{"_id":"5c3239b7bdec22569c67c63b","slug":"101546795447-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल में सफेद हाथी बनी सिटी स्कैन मशीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल में सफेद हाथी बनी सिटी स्कैन मशीन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर की कार्यप्रणाली एक बार फिर से शक के घेरे में आना शुरू हो गई है क्योंकि यहां पर लगी सिटी स्कैन मशीन की सालाना रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विभाग एक साल में इस मशीन पर 13 लाख से अधिक खर्च करता है। जबकि सच्चाई यह है कि अस्पताल में मरीजों को अधिकतर समय सिटी स्कैन मशीन की सुविधा नहीं मिलती है। हमेशा अस्पताल में सिटी स्कैन खराब स्थिति में दिखाई जाती है और अस्पताल प्रशासन का हमेशा यही कहना होता है कि मशीन खराब हो गई है, जल्द ही इसको ठीक करवा दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पत्र संख्या ईईसीएल / सीटी - सीएएमसी / बिलासपुर / 012/18/13 में खुलासा हुआ है कि विभाग सिटी स्कैन मशीन में एक साल का 13 लाख 79,000 हजार रुपये खर्च करता है। अब इस रिपोर्ट में हैरानी की बात यह सामने आती है कि जब मरीजों को इसकी सुविधा यहां पर मिलती नहीं है तो फिर विभाग इतना खर्चा कागजों में दर्शा कर क्या साबित करना चाहता है। इस तरह स्वास्थ्य विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही के चलते विभागीय अधिकारियों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
गौर हो कि बिलासपुर अस्पताल में आए दिन मरीज अपना चेकअप करवाने के लिए आते हैं। इसके चलते अधिकतर चिकित्सक अपनी जांच में मरीजों को सिटी स्कैन करवाने के लिए बोलते हैं लेकिन अस्पताल में सिटी स्कैन की मशीन की सुविधा कम मिलने के चलते लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाती है। वहीं, अधिकतर समय यहां पर हादसों के समय घायलों को सिटी स्कैन करवाने के लिए निजी लैबों में भेज दिया जाता है, जहां पर उनसे अधिक पैसे वसूले जाते हैं। इस संदर्भ में कई बार मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग को भी अवगत करवाया, लेकिन स्थिति में कोई अधिक बदलाव नहीं देखा गया।
विज्ञापन
-------
विज्ञापन
बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर की कार्यप्रणाली एक बार फिर से शक के घेरे में आना शुरू हो गई है क्योंकि यहां पर लगी सिटी स्कैन मशीन की सालाना रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विभाग एक साल में इस मशीन पर 13 लाख से अधिक खर्च करता है। जबकि सच्चाई यह है कि अस्पताल में मरीजों को अधिकतर समय सिटी स्कैन मशीन की सुविधा नहीं मिलती है। हमेशा अस्पताल में सिटी स्कैन खराब स्थिति में दिखाई जाती है और अस्पताल प्रशासन का हमेशा यही कहना होता है कि मशीन खराब हो गई है, जल्द ही इसको ठीक करवा दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पत्र संख्या ईईसीएल / सीटी - सीएएमसी / बिलासपुर / 012/18/13 में खुलासा हुआ है कि विभाग सिटी स्कैन मशीन में एक साल का 13 लाख 79,000 हजार रुपये खर्च करता है। अब इस रिपोर्ट में हैरानी की बात यह सामने आती है कि जब मरीजों को इसकी सुविधा यहां पर मिलती नहीं है तो फिर विभाग इतना खर्चा कागजों में दर्शा कर क्या साबित करना चाहता है। इस तरह स्वास्थ्य विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही के चलते विभागीय अधिकारियों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
विज्ञापन
गौर हो कि बिलासपुर अस्पताल में आए दिन मरीज अपना चेकअप करवाने के लिए आते हैं। इसके चलते अधिकतर चिकित्सक अपनी जांच में मरीजों को सिटी स्कैन करवाने के लिए बोलते हैं लेकिन अस्पताल में सिटी स्कैन की मशीन की सुविधा कम मिलने के चलते लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाती है। वहीं, अधिकतर समय यहां पर हादसों के समय घायलों को सिटी स्कैन करवाने के लिए निजी लैबों में भेज दिया जाता है, जहां पर उनसे अधिक पैसे वसूले जाते हैं। इस संदर्भ में कई बार मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग को भी अवगत करवाया, लेकिन स्थिति में कोई अधिक बदलाव नहीं देखा गया।
विज्ञापन
-------