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आठ महीने से टूटी सड़कों को मरम्मत का इंतजार
यमुनानगर
Updated Wed, 19 Feb 2014 12:00 AM IST
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यमुना नहर में आई बाढ़ से आसपास के क्षेत्र में तबाही का मंजर आज भी देखने
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को मिल जाता है। आठ महीने पहले आई बाढ़ से टूटी सड़कों और पुलियों को
प्रशासन अब तक ठीक नहीं कर पाया है।
ये टूटी सड़कें और पुलियां बाढ़ के दौरान दिए जख्मों को आज भी कुरेद रही है। बाढ़ करीब आठ माह पहले आई थी। लेकिन अभी तक इन सड़कों को ठीक करने के नाम पर प्रशासन को कोई प्रयास देखने को नहीं मिला है। जनता टूटी सड़कों पर जान जोखिम में डालकर सफर कर रही है और प्रशासन है कि इस क्षेत्र की सुध लेने को तैयार नहीं है। बारिश का मौसम आने में तीन चार माह ही बाकी बचे हैं।
अगर अभी भी इन सड़कों को दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए जाए तो तब ही जून तक टूटी सड़कें और पुलियां ठीक हो पाएंगे। लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान पानी से जूझना पड़ता है और बाढ़ के बाद टूटी सड़कों से उन्हें दोचार होना पड़ता है। बाढ़ के दौरान सड़कों के कई कई फुट किनारे ढह गए थे, कुछ जगहों पर तो लोगों ने मिट्टी डाल उन्हेें खुद ही ठीक कर लिया था।
लेकिन कुछ जगहों पर तो आज भी गड्ढे अधिकारियों की लापरवाही बयां कर रहे हैं। अगर प्रशासन इन टूटी सड़कों और पुलियों को ढाई से तीन माह में ठीक करा पाता है तो ठीक है नहीं तो ये सड़कें और पुलिया अगले साल ही ठीक हो पाएंगी। क्योंकि माधुबांस पुलिया और यमुना के आसपास की टूटी सड़कों के पास बारिश के दिनों में पानी बहता है। इससे उन दिनों मैटीरियल को जमा पाना अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर के समान होगी।
ये सड़केें टूटीं
बाढ़ के दौरान एसके हाईवे से कमालपुर-डिक्का की ओर जाने वाली सड़क का काफी हिस्सा बह गया था। इस सड़क पर बाढ़ के निशान साफ देखने को मिल जाते हैं, वहीं जठलाना से गुमथला की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर भी कई जगह बाढ़ ने सड़क को क्षतिग्रस्त किया था वहां पर भी स्थित दयनीय है। इसके साथ ही रादौर-जठलाना रोड पर गांव माधुबांस के पास नवनिर्मित पुलिया को बाढ़ का पानी बह कर ले गया था। जिसे ठीक करने के लिए आठ माह बाद भी एक ईंट नहीं लगाई गई है। यह पुलिया टूटी होने से तो भारी वाहनों का इस रास्ते पर आना जाना बिलकुल बंद है। दो पहिया या कार को पुलिया के साइड से बनी रास्ते से ग्रामीण निकाल शहर में आकर अपने रोजमर्रा के काम कर रहे हैं।
शाम ढलते नहीं चला जा सकता सड़क पर
क्षेत्रवासी गुरमेल सिंह, सुलेमान, ब्रह्म सिंह और ज्ञान सिंह का कहना है कि दिन के समय तो कमालपुर-डीका सड़क पर लोग ध्यान से निकल जाते हैं। लेकिन शाम ढलने के बाद इस सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे पड़े हैं और कई जगह से सड़क के किनारे ढह गए हैं। इससे कोई न कोई व्यक्ति यहां पर हादसे का शिकार होता रहता है। उनका कहना है कि इस रोड से आधा दर्जन गांव जुड़ते हैं। जठलाना क्षेत्र के गांव के जिन भी लोगों को यूपी जाना होता है वे इसी रास्ते से जाते थे। लेकिन इन दिनों सड़क की हालत खराब होने से लोगों को शादीपुर रोड से लंबा चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस सड़क को दुरुस्त करने की मांग कई बार उठा चुके हैं। लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
सिंचाई विभाग हुआ अलर्ट
