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धूमल पर उसी का हथियार चलाया कांग्रेस ने
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 15 Mar 2014 12:07 PM IST
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राजनीति भी कई तरह के खेल दिखाती है। जिस राजेंद्र राणा को राजनीति के गुर पूर्व मुख्यमंत्री धूमल ने अपने दो कार्यकालों में सिखाए, वो ही अब विधायक पद छोड़कर धूमल पुत्र अनुराग ठाकुर को ललकारने निकले हैं।
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हमीरपुर में कांग्रेस ने धूमल पर उसी का हथियार चला कर नया दांव खेला है। अब नतीजा जो भी हो, लेकिन इससे हमीरपुर की सियासी ‘जंग’ रोचक होगी। हमीरपुर से भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ठाकुर भाजपा के प्रत्याशी हैं।
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हमीरपुर में भाजपा के कई नेताओं में खीझ है कि आखिर राणा धूमल के करीब कैसे आए? राणा ने विधानसभा चुनाव में स्व. जगदेव चंद की बहु उर्मिल ठाकुर को 14 हजार वोट से हराया था।
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शुक्रवार को जब राणा कांग्रेस में शामिल हुए तो उर्मिल का कमेंट था-अंतत: वह उसी दल का हुआ, जहां से आया था।
उर्मिल कहती हैं -1998 से 2003 के कार्यकाल में मुख्यमंत्री धूमल से राजेंद्र राणा को उनके ओएसडी स्व. कर्मवीर वर्मा ने मिलाया था। वर्ष 2000 में सीएम दफ्तर में ही उनसे मुलाकात हुई, हालांकि वह मेरे ही गांव से हैं। लेकिन व्यवसाय के सिलसिले में चंडीगढ़ ही रहते थे। 2002 में राजेंद्र राणा को भाजपा में लाने का बूथ वालों ने विरोध किया। 2004 में उनकी सदस्यता मैंने खुद पटलांदर से की, ये सोचकर कि मुख्यमंत्री को लड़का पसंद है।
पार्टी के कई और लोग भी बताते हैं कि धूमल और राणा की नजदीकी 2003 में सत्ता से बाहर होने पर बढ़ी। दोबारा 2008 में सत्ता में आए तो राणा को प्रेस एडवायजरी कमेटी का चेयरमैन लगाया। इससे पहले वह पार्टी प्रवक्ता भी रहे। 2011-12 में जब पंचायती राज चुनाव आए तो राणा से पहली बार मतभेद तब हुए, जब उन्होंने सुजानपुर में जिला परिषद और बीडीसी में अपने लोग तैयार कर लिए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
इस मामले में हिमाचल के सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि मेरे राजनीतिक जीवन में यह पहली घटना है, जिसमें एक एमएलए 4 साल का कार्यकाल छोड़ कर चुनाव में उतर रहा है। इस आत्मविश्वास में कुछ तो सब्सटांस (अर्थ) होगा। सरकार और कांग्रेस उनके साथ है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि मैं अति-आत्मविश्वास में नहीं हूं। जनसेवा के लिए किसी पद की लालसा भी नहीं है। कांग्रेस का साथ मिला है। हमीरपुर सीट पर बड़ी घटना होने वाली है। जनता तय करेगी कौन हल्का प्रत्याशी है और कौन भारी?
बुटेल ने जता दी सहानुभूति
राजेंद्र राणा ने विधानसभा में जब अपना इस्तीफा सौंपा तो विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने बदले में शुभकामनाओं के साथ सहानुभूति भी जता दी। बोले - इन ऐनी केस, ऑल दी बेस्ट। मतलब था - जीतो या हारो, मेरी शुभकामनाएं। मतलब यह कि जिस राह पर राणा पद छोड़कर गए हैं, वह इतनी आसान भी नहीं है।