{"_id":"587287a94f1c1b1b75ba7ebf","slug":"yamuna-nagar-jec-ke-jhham","type":"story","status":"publish","title_hn":"लक्कड़ कारोबार मंडौली हुआ शिफ्ट ट्रकों का जाम अब भी आफत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लक्कड़ कारोबार मंडौली हुआ शिफ्ट ट्रकों का जाम अब भी आफत
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Mon, 09 Jan 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
c
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) को सहारनपुर मार्ग पर दशकों से चल रहे लक्कड़ कारोबार को मंडौली में बनी अस्थाई लक्कड़ मंडी में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे कुछ हद तक जाम व हादसों पर अंकुश लग सकेगा, किंतु इसी मार्ग पर पुराना हमीदा के पास तीन किलोमीटर तक हाइवे के दोनों ओर खड़े सैकड़ों ट्रक अब भी जाम के साथ जान पर ऑफत बनते नजर आ रहे हैं।
बता दें कि जिले में ट्रांसपोर्ट नगर न होने से हजारों ट्रक शहर से निकलकर हाईवे व अन्य सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं। सबसे अधिक ट्रक एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर विश्वकर्मा चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल तक करीब तीन किलोमीटर मार्ग के दोनों ओर सैकड़ों ट्रक खड़े हैं। यहीं पर ट्रकों की मरम्मत का कार्य भी होता है। ट्रांसपोर्ट नगर की दरकार में ऐसा करना ट्रांसपोर्टरों व ट्रक मालिकों की मजबूरी बन गई है। जबकि इससे मार्ग के संकरा होने से हर वक्त जाम की दिक्कत के साथ हादसों की भी संभावना बनी रहती है। फोग सीजन में हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। बीते वर्षों में हाईवे किनारे खड़े ट्रक धुंध बढ़ने पर कई हादसों की वजह बन चुके हैं।
वर्ष-1990 से हो रहा अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का प्रयास
वर्ष-1990 से प्रयास हैं कि जिले में अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जाए, किंतु तब से ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल अटकी हुई है। इस कारण समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उधर, 2014 में यमुनानगर के दौरे पर आए सीएम मनोहर लाल खट्टर इस कार्य को जल्द पूरा होने घोषणा कर गए। ट्रांसपोर्टरों सहित इस क्षेत्र से जुड़े तमाम लोगों को उम्मीद हुई कि जल्द सकारात्मक पहल होगी, किंतु अभी तक इस दिशा में कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
एक बार में निकल पाता है सिर्फ एक चारपहिया वाहन
शहर से गुजरने वाले एनएच-73 के एक ओर शहर की आधी आबादी का एरिया पुराना हमीदा में बसा हुआ है। जहां कई दशक से सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों सहित हजारों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। सरकार को व्यापार से करोड़ों का राजस्व मिलने के बाद भी अलग ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बन पाया। ऐसे में माल ढोने वाले ट्रक विश्वकर्मा चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल तक सड़क के दोनों ओर किनारे खड़े रहते हैं और यहीं उनके रिपेयर का भी काम होता है।
इससे ट्रैफिक बढ़ने पर जाम की स्थिति में हाईवे की एक लेन पर एक बार में एक ही चारपहिया वाहन निकल पता है। इस बीच तीन व दोपहिया वाहन चालकों सहित राहगीरों का गुजरना जोखिम बन जाता है। फोग सीजन (दिसंबर-फरवरी) के बीच हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। बीते वर्षों में भी खड़े ट्रकों में टकराने व जाम के बीच ऑवरटेक करते हुए कई हादसे हुए। बावजूद इसके प्रशासन सबक लेता नहीं दिख रहा है।
हाइवे पर सफेद पट्टी नहीं, जमी है धुल-मिट्टी
हाईवे किनारे खड़े ट्रकों के अलावा भी विश्वकर्मा चौक से नहर के पुल तक यातायात फोग सीजन के मद्देनजर प्रबंध अधूरे हैं। दोनों ओर ट्रकों के खड़े रहने से मार्ग पर सफेद पट्टी के बजाए धुल-मिट्टी जमी हुई है। जिसके बीच चालकों को वाहन चलाने में परेशानी होती है। साथ ही मार्ग पर रेट्रो रिफ्लेक्टर पूर्व सूचना बोर्ड, कैट आई सहित कई संकेतक नहीं हैं, जिससे धुंध में चालक को वाहन चलाने में परेशानी न हो और हादसों पर अंकुश लग सके।
ट्रांसपोर्ट नगर न होने से तीन राज्यों की ट्रैफिक को दिक्कत
एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) से चंडीगढ़ सहित पंजाब, हरियाणा व यूपी आने-जाने वाले वाहन गुजरते हैं, जिसे मार्ग किनारे ट्रकों से जाम की दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अलग ट्रांसपोर्ट नगर न होने से कई दशक से यह समस्या है। जबकि फोग सीजन में जाम की दिक्कत के साथ हादसे का ग्राफ भी बढ़ जाता है।
