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Yamuna Nagar News: बेहोश होने के लिए खुद ही देने पड़ते हैं 1500 रुपये

Thu, 02 Jul 2026 03:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 02 Jul 2026 03:20 AM IST
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You have to pay Rs 1500 to faint yourself.
ईएसआई अस्पताल जगाधरी। संवाद
यमुनानगर। ईएसआई अस्पताल जगाधरी में लंबे समय से एनेस्थेटिस्ट का पद खाली है। ऐसे में अस्पताल में होने वाली डिलीवरी या अन्य किसी भी सर्जरी के लिए बेहोशी का डॉक्टर बाहर से बुलाना पड़ता है। इस डॉक्टर की फीस के रूप में मरीजों को खुद 1500 रुपये देने पड़ रहे हैं। जबकि ईएसआई योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के उपचार उपलब्ध कराना है।
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जानकारी के अनुसार कर्मचारियों और उनके आश्रितों को निशुल्क व बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ईएसआई अस्पताल की व्यवस्था की गई है। जिन कर्मचारियों के वेतन से हर महीने इलाज के लिए पहले ही अंशदान काट लिया जाता है, उन्हें अस्पताल में उपचार के दौरान भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी विशेषज्ञ) और नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण मरीजों के परिजनों से ऑपरेशन और डिलीवरी के समय अलग से रुपये लिए जा रहे हैं। ईएसआई अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 300 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों और उनके परिवारों की होती है। ऐसे अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के महत्वपूर्ण पद खाली होना व्यवस्था की गंभीर खामी माना जा रहा है। अस्पताल में स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं हैं। एक गायनी डॉक्टर अनुबंध के आधार पर सेवाएं दे रही हैं। वह दोपहर दो बजे तक ही अस्पताल में रहती हैं। इसके बाद यदि किसी गर्भवती महिला की डिलीवरी या आपात स्थिति आती है तो बाहर से स्त्री रोग विशेषज्ञ को बुलाना पड़ता है। इसके लिए भी मरीज के परिजनों को अपने पास से करीब 2000 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। ऐसे में सामान्य प्रसव भी कई परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। यही वह है कि अब गर्भवतियां ईएसआई में डिलीवरी नहीं कराती। यही वजह है कि इस साल में ईएसआई में एक भी डिलीवरी नहीं हुई है।
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रुपये वापस करने का प्रावधान करें : आशीष धीमान
भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष आशीष धीमान का कहना है कि कर्मचारी हर महीने अपने वेतन से ईएसआई का अंशदान इसलिए जमा करते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर बिना अतिरिक्त खर्च के इलाज मिल सके। लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का खामियाजा मरीजों को अपनी जेब से भुगतान कर उठाना पड़ रहा है। यदि सरकार कर्मचारियों से नियमित अंशदान ले रही है तो अस्पताल में सभी आवश्यक विशेषज्ञों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। जो पैसे बेहोशी विशेषज्ञ को देने पड़ते हैं वह भी वापस करने का प्रावधान होना चाहिए। एनेस्थेटिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ जैसे जरूरी पद लंबे समय तक खाली रहने से न केवल मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। संवाद
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वर्जन:
ईएसआई में काफी समय से एनेस्थेटिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसलिए एनेस्थेटिस्ट को बाहर से ही बुलाना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी के बारे में मुख्यालय लिखा हुआ है। उम्मीद है जल्द ही अस्पताल में डॉक्टर आ जाएंगे।
- डाॅ. सुमन चौहान, एमएस, ईएसआई अस्पताल।
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