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महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली
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श्रीमद्भागवत कथा शुभारंभ पर पूजा करते यज्ञमान व श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। सुंदर नगर की राजधानी कॉलोनी में क्षेत्रवासियों की ओर से श्रीमद्भागवत कथा करवाई जा रही है। कथा शुभारंभ से पहले सोमवार को महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा निकाली।
पहले दिन आचार्य नितिन कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत जीवन में सत्य, निष्ठा, परोपकार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भक्त भगवान को नहीं ढूंढता, भगवान भक्त को ढूंढते हैं। भक्ति एक स्थिति का नाम है, उपासना से भक्ति का कोई अर्थ नहीं है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सभी को भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि दुनिया में सबसे कठिन भक्ति के स्वरूप का निर्णय करना है। भक्ति का अर्थ भाव, एक विशेष भावना व समर्पण है। भावनाओं से ही रिश्ता बनता है। भक्त और भगवान के बीच का रिश्ता भक्ति है। भक्ति से भगवान की प्राप्ति की जा सकती है। श्रीमद्भागवत मनुष्य को ईश्वर प्राप्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
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उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य में धन लोभ, काम, क्रोध, मद का भाव होगा वह कभी भक्ति मार्ग पर नहीं चल पाएगा। इसके लिए मनुष्य को इन अवगुणों का त्याग करना होगा। भगवान भक्त की आर्थिक नहीं अध्यात्मिक स्थिति देखते हैं। जिसमें भगवान के प्रति समर्पण होगा, वह उन्हें प्राप्त कर लेगा। इस दौरान उन्होंने भक्त प्रह्लाद कथा का वृत्तांत सुनाया। कथा में भजनों से प्रभु महिमा का गुणगान किया गया। भजन सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबकर नाचने लगे।
पहले दिन कथा समापन पर यजमान भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा व उनकी पत्नी ने आरती की। सपरा ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा 13 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर तीन से शाम छह बजे तक चलेगी। कथा के समापन पर 13 नवंबर को सुबह नौ बजे हवन होगा।
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जगाधरी। सुंदर नगर की राजधानी कॉलोनी में क्षेत्रवासियों की ओर से श्रीमद्भागवत कथा करवाई जा रही है। कथा शुभारंभ से पहले सोमवार को महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा निकाली।
पहले दिन आचार्य नितिन कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत जीवन में सत्य, निष्ठा, परोपकार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भक्त भगवान को नहीं ढूंढता, भगवान भक्त को ढूंढते हैं। भक्ति एक स्थिति का नाम है, उपासना से भक्ति का कोई अर्थ नहीं है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सभी को भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि दुनिया में सबसे कठिन भक्ति के स्वरूप का निर्णय करना है। भक्ति का अर्थ भाव, एक विशेष भावना व समर्पण है। भावनाओं से ही रिश्ता बनता है। भक्त और भगवान के बीच का रिश्ता भक्ति है। भक्ति से भगवान की प्राप्ति की जा सकती है। श्रीमद्भागवत मनुष्य को ईश्वर प्राप्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
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उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य में धन लोभ, काम, क्रोध, मद का भाव होगा वह कभी भक्ति मार्ग पर नहीं चल पाएगा। इसके लिए मनुष्य को इन अवगुणों का त्याग करना होगा। भगवान भक्त की आर्थिक नहीं अध्यात्मिक स्थिति देखते हैं। जिसमें भगवान के प्रति समर्पण होगा, वह उन्हें प्राप्त कर लेगा। इस दौरान उन्होंने भक्त प्रह्लाद कथा का वृत्तांत सुनाया। कथा में भजनों से प्रभु महिमा का गुणगान किया गया। भजन सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबकर नाचने लगे।
पहले दिन कथा समापन पर यजमान भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा व उनकी पत्नी ने आरती की। सपरा ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा 13 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर तीन से शाम छह बजे तक चलेगी। कथा के समापन पर 13 नवंबर को सुबह नौ बजे हवन होगा।