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सरयाली और दुग खड्ड में मिल रही शहर की गंदगी
Updated Tue, 05 Dec 2017 10:49 PM IST
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- फोटो : amarujala
शाहतलाई (बिलासपुर)। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शाहतलाई में सीवरेज व्यवस्था न होने से क्षेत्र की गंदगी सीधे सरयाली व दुग खड्ड में मिल रही है। इससे यहां का पानी गंदा हो रहा है। जबकि इन्हीं खड्डों से क्षेत्र की सात से आठ पंचायतों की 18 हजार की आबादी को पानी सप्लाई किया जाता है। इससे ग्रामीणों में महामारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। जबकि यहां पर बनने वाली सीवरेज व्यवस्था के लिए चार करोड़ 86 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है।
सीवरेज व्यवस्था के लिए आए चार करोड़ 86 लाख रुपये में से तीन करोड़ नगर पंचायत तलाई के पास जमा हैं, जबकि कुछ धनराशि आईपीएच विभाग के पास है। लेकिन सीवरेज का न बन पाना दुविधा पैदा कर रहा है। धार्मिक नगरी शाहतलाई में लाखों के हिसाब से बाहरी राज्यों से श्रद्धालुओं का आना-जाना चला रहता है। अधिकतर सेप्टिक टैंक हर समय ओवरफ्लो रहते हैं। इससे क्षेत्र की नालियां गंदगी से भरी रहती हैं। गंदा पानी सीधा नालियों के माध्यम से कस्बे की दोनों खड्डों में मिल जाता है। इन बदबूदार नालियों के कारण लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
कई बार स्थानीय बाशिंदों ने इसके लिए आवाज भी उठाई, लेकिन कोई स्थायी हल नहीं हो सका। खड्डों में पेयजल योजनाएं बनी हुई हैं जिनसे 7 से 8 पंचायतों के 18 हजार के लगभग लोगों को पानी मुहैया होता है। लेकिन शहर में सीवरेज व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी हो रही है। खड्ड का पानी भी दूषित हो रहा है। इसके लिए न प्रशासन और न ही सरकार गंभीर दिखाई देती है। सीवरेज व्यवस्था को लेकर वर्षों तक राजनीतिक खेल यहां पर होता रहा। वर्ष 2005 में समस्या को देखते हुए सरकार ने आईपीएच विभाग के माध्यम से सर्वे कर 4 करोड़ 86 लाख रुपये की योजना का प्रारूप बनाया। इसके बाद सत्ता परिवर्तन के साथ ही फिर यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। जैसे ही सरकार का अंतिम वर्ष 2012 आया तो इसका शिलान्यास लोक निर्माण विभाग तलाई के विश्रामगृह के प्रांगण में तत्कालीन आईपीएच मंत्री रविंद्र रवि ने किया।
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उस समय सीवरेज व्यवस्था के लिए झबोला पंचायत में सरयाली खड्ड किनारे ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना थी। लेकिन पंचायत झबोला के जनप्रतिनिधियों व आम जनता के विरोध के चलते क्लीयरेंस नहीं मिली। इसके चलते यह कार्य लटकता गया।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जैसे ही विभाग ने कार्य आरंभ करने के लिए प्रक्रिया शुरू की तो कुछ व्यक्तियों ने इस स्थल को लेकर घुमारवीं कोर्ट में आपत्ति दर्ज करवा दी थी। लेकिन सीवरेज की व्यवस्था न होने से कस्बे के लोगों और बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को समस्या से जूझना पड़ रहा है। स्थानीय जनता की मांग है कि प्रशासन व सरकार को इस मामले में जल्द प्रयास करना चाहिए।
नगर पंचायत कार्यालय तलाई के अध्यक्ष बलदेव स्याल ने बताया कि मामले को लेकर आईपीएच विभाग से पत्राचार भी किया गया है। उन्होंने कि यह मामला न्यायालय में चला हुआ है। आईपीएच विभाग कलोल में कार्यरत सहायक अभियंता सुरेश कुमार ने बताया कि वन विभाग की मंजूरी मिलते ही जल्द ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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सीवरेज व्यवस्था के लिए आए चार करोड़ 86 लाख रुपये में से तीन करोड़ नगर पंचायत तलाई के पास जमा हैं, जबकि कुछ धनराशि आईपीएच विभाग के पास है। लेकिन सीवरेज का न बन पाना दुविधा पैदा कर रहा है। धार्मिक नगरी शाहतलाई में लाखों के हिसाब से बाहरी राज्यों से श्रद्धालुओं का आना-जाना चला रहता है। अधिकतर सेप्टिक टैंक हर समय ओवरफ्लो रहते हैं। इससे क्षेत्र की नालियां गंदगी से भरी रहती हैं। गंदा पानी सीधा नालियों के माध्यम से कस्बे की दोनों खड्डों में मिल जाता है। इन बदबूदार नालियों के कारण लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
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कई बार स्थानीय बाशिंदों ने इसके लिए आवाज भी उठाई, लेकिन कोई स्थायी हल नहीं हो सका। खड्डों में पेयजल योजनाएं बनी हुई हैं जिनसे 7 से 8 पंचायतों के 18 हजार के लगभग लोगों को पानी मुहैया होता है। लेकिन शहर में सीवरेज व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी हो रही है। खड्ड का पानी भी दूषित हो रहा है। इसके लिए न प्रशासन और न ही सरकार गंभीर दिखाई देती है। सीवरेज व्यवस्था को लेकर वर्षों तक राजनीतिक खेल यहां पर होता रहा। वर्ष 2005 में समस्या को देखते हुए सरकार ने आईपीएच विभाग के माध्यम से सर्वे कर 4 करोड़ 86 लाख रुपये की योजना का प्रारूप बनाया। इसके बाद सत्ता परिवर्तन के साथ ही फिर यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। जैसे ही सरकार का अंतिम वर्ष 2012 आया तो इसका शिलान्यास लोक निर्माण विभाग तलाई के विश्रामगृह के प्रांगण में तत्कालीन आईपीएच मंत्री रविंद्र रवि ने किया।
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उस समय सीवरेज व्यवस्था के लिए झबोला पंचायत में सरयाली खड्ड किनारे ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना थी। लेकिन पंचायत झबोला के जनप्रतिनिधियों व आम जनता के विरोध के चलते क्लीयरेंस नहीं मिली। इसके चलते यह कार्य लटकता गया।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जैसे ही विभाग ने कार्य आरंभ करने के लिए प्रक्रिया शुरू की तो कुछ व्यक्तियों ने इस स्थल को लेकर घुमारवीं कोर्ट में आपत्ति दर्ज करवा दी थी। लेकिन सीवरेज की व्यवस्था न होने से कस्बे के लोगों और बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को समस्या से जूझना पड़ रहा है। स्थानीय जनता की मांग है कि प्रशासन व सरकार को इस मामले में जल्द प्रयास करना चाहिए।
नगर पंचायत कार्यालय तलाई के अध्यक्ष बलदेव स्याल ने बताया कि मामले को लेकर आईपीएच विभाग से पत्राचार भी किया गया है। उन्होंने कि यह मामला न्यायालय में चला हुआ है। आईपीएच विभाग कलोल में कार्यरत सहायक अभियंता सुरेश कुमार ने बताया कि वन विभाग की मंजूरी मिलते ही जल्द ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।