{"_id":"59f339534f1c1bd9798b897f","slug":"121509112147-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज्य सूचना आयुक्त के आदेशों के बाद भी नहीं मिली सूचना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राज्य सूचना आयुक्त के आदेशों के बाद भी नहीं मिली सूचना
Updated Fri, 27 Oct 2017 09:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलासपुर। राज्य सूचना आयुक्त के आदेशों के बाद भी फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को तहसीलदार एनएचएआई की ओर से सही जानकारी नहीं दी गई। इस संबंध में समिति ने आरटीआई की धारा 18(1) में राज्य सूचना आयुक्त को शिकायत कर दी है। समिति ने साफ किया कि अगर अब भी सही सूचना नहीं दी गई तो समिति इस संबंध में हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगाएगी।
राज्य सूचना आयुक्त सुशील चंद्रा श्रीवास्तवा ने एनएचएआई के तहसीलदार को आदेश जारी किए थे कि समिति को निशुल्क सूचना मुहैया करवाई जाए। वहीं आदेश में कहा गया है कि जो सूचना दी जाए वह प्रार्थी को साफ पढ़ना आ सके, क्योंकि पूर्व में दी गई सूचना पढ़ने योग्य नहीं है।
वहीं आदेश के बाद भी तहसीलदार ने पूर्व में दिए दस्तावेज फिर से मुहैया करवा दिया जो किसी भी सूरत में पढ़ने योग्य नहीं थे। समिति ने यह दस्तावेज इसलिए मांगे थे ताकि पता लग सके की जो भूमि अधिग्रहण हुआ है वह किस खसरा नंबर से कितना हुआ और कहां से हुआ है। जब तक इसकी पुष्टि नहीं हो जाती तब तक किसी भी खसरा नंबर से भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सकता, यह भूमि अधिग्रहण की सबसे पहली प्रक्रिया है। समिति को संदेह है कि भूमि अधिग्रहण जो हुआ है वह नियमों को ताक पर रखकर किया गया।
विज्ञापन
उधर, समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि राज्य सूचना आयुक्त के आदेशों के बाद भी सही सूचना नहीं दी गई। इसके बाद अब समिति ने इस संबंध में आरटीआई की धारा 18(1) में राज्य सूचना आयुक्त को शिकायत कर दी है। अगर फिर भी सूचना सही नहीं मिली तो वह न्याय की गुहार हाईकोर्ट में लगाएंगे।
विज्ञापन
राज्य सूचना आयुक्त सुशील चंद्रा श्रीवास्तवा ने एनएचएआई के तहसीलदार को आदेश जारी किए थे कि समिति को निशुल्क सूचना मुहैया करवाई जाए। वहीं आदेश में कहा गया है कि जो सूचना दी जाए वह प्रार्थी को साफ पढ़ना आ सके, क्योंकि पूर्व में दी गई सूचना पढ़ने योग्य नहीं है।
विज्ञापन
वहीं आदेश के बाद भी तहसीलदार ने पूर्व में दिए दस्तावेज फिर से मुहैया करवा दिया जो किसी भी सूरत में पढ़ने योग्य नहीं थे। समिति ने यह दस्तावेज इसलिए मांगे थे ताकि पता लग सके की जो भूमि अधिग्रहण हुआ है वह किस खसरा नंबर से कितना हुआ और कहां से हुआ है। जब तक इसकी पुष्टि नहीं हो जाती तब तक किसी भी खसरा नंबर से भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सकता, यह भूमि अधिग्रहण की सबसे पहली प्रक्रिया है। समिति को संदेह है कि भूमि अधिग्रहण जो हुआ है वह नियमों को ताक पर रखकर किया गया।
विज्ञापन
उधर, समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि राज्य सूचना आयुक्त के आदेशों के बाद भी सही सूचना नहीं दी गई। इसके बाद अब समिति ने इस संबंध में आरटीआई की धारा 18(1) में राज्य सूचना आयुक्त को शिकायत कर दी है। अगर फिर भी सूचना सही नहीं मिली तो वह न्याय की गुहार हाईकोर्ट में लगाएंगे।