सड़कों से जुड़े विभाग भले ही बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई करने मेें पिछड़े हो। लेकिन सिंचाई विभाग इसमें अलर्ट दिख रहा है। नहरों के टूटे स्टड और अन्य कार्यों के लिए करीब 17 करोड़ रुपये के टेंडर मांग गए हैं। जिनसे नहरों के टूटे हिस्सों को ठीक कराया जाएगा ताकि आने वाले समय में नहरों का पानी बाहर न जा सके।
ये टूटी सड़कें और पुलियां बाढ़ के दौरान दिए जख्मों को आज भी कुरेद रही है। बाढ़ करीब आठ माह पहले आई थी। लेकिन अभी तक इन सड़कों को ठीक करने के नाम पर प्रशासन को कोई प्रयास देखने को नहीं मिला है। जनता टूटी सड़कों पर जान जोखिम में डालकर सफर कर रही है और प्रशासन है कि इस क्षेत्र की सुध लेने को तैयार नहीं है। बारिश का मौसम आने में तीन चार माह ही बाकी बचे हैं।
अगर अभी भी इन सड़कों को दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए जाए तो तब ही जून तक टूटी सड़कें और पुलियां ठीक हो पाएंगे। लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान पानी से जूझना पड़ता है और बाढ़ के बाद टूटी सड़कों से उन्हें दोचार होना पड़ता है। बाढ़ के दौरान सड़कों के कई कई फुट किनारे ढह गए थे, कुछ जगहों पर तो लोगों ने मिट्टी डाल उन्हेें खुद ही ठीक कर लिया था।
लेकिन कुछ जगहों पर तो आज भी गड्ढे अधिकारियों की लापरवाही बयां कर रहे हैं। अगर प्रशासन इन टूटी सड़कों और पुलियों को ढाई से तीन माह में ठीक करा पाता है तो ठीक है नहीं तो ये सड़कें और पुलिया अगले साल ही ठीक हो पाएंगी। क्योंकि माधुबांस पुलिया और यमुना के आसपास की टूटी सड़कों के पास बारिश के दिनों में पानी बहता है। इससे उन दिनों मैटीरियल को जमा पाना अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर के समान होगी।
ये सड़केें टूटीं
बाढ़ के दौरान एसके हाईवे से कमालपुर-डिक्का की ओर जाने वाली सड़क का काफी हिस्सा बह गया था। इस सड़क पर बाढ़ के निशान साफ देखने को मिल जाते हैं, वहीं जठलाना से गुमथला की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर भी कई जगह बाढ़ ने सड़क को क्षतिग्रस्त किया था वहां पर भी स्थित दयनीय है। इसके साथ ही रादौर-जठलाना रोड पर गांव माधुबांस के पास नवनिर्मित पुलिया को बाढ़ का पानी बह कर ले गया था। जिसे ठीक करने के लिए आठ माह बाद भी एक ईंट नहीं लगाई गई है। यह पुलिया टूटी होने से तो भारी वाहनों का इस रास्ते पर आना जाना बिलकुल बंद है। दो पहिया या कार को पुलिया के साइड से बनी रास्ते से ग्रामीण निकाल शहर में आकर अपने रोजमर्रा के काम कर रहे हैं।
शाम ढलते नहीं चला जा सकता सड़क पर
क्षेत्रवासी गुरमेल सिंह, सुलेमान, ब्रह्म सिंह और ज्ञान सिंह का कहना है कि दिन के समय तो कमालपुर-डीका सड़क पर लोग ध्यान से निकल जाते हैं। लेकिन शाम ढलने के बाद इस सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे पड़े हैं और कई जगह से सड़क के किनारे ढह गए हैं। इससे कोई न कोई व्यक्ति यहां पर हादसे का शिकार होता रहता है। उनका कहना है कि इस रोड से आधा दर्जन गांव जुड़ते हैं। जठलाना क्षेत्र के गांव के जिन भी लोगों को यूपी जाना होता है वे इसी रास्ते से जाते थे। लेकिन इन दिनों सड़क की हालत खराब होने से लोगों को शादीपुर रोड से लंबा चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस सड़क को दुरुस्त करने की मांग कई बार उठा चुके हैं। लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
सिंचाई विभाग हुआ अलर्ट
सड़कों से जुड़े विभाग भले ही बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई करने मेें पिछड़े हो। लेकिन सिंचाई विभाग इसमें अलर्ट दिख रहा है। नहरों के टूटे स्टड और अन्य कार्यों के लिए करीब 17 करोड़ रुपये के टेंडर मांग गए हैं। जिनसे नहरों के टूटे हिस्सों को ठीक कराया जाएगा ताकि आने वाले समय में नहरों का पानी बाहर न जा सके।