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मृत बच्ची को रेफर करने के आरोप
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:13 AM IST
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बरमाणा (बिलासपुर)। जिला अस्पताल बिलासपुर में 27 जनवरी को डॉक्टरों और नर्सों की हड़ताल ढाई साल की मासूम की जान पर भारी पड़ गई। परिजनों ने बच्ची की मौत के बाद शिमला रेफर करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि जब बच्ची को 108 एंबुलेंस में शिमला ले जाने लगे तो एंबुलेंस में कार्यरत ईएनटी ने बच्ची को मृत कहकर एंबुलेंस से बाहर निकाल दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने भी बच्ची को मृत घोषित कर दिया। बच्ची के परिजनों ने इसकी शिकायत सीएमओ बिलासपुर को ऑनलाइन की है। शिकायत का नंबर भी अपडेट हो गया है। इस घटना के बार फिर से जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़े हो गई है।
जानकारी अनुसार जिला अस्पताल में 27 जनवरी को डॉक्टरों और नर्सों की हड़ताल थी। 26 जनवरी की रात कुछ शरारती तत्वों ने जिला अस्पताल पहुंचकर नर्सों के साथ बदतमीजी की थी। इसके कारण दूसरे दिन सारा अस्पताल प्रबंधन 12 बजे तक मरीजों को देखने नहीं पहुंचा। मानर निवासी अमित कुमार पुत्र शिवराम ने बताया कि ढाई साल की बेटी को बुखार आने पर 26 जनवरी की शाम को बिलासपुर अस्पताल में भर्ती करवाया था। डॉक्टरों व नर्सों की हड़ताल के कारण सही समय पर उपचार न मिलने के कारण मासूम की मौत हो गई। आरोप लगाया है कि गुड़िया को मौत के बाद डॉक्टरों ने जिला अस्पताल से शिमला के लिए रेफर किया। लेकिन एंबुलेंस में बैठने से पहले ही उसे एंबुलेंस स्टॉफ ने मृत घोषित कर दिया। मृतक बच्ची के पिता अमित कुमार का कहना है कि इसकी शिकायत उन्होंने सीएमओ बिलासपुर को ऑनलाइन की है। बच्ची के दादा शिवराम का कहना है कि वह गरीब परिवार से संबंध रखते हैं, पुलिस व कोर्ट कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते।
उधर, सीएमओ बिलासपुर वीके चौधरी का कहना है कि उनके पास जिला की जिम्मेवारी है। बिलासपुर अस्पताल वह नहीं देखते।
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जानकारी अनुसार जिला अस्पताल में 27 जनवरी को डॉक्टरों और नर्सों की हड़ताल थी। 26 जनवरी की रात कुछ शरारती तत्वों ने जिला अस्पताल पहुंचकर नर्सों के साथ बदतमीजी की थी। इसके कारण दूसरे दिन सारा अस्पताल प्रबंधन 12 बजे तक मरीजों को देखने नहीं पहुंचा। मानर निवासी अमित कुमार पुत्र शिवराम ने बताया कि ढाई साल की बेटी को बुखार आने पर 26 जनवरी की शाम को बिलासपुर अस्पताल में भर्ती करवाया था। डॉक्टरों व नर्सों की हड़ताल के कारण सही समय पर उपचार न मिलने के कारण मासूम की मौत हो गई। आरोप लगाया है कि गुड़िया को मौत के बाद डॉक्टरों ने जिला अस्पताल से शिमला के लिए रेफर किया। लेकिन एंबुलेंस में बैठने से पहले ही उसे एंबुलेंस स्टॉफ ने मृत घोषित कर दिया। मृतक बच्ची के पिता अमित कुमार का कहना है कि इसकी शिकायत उन्होंने सीएमओ बिलासपुर को ऑनलाइन की है। बच्ची के दादा शिवराम का कहना है कि वह गरीब परिवार से संबंध रखते हैं, पुलिस व कोर्ट कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते।
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उधर, सीएमओ बिलासपुर वीके चौधरी का कहना है कि उनके पास जिला की जिम्मेवारी है। बिलासपुर अस्पताल वह नहीं देखते।