर सुविधाओं के नाम पर आश्वासन ही मिलते हैं।
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प्रदीप गुप्ता, कुलवंत, नवीन शर्मा, सुरेंद्र, रंजू, यशपाल, संजय, अजय, मंजीत, कुलदीप ने कहा कि नगर परिषद के प्रतिनिधियों को एक सम्मान व बिना भेदभाव से कार्य करने चाहिए जिससे शहर में प्रगति हो तथा सुख सुविधा लोगों को मिल सके।
नगर परिषद की अध्यक्षा गीता महाजन ने कहा कि नगर परिषद के सातों वार्डों में एक सम्मान कार्य बिना भेदभाव से किए जा रहे हैं। शहर में जहां-जहां कच्ची सड़कें व संपर्क मार्ग व रास्ते हैं वे उनके ध्यान में हैं।
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घुमारवी (बिलासपुर)।नगर परिषद घुमारवीं को नगर परिषद का दर्जा मिलने के बाद भी हालत दयनीय ही है। लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में फैले घुमारवीं नगर परिषद में सात वार्ड हैं। सातों वार्डों के लोग घुमारवीं नगर परिषद को हाउस टैक्स देने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। घुमारवीं को नगर परिषद का दर्जा नवंबर 2009 में प्राप्त हुआ है लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी नगर परिषद में कई छोटी सड़कें कच्ची व रास्ते भी कच्चे हैं। लोग इस बारे में कई बार चुनिंदा प्रतिनिधियों के पास गुहार लगा चुके हैं लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है।
घुमारवीं नगर परिषद को सबसे पहले 1970 में नोटिफाई एरिया कमेटी का दर्जा मिलने के बाद 1995 में नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ है। नगर परिषद का दर्जा बढ़ने के बावजूद अब भी लोग कई सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। चुनिंदा प्रतिनिधियों से कार्य की गुहार लगा रहे हैं, पर जिसकी चलती हैं उसके ही कार्य किए जा रहे हैं। नगर के सात वार्डों में अभी भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं जिनमें पानी, सीवरेज, बिजली, सड़क व रास्ते शामिल हैं। नगर परिषद में अब भी कच्ची सड़कें, रास्ते व सिंगल फेस लाइट ही लोगों को मुहैया हो रही हैं। जिन लोगों की ऊंची पहुंच है उन्हें सब सुविधाएं प्राप्त करवाई जा रही हैं।
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नगर परिषद के प्रतिनिधियों की ओर से अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए पहले से पक्के रास्तों में जो कंकरीट से बनाए गए हैं उनमें टाइलें लगाई जा रही हैं, कुछ लोग अब भी पक्के रास्ते व सड़कों के लिए तरस रहे हैं। नगर परिषद में हर साल लगभग 40 लाख रुपये के करीब लोगों से टैक्स के रूप में वसूला जाता है पर सुविधाओं के नाम पर आश्वासन ही मिलते हैं।
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प्रदीप गुप्ता, कुलवंत, नवीन शर्मा, सुरेंद्र, रंजू, यशपाल, संजय, अजय, मंजीत, कुलदीप ने कहा कि नगर परिषद के प्रतिनिधियों को एक सम्मान व बिना भेदभाव से कार्य करने चाहिए जिससे शहर में प्रगति हो तथा सुख सुविधा लोगों को मिल सके।
नगर परिषद की अध्यक्षा गीता महाजन ने कहा कि नगर परिषद के सातों वार्डों में एक सम्मान कार्य बिना भेदभाव से किए जा रहे हैं। शहर में जहां-जहां कच्ची सड़कें व संपर्क मार्ग व रास्ते हैं वे उनके ध्यान में हैं।