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Yamuna Nagar News: बिना शोधन के पश्चिमी यमुना नहर में गिर रहा 11 नालों का गंदा पानी
Mon, 24 Aug 2026 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 24 Aug 2026 01:11 AM IST
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पाइप की फोटो खींचते ही एमएलडी से बंद की गई पानी की सप्लाई। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पश्चिमी यमुना नहर को साफ-सुथरा रखने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। नगर निगम समेत विभिन्न सरकारी विभागों के नाले खुलेआम नहर में गिर रहे हैं। इन्हें बंद कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक ले जाने की योजना का असर नजर नहीं आ रहा। बूड़िया से पताशगढ़ तक 11 नालों का पानी बिना किसी शोधन के सीधे पश्चिमी यमुना नहर में पहुंच रहा है।
इसका खुलासा इसी साल आई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में भी हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार नहर में गिरने वाले 11 नालों में से पांच नगर निगम, तीन पंचायत विभाग और तीन जनस्वास्थ्य विभाग के अधीन हैं। बोर्ड ने गंभीर स्थिति को देखते हुए तीन फरवरी को तीनों विभागों को पत्र लिखकर नालों को बंद करने और गंदे पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।
मॉडल कॉलोनी के पास स्थिति और भी चिंताजनक है। आजाद नगर और शांति कॉलोनी की ओर से आने वाला शहर का काफी गंदा पानी नाले के जरिये पश्चिमी यमुना नहर में पहुंच रहा है। बताया गया है कि यहां से ओपी जिंदल पार्क के पास बने पांच एमएलडी क्षमता के एसटीपी तक जाने वाले पानी का प्रवाह बंद कर दिया गया और उसे सीधे नहर में छोड़ दिया गया।
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आजाद नगर और मुंडा माजरा में खालसा कॉलेज के पास से गुजरने वाला जनस्वास्थ्य विभाग का गंदा पानी भी नहर में गिर रहा है। शनि मंदिर के पास दो स्थानों पर सीवरेज का पानी नहर में मिल रहा है। बूड़िया दयालगढ़, अमादलपुर और दड़वा माजरी गांवों में पंचायत विभाग के नाले भी सीधे नहर में गिर रहे हैं।
कुछ माह पहले हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण प्रदूषण विषय समिति के अध्यक्ष एवं कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के नेतृत्व में टीम ने शहर का निरीक्षण किया था। उस दौरान नालों का गंदा पानी सीधे नहर में गिरता मिलने पर समिति अध्यक्ष ने नाराजगी जताई थी। विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
जिंदल पार्क के पास एसटीपी का पानी नहर में छोड़ा
पड़ताल के दौरान ओपी जिंदल पार्क के पास स्थित पांच एमएलडी एसटीपी का पानी भी पाइप के जरिये सीधे पश्चिमी यमुना नहर में जाता मिला। इसकी तस्वीर भी कैमरे में कैद की गई। एसटीपी कर्मचारियों को जब इसकी जानकारी हुई तो नहर में जा रही पानी की सप्लाई तत्काल बंद कर दी गई। इससे एसटीपी की व्यवस्था और नहर में पानी छोड़े जाने को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पूर्व पार्षद बोले - बैठकों से आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई
पूर्व पार्षद निर्मल चौहान और नीलू पंडित का कहना है कि नालों को बंद कर नहर को प्रदूषण मुक्त करने की कवायद वर्षों से चल रही है। अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर नालों को बंद करने की बात कहते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकारी विभागों के नाले ही नहर को प्रदूषित कर रहे हैं और योजनाएं फाइलों व बैठकों तक सीमित हैं।
एसटीपी का पानी नहर में नहीं छोड़ सकते। इसे केवल डिच ड्रेन में ही छोड़ा जा सकता है। यदि पानी नहर में डाला जा रहा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। - दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।
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यमुनानगर। पश्चिमी यमुना नहर को साफ-सुथरा रखने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। नगर निगम समेत विभिन्न सरकारी विभागों के नाले खुलेआम नहर में गिर रहे हैं। इन्हें बंद कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक ले जाने की योजना का असर नजर नहीं आ रहा। बूड़िया से पताशगढ़ तक 11 नालों का पानी बिना किसी शोधन के सीधे पश्चिमी यमुना नहर में पहुंच रहा है।
इसका खुलासा इसी साल आई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में भी हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार नहर में गिरने वाले 11 नालों में से पांच नगर निगम, तीन पंचायत विभाग और तीन जनस्वास्थ्य विभाग के अधीन हैं। बोर्ड ने गंभीर स्थिति को देखते हुए तीन फरवरी को तीनों विभागों को पत्र लिखकर नालों को बंद करने और गंदे पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।
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मॉडल कॉलोनी के पास स्थिति और भी चिंताजनक है। आजाद नगर और शांति कॉलोनी की ओर से आने वाला शहर का काफी गंदा पानी नाले के जरिये पश्चिमी यमुना नहर में पहुंच रहा है। बताया गया है कि यहां से ओपी जिंदल पार्क के पास बने पांच एमएलडी क्षमता के एसटीपी तक जाने वाले पानी का प्रवाह बंद कर दिया गया और उसे सीधे नहर में छोड़ दिया गया।
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आजाद नगर और मुंडा माजरा में खालसा कॉलेज के पास से गुजरने वाला जनस्वास्थ्य विभाग का गंदा पानी भी नहर में गिर रहा है। शनि मंदिर के पास दो स्थानों पर सीवरेज का पानी नहर में मिल रहा है। बूड़िया दयालगढ़, अमादलपुर और दड़वा माजरी गांवों में पंचायत विभाग के नाले भी सीधे नहर में गिर रहे हैं।
कुछ माह पहले हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण प्रदूषण विषय समिति के अध्यक्ष एवं कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के नेतृत्व में टीम ने शहर का निरीक्षण किया था। उस दौरान नालों का गंदा पानी सीधे नहर में गिरता मिलने पर समिति अध्यक्ष ने नाराजगी जताई थी। विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
जिंदल पार्क के पास एसटीपी का पानी नहर में छोड़ा
पड़ताल के दौरान ओपी जिंदल पार्क के पास स्थित पांच एमएलडी एसटीपी का पानी भी पाइप के जरिये सीधे पश्चिमी यमुना नहर में जाता मिला। इसकी तस्वीर भी कैमरे में कैद की गई। एसटीपी कर्मचारियों को जब इसकी जानकारी हुई तो नहर में जा रही पानी की सप्लाई तत्काल बंद कर दी गई। इससे एसटीपी की व्यवस्था और नहर में पानी छोड़े जाने को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पूर्व पार्षद बोले - बैठकों से आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई
पूर्व पार्षद निर्मल चौहान और नीलू पंडित का कहना है कि नालों को बंद कर नहर को प्रदूषण मुक्त करने की कवायद वर्षों से चल रही है। अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर नालों को बंद करने की बात कहते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकारी विभागों के नाले ही नहर को प्रदूषित कर रहे हैं और योजनाएं फाइलों व बैठकों तक सीमित हैं।
एसटीपी का पानी नहर में नहीं छोड़ सकते। इसे केवल डिच ड्रेन में ही छोड़ा जा सकता है। यदि पानी नहर में डाला जा रहा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। - दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।

पाइप की फोटो खींचते ही एमएलडी से बंद की गई पानी की सप्लाई। संवाद

पाइप की फोटो खींचते ही एमएलडी से बंद की गई पानी की सप्लाई। संवाद