एनएच-73 किनारे खड़े ट्रकों के लिए अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की प्लानिंग है। अपने स्तर पर अवैध पार्किंग के लिए ट्रकों समेत अन्य वाहनों के चालान किए जाते हैं।
निर्मल सिंह, प्रभारी, यातायात थाना।
ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन फाइनल होते ही इस दिशा में तेजी से काम होगा और जल्द जिले को ट्रांसपोर्ट नगर की सौगात दी जाएगी।
घनश्यामदास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।
विज्ञापन
बता दें कि जिले में ट्रांसपोर्ट नगर न होने से हजारों ट्रक शहर से निकलकर हाईवे व अन्य सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं। सबसे अधिक ट्रक एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर विश्वकर्मा चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल तक करीब तीन किलोमीटर मार्ग के दोनों ओर सैकड़ों ट्रक खड़े हैं। यहीं पर ट्रकों की मरम्मत का कार्य भी होता है। ट्रांसपोर्ट नगर की दरकार में ऐसा करना ट्रांसपोर्टरों व ट्रक मालिकों की मजबूरी बन गई है। जबकि इससे मार्ग के संकरा होने से हर वक्त जाम की दिक्कत के साथ हादसों की भी संभावना बनी रहती है। फोग सीजन में हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। बीते वर्षों में हाईवे किनारे खड़े ट्रक धुंध बढ़ने पर कई हादसों की वजह बन चुके हैं।
विज्ञापन
वर्ष-1990 से हो रहा अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का प्रयास
वर्ष-1990 से प्रयास हैं कि जिले में अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जाए, किंतु तब से ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल अटकी हुई है। इस कारण समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उधर, 2014 में यमुनानगर के दौरे पर आए सीएम मनोहर लाल खट्टर इस कार्य को जल्द पूरा होने घोषणा कर गए। ट्रांसपोर्टरों सहित इस क्षेत्र से जुड़े तमाम लोगों को उम्मीद हुई कि जल्द सकारात्मक पहल होगी, किंतु अभी तक इस दिशा में कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
एक बार में निकल पाता है सिर्फ एक चारपहिया वाहन
शहर से गुजरने वाले एनएच-73 के एक ओर शहर की आधी आबादी का एरिया पुराना हमीदा में बसा हुआ है। जहां कई दशक से सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों सहित हजारों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। सरकार को व्यापार से करोड़ों का राजस्व मिलने के बाद भी अलग ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बन पाया। ऐसे में माल ढोने वाले ट्रक विश्वकर्मा चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल तक सड़क के दोनों ओर किनारे खड़े रहते हैं और यहीं उनके रिपेयर का भी काम होता है।
इससे ट्रैफिक बढ़ने पर जाम की स्थिति में हाईवे की एक लेन पर एक बार में एक ही चारपहिया वाहन निकल पता है। इस बीच तीन व दोपहिया वाहन चालकों सहित राहगीरों का गुजरना जोखिम बन जाता है। फोग सीजन (दिसंबर-फरवरी) के बीच हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। बीते वर्षों में भी खड़े ट्रकों में टकराने व जाम के बीच ऑवरटेक करते हुए कई हादसे हुए। बावजूद इसके प्रशासन सबक लेता नहीं दिख रहा है।
हाइवे पर सफेद पट्टी नहीं, जमी है धुल-मिट्टी
हाईवे किनारे खड़े ट्रकों के अलावा भी विश्वकर्मा चौक से नहर के पुल तक यातायात फोग सीजन के मद्देनजर प्रबंध अधूरे हैं। दोनों ओर ट्रकों के खड़े रहने से मार्ग पर सफेद पट्टी के बजाए धुल-मिट्टी जमी हुई है। जिसके बीच चालकों को वाहन चलाने में परेशानी होती है। साथ ही मार्ग पर रेट्रो रिफ्लेक्टर पूर्व सूचना बोर्ड, कैट आई सहित कई संकेतक नहीं हैं, जिससे धुंध में चालक को वाहन चलाने में परेशानी न हो और हादसों पर अंकुश लग सके।
ट्रांसपोर्ट नगर न होने से तीन राज्यों की ट्रैफिक को दिक्कत
एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) से चंडीगढ़ सहित पंजाब, हरियाणा व यूपी आने-जाने वाले वाहन गुजरते हैं, जिसे मार्ग किनारे ट्रकों से जाम की दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अलग ट्रांसपोर्ट नगर न होने से कई दशक से यह समस्या है। जबकि फोग सीजन में जाम की दिक्कत के साथ हादसे का ग्राफ भी बढ़ जाता है।
एनएच-73 किनारे खड़े ट्रकों के लिए अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की प्लानिंग है। अपने स्तर पर अवैध पार्किंग के लिए ट्रकों समेत अन्य वाहनों के चालान किए जाते हैं।
निर्मल सिंह, प्रभारी, यातायात थाना।
ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन फाइनल होते ही इस दिशा में तेजी से काम होगा और जल्द जिले को ट्रांसपोर्ट नगर की सौगात दी जाएगी।
घनश्यामदास